भारत और नेपाल के बीच दक्षिण एशिया की पहली क्रॉस बॉर्डर तेल पाइपलाइन मोतिहारी-अमलेखगंज के बीच मंगलवार को शुरू हो गई। भारत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल से पीएम केपी शर्मा ओली ने वीडियो लिंक के जरिए एक साथ बटन दबाकर इसका उद्घाटन किया। इस पाइपलाइन से हिमालय क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति होगी और ईंधन ढुलाई का खर्च कम होगा। 66.92 किलोमीटर पाइपलाइन का 36.2 किलोमीटर हिस्सा नेपाल और 33 किलोमीटर हिस्सा भारत में पड़ता है। भारत सरकार ने इसमें 324 करोड़ रुपये निवेश किया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा, यह नेपाल के लिए बड़ उपलब्धि है। भारत और नेपाल विकास की ओर एक नजर से देखते हैं। लोगों की समृद्धि और खुशहाली के लिए दोनों देश सामाजिक राजनीतिक रूप से समर्पित हैं। उन्होंने कहा, मोदी सरकार का ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ और हमारी सरकार का ‘खुशहाल नेपाल, समृद्धि नेपाली’ की नीति जनता के प्रति हमारे समर्पण को दिखाती है।
रिकॉर्ड आधे समय में पूरा किया काम : मोदी
पीएम मोदी ने कहा, मोतिहारी-अमलेखगंज तेल पाइपलाइन परियोजना को रिकॉर्ड आधे समय में पूरा किया गया। इसके लिए 30 महीने का लक्ष्य था लेकिन 15 महीने के भीतर ही यह पूरी हो गई और इसका उद्घाटन भी हो गया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नेपाल एक साथ कई क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
यह परियोजना इसी का उदाहरण है। भारत के इस सहयोग से होने वाले मुनाफे को नेपाल की जनता के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा आने वाले समय में दोनों देश अन्य कई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे जिससे हमारे संबंध और मजबूत होंगे।
पहले पेट्रोल फिर डीजल जाएगा
अधिकारियों के मुताबिक मोतिहारी-अमलेखगंज पाइप लाइन से पहले चरण में पेट्रोल मोतिहारी से नेपाल जाएगा। इसके बाद इस पाइपलाइन से डीजल की आपूर्ति भी की जाएगी।
मोदी सरकार में साकार हुई परियोजना
मोतिहारी अमलेखगंज तेल पाइपलाइन परियोजना का प्रस्ताव सबसे पहले 1996 में आया था। लेकिन राजनीतिक कारणों के कारण यह टलता गया। 2014 में सरकार बनने के बाद जब पीएम मोदी काठमांडू दौरे पर गए तब इस परियोजना को रफ्तार मिली।
दोनों देशों की सहमति के बाद अगस्त 2015 में परियोजना पर काम शुरू हुआ लेकिन 2015 में आए भूकंप के बाद फिर इसे रोकना पड़ा। इसके बाद पिछले साल अप्रैल में परियोजना के तहत निर्माण शुरू हुआ।