गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री के मामले को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। शुक्रवार को इस मामले में अदालत में बहस हुई। जिसके बाद हाई कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस बीरेन वैष्णव ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
जून में केजरीवाल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और हाईकोर्ट से अपने उस आदेश की समीक्षा की मांग की थी जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री की डिग्री की जानकारी प्रदान करने के लिए केंद्रीय सूचना आयोग के निर्देश को रद्द कर दिया था। मार्च में, जस्टिस वैष्णव ने सीआईसी के आदेश के खिलाफ गुजरात विश्वविद्यालय की अपील की अनुमति दी थी और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। केजरीवाल के अपनी समीक्षा याचिका में उठाए गए प्रमुख तर्कों में से एक यह है कि मोदी की डिग्री ऑनलाइन उपलब्ध होने के गुजरात विश्वविद्यालय के दावे के विपरीत, ऐसी कोई डिग्री विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है।
यह है मामला
पीएम की डिग्री की जानकारी मांगने वाला मामला सात साल पुराना है। दरअसल अप्रैल 2016 में, केंद्रीय सूचना आयोग ने केजरीवाल से उनके चुनावी फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) के बारे में जानकारी मांगी थी। इसी दौरान केजरीवाल ने आयोग से कहा था कि वह सीआईसी को अपने बारे में आवश्यक जानकारी देने के लिए तैयार हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पीएम को भी उनकी शैक्षिक डिग्री के विवरण का खुलासा करने के लिए कहा जाना चाहिए।
केजरीवाल के जवाब को सीआईसी ने बतौर एक नागरिक का आरटीआई आवेदन माना। इसके बाद तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त एम श्रीधर आचार्युलु ने प्रधानमंत्री कार्यालय को दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय से पीएम मोदी की स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रियों की विशिष्ट संख्या और वर्ष प्रदान करने का निर्देश दिया। यह आदेश इसलिए दिया गया था कि पीएम से संबंधित कोई भी दस्तावेज खोजने और प्रदान करने में आसानी हो।