स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में बलूचिस्तान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर चल रही बहस के बीच विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि उनकी इस टिप्पणी को नीतिगत बदलाव नहीं समझा जाए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि प्रधानमंत्री को बलूचिस्तान तथा गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोगों ने धन्यवाद दिया कि उन्होंने पिछले हफ़्ते हुई सर्वदलीय बैठक में उनकी समस्याओं को महसूस किया और उनका संदेश प्रसारित किया। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि मोदी ने अगले कदम पर कुछ निर्देश भी दिए हैं, हालांकि हम अभी इन निर्देशों की जानकारी नहीं दे सकते। उन्होंने कहा, ‘इस समय मैं आपको यह जानकारी नहीं दे सकता। लेकिन विदेश मंत्रालय इस पर जरूर अमल करेगा क्योंकि पीओके के लोग भी हमारे अपने ही लोग हैं।’
बलूचिस्तान पर मोदी के बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘जहां तक इसे लेकर नीतिगत बदलाव की बात है तो मैं कहना चाहता हूं कि भारत सरकार ने बलूचिस्तान में पहले के हालात पर यह बयान दिया है। पूर्ववर्ती सरकार ने भी इस मसले पर बयान दिए हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि इस बार प्रधानमंत्री को लगातार मिल रहे संदेशों ने उन्हें देश की जनता के सामने इसका जिक्र करने के लिए प्रेरित किया है।’