बजट सत्र को सुचारु रूप से चलाने की कवायद के तहत सोमवार को सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों पर उनके अपने-अपने ही मुद्दे हावी रहे। बैठक में भी सियासी दलों ने अपनी राजनीतिक लाइन के तहत ही बातें रखीं। पीएम नरेंद्र मोदी ने सुचारु संसद चलाने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगा, लेकिन विपक्ष ने समय से पहले बजट पेश किए जाने की बात आगे रखी। तृणमूल कांग्रेस ने इस बैठक का बहिष्कार किया।
पीएम मोदी ने कहा कि संसद महापंचायत है। चुनाव के समय में मतभेद होने के बावजूद इसे सुचारु रूप से काम करना चाहिए। मगर राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार को बजट सत्र समय से पहले नहीं बुलाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में ऐसी ही स्थिति के वक्त यूपीए सरकार ने बजट सत्र को टाल दिया था।
दरअसल, संसद के बीते शीत सत्र में नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्षी दलों के विरोध और शोरशराबे के कारण सदन में कोई कामकाज नहीं हो सका था। इसको देखते हुए सरकार ने मंगलवार से शुरू हो रहे बजट सत्र में कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की कवायद में सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। बैठक में तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर सभी दलों ने हिस्सा लिया।