ताजा संकेत इस ओर इशारा कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री की नोटबंदी योजना एक जटिल अंत की ओर बढ़ रही है, ऐसे में नरेंद्र मोदी भारतीय अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए आजमाए हुए परंपरागत तरीकों पर आगे बढ़ते दिख रहे हैं।
केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह 600 बिलियन रुपये का फंड अतिरिक्त खर्च के रूप में जारी किए हैं। इसे मार्च तक खर्च किया जाएगा। इसमें रूरल जॉब्स प्रोग्राम के फंड में 10 फीसदी की वृद्धि है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी योजना का एक बार मजाक उड़ाया था। नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है।
मुंबई स्थित ईपीडब्ल्यू रिसर्च फाउंडेशन थिंक टैंक के डायरेक्टर डेनिस राजकुमार ने कहा, 'यह जरूरी है कि लोग पैसा खर्च करे क्योंकि नोटबंदी से प्राइवेट इंन्वेस्टमेंट प्रभावित हुआ है।'
उन्होंने कहा कि रोजगार गारंटी योजनाा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वित्त संकट को कम करने में मदद मिलेगी, जिस ओर देश बढ़ रहा है।
अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले देश के मुख्य राज्यों में वित्त संकट को दूर किया जाना नरेंद्र मोदी और बीजेपी के लिए बहुत जरूरी है। खाद्यान्न की कीमतों में गिरावट आई है और इसके गिरने की संभावना लगातार बनी हुई है। 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद 86 प्रतिशत करेंसी मार्केट से हट गई है और इसकी वजह से खाद्यान्न की बिक्री में गिरावट आई है।
ब्लूमबर्ग के सर्वे के मुताबिक नवंबर महीने में कंज्यूमर प्राइस में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 15 महीनों में यह सबसे धीमी रफ्तार है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की महंगाई दर के लक्ष्य 4 प्रतिशत से नीचे है।
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने 7 दिसंबर को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और पूरे साल के विकास दर के अनुमान को कम ही रखा है। निजी अर्थशास्त्रियों ने भी जीडीपी को लेकर अपने अनुमान को कम कर दिया है।
पिछले हफ्ते इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स सोसायटी की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में दो पहिया वाहनों की बिक्री में 5.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। दिसंबर 2015 के बाद यह पहली गिरावट है।