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सास कह दे कि घर में बेटी चाहिए ही चाहिए, तो काम सफल हो जाएगा: PM मोदी

Thu, 08 Mar 2018 05:12 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, झुंझुनूं
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झुंझुनूं पहुंचे पीएम मोदी - फोटो : ANI
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ' के विस्तार कार्यक्रम में कहा कि यदि सास कह दे कि मुझे घर में बेटी चाहिए ही चाहिए, तो बेटियों को मारने का जो पाप पीढ़ियों से हो रहा है, उसे सुधारने में छह-सात पीढ़ियां नहीं, बल्कि दो पीढ़ियां ही काफी होंगी। 

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मोदी ने कहा कि लिंगानुपात सुधारने के काम का नेतृत्व जब तक 'मदर इन लॉ' नहीं संभालती, तो इस काम को समय ज्यादा लगेगा, लेकिन जब वह इस काम को अपने हाथ में ले ले, तो काम सफलतापूर्वक जल्दी हो जाएगा। सास कहे मुझे बेटी चाहिए तो इस मिशन को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झुंझुनूं में बृहस्पतिवार को 'बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ' के विस्तार कार्यक्रम की शुरुआत कर इसे पूरे देश में लागू किया। साथ ही, नौ हजार करोड़ के राष्ट्रीय पोषण मिशन की भी शुरुआत की। 
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उन्होंने कहा कि बेटियां तो घर की आन-बान-शान होती हैं। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि वेद से लेकर विवेकानन्द तक तो सब ठीक रहा, लेकिन बाद में बेटियों की बलि चढ़ाने की कुरीति पनप गई। 

18वीं शताबदी में एक गलत परम्परा 'दूधपीती' घर कर गई, जिसमें बेटी के जन्म होने पर उसे दूध से भरे एक बड़े बर्तन में डुबो दिया जाता था। यूं मारकर महापाप कर कहा जाता था कि हमारी बेटी दूधपीती हो गई।
 

बेटियों को पेट में ही मारने का महापाप कर दिया जाता है

उन्होंने कहा कि मुझे कई बार लगता है कि इसके बाद हालात और बद्तर हो गए और लगता है कि इससे ठीक तो 18वीं शताबदी थी, कम से कम बेटी जन्म तो लेकर दो सांस तो ले लेती थी। लेकिन इस युग में वैज्ञानिकता को हथियार बनाया और बेटियों को पेट में ही मारने का महापाप कर दिया जाता है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्त्री और पुरुष जब बराबर संख्या में होते हैं, तो समाज की सभी गतिविधयां सामान्य चलती हैं। यदि संख्या बराबर न हो, तो सोचा नहीं जा सकता कि समाज की कैसी दुर्दशा हो जाती है। 

उन्होंने कहा कि वे कई ऐसे परिवारों को जानते हैं, जिनके चार बेटे हैं और चारों के बड़े-बड़े बंगले व गाड़ियां हैं। फिर भी उनके माता-पिता वृद्धाश्रम में रहते हैं। लेकिन जिन माता-पिता की एक बेटी होती है, वह रोजगार का साधन जुटाती है और अपने बूढ़े माता-पिता की देखभाल के लिए साथ रखती है। जब झुंझुनूं की बेटी फाइटर प्लेन उड़ाती है, देश की बेटी सेटेलाइट बनाती है और खेलों में मैडल जीतकर लाती है, तो सीना चौड़ा हो जाता है। 

इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत उल्लेखनीय कार्य करने वाले छत्तीसगढ़ के रायगढ़, राजस्थान के सीकर और झुंझुनूं, तैलंगाना के हैदराबाद, गुजरात के अहमदाबाद, सिक्कम के नॉर्थ सिक्किम, जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर, पंजाब के तरण तारण तथा हरियाणा के सोनीपथ, कर्नाटक के बीजापुरा जिलों को सम्मानित किया। पोषण मिशन का लोगो बनाने वाली गरिमा जैन तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का पोस्टर बनाने वाले मुकेश गौतम को भी पुरस्कृत किया गया।
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पीएम बोलें, तो नरेंद्र मोदी नहीं, पोषण मिशन याद आना चाहिए

- फोटो : ANI
मोदी ने कहा कि पोषण मिशन सरकारी बजट से सफल नहीं बनाया जा सकता। इसे सफल बनाने में आप लोगों का साथ चाहिए। आप पीएम की कितनी ही आलोचना करें या कुछ भी कहें, लेकिन जब पीएम को याद करें, तो पोषण मिशन याद आना चाहिए, नरेंद्र मोदी नहीं। तब ये मिशन सफल होगा।

लटकने से नहीं वैज्ञानिक सोच से बढ़ेगी लम्बाई
मोदी ने कहा कि हर कोई लम्बा-चौड़ा तंदरुस्त बच्चा चाहता है। बच्चा भी जब स्कूल जाता है और खुद से लम्बे बच्चों को देखता है तो उसे अच्छा नहीं लगता। लोग उसे लम्बा होने के लिए लटकने को कहते हैं। वह खंभों-पेड़ों की शाखाओं पर वह लम्बा होने के लिए खूब लटकता है। मोदी ने कहा कि लम्बा होने के लिए वैज्ञानिक सोच की जरूरत होती है, जिसमें मां के संतुलित आहार से लेकर बच्चे के भी संतुलित आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बाल विवाह से बढ़ा रहा है कुपोषण
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए आस-पास के माहौल को पूरी तरह बदलना होगा। आपको आश्चर्य होगा कि बाल विवाह के कारण ही कुपोषण बढ़ रहा है। जब कच्ची उम्र में कोई मां बनती है, तो बच्चा भी अस्वस्थ होता है। जब सरकार ने कुरोषण की मूल समस्याओं की पड़ताल की, तो बाल विवाह मुख्य कारणों में उभर कर आया। इसके बाद अच्छा भोजन ही नहीं पानी भी शुद्ध होना चाहिए और आस-पास गंदगी भी नहीं होनी चाहिए।

ये बुराई भी है बाधक
मोदी ने कहा कि कुछ लोगों ने ये फैला रखा है कि बच्चे के पैदा होते ही उसे मां का दूध नहीं पिलाना चाहिए। ये बहुत ही गलत है। बच्चे के पैदा होते ही उसे मां का दूध मिलना चाहिए। जिन बच्चों को पैदा होते ही मां का दूध मिलता है, उनके बड़ा होने समस्याएं काफी कम आती हैं।
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