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सियासत : लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला के दो वर्ष पूरे, पीएम मोदी ने की कामकाज की तारीफ

Sat, 19 Jun 2021 04:46 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ओम बिरला ने पहली बार चुने गए सांसद, युवा सांसदों और महिला सांसदों को सदन में बोलने का मौका दिए जाने पर विशेष बल दिया है। उन्होंने विभिन्न समितियों को भी मजबूत किया है जिनकी हमारे लोकतंत्र में भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
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ओम बिरला - फोटो : ANI
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विस्तार
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लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला ने शनिवार को दो वर्ष पूरे कर लिए। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके उनके कामकाज की तारीफ की है। पीएम मोदी ने कहा कि कि बीते दो वर्षों में ओम बिरला ने ऐसे कई कदम उठाए हैं जिन्होंने हमारे संसदीय लोकतंत्र को समृद्ध किया है और उत्पादकता में वृद्धि करने में सहायता की है। इस प्रयास से कई ऐतिहासिक और जन समर्थित कानून पारित हुए हैं। इन कार्यों के लिए ओम बिरला जी को बधाई।

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पीएम मोदी ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि ओम बिरला ने पहली बार चुने गए सांसद, युवा सांसदों और महिला सांसदों को सदन में बोलने का मौका दिए जाने पर विशेष बल दिया है। उन्होंने विभिन्न समितियों को भी मजबूत किया है जिनकी हमारे लोकतंत्र में भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि हाल ही में ओम बिरला ने एक विशेष साक्षात्कार में बताया था कि कोरोना संकट में भी सदन की उत्पादकता 122 फीसद रही।

ओम बिरला ने पीएम मोदी को कहा शुक्रिया
वहीं प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी ट्वीट कर उनका धन्यवाद किया। ओम बिरला ने लिखा कि आपकी शुभकामनाओं के लिए आभार माननीय प्रधानमंत्री जी। सदन के नेता के रूप में आपके और माननीय सदस्यों के सहयोग से ही हम वह सफल प्रयोग कर सके, जिससे सदस्यों की क्षमता, लोकसभा की कार्य-उत्पादकता और लोकतंत्र के मंदिर की प्रतिष्ठा में अभिवृद्धि हुई।
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दो वर्ष संसद के कामकाज की दृष्टि से ऐतिहासिक : ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि दो वर्ष संसद के कामकाज की दृष्टि से ऐतिहासिक भी रहे और परिणामदायक भी रहे। सभी सदस्यों के सक्रिय योगदान से संसद में कार्य उत्पादकता और कार्य निष्पादन की दृष्टि से हमने कोशिश की की सदन में सार्थक चर्चा हो, संवाद हो ताकि जो निर्णय हो, उससे समाज का कल्याण हो।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कुछ सदस्यों ने कुछ समिति के चेयरमैन ने वर्चुअल कमेटी बैठक की मांग की थी, पंरतु लोकसभा के नियम और प्रक्रिया के अंदर संसद की समितियों की बैठक गोपनीय होती है। कार्यवाही लंबी चलती है। ऐसे में सदन को वर्चुअल माध्यम से नहीं चलाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि संसद सदस्यों का तर्क है कि मतभेद की स्थिति में तख्तियां दिखाने और सदन के वेल में नारे लगाने की परंपरा है। मैंने विनम्रता से उनसे कहा कि ऐसी परंपराएं अच्छी नहीं होतीं। मेरी कोशिश रही है कि किसी को वेल में आने की जरूरत न पड़े।

बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में हमारा प्रयास विपक्षी सदस्यों के विचारों का सम्मान करने का होना चाहिए। मेरा प्रयास है कि जिस दल का सदन में एक भी सदस्य हो, उसे पर्याप्त समय दिया जाए। लोकतंत्र में निर्णय व्यापक सहमति के आधार पर लिए जाने चाहिए न कि केवल बहुमत के आधार पर।

लोजपा का मामला दलबदल का नहीं
लोजपा में मची रार को लेकर बिरला ने कहा कि लोजपा का मामला दलबदल का नहीं, बल्कि संसदीय दल के नेता के चुनाव का है। उन्होंने संसदीय दल की बैठक की और बैठक की कार्यवाही लोकसभा सचिवालय को सौंपी, जिसके सत्यापन के बाद, उनके द्वारा चुने गए नेता को मान्यता दी गई।

नए संसद भवन सरकार की पहल नहीं : बिरला
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि दोनों सदनों ने हमारी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार से एक नया संसद भवन बनाने का अनुरोध किया था। नए भवन का प्रस्ताव हमारे द्वारा किया गया था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। यह सरकार की पहल नहीं है... लोकतंत्र की एक विशेषता की आलोचना।

संसदीय समितियां दलीय रेखा से ऊपर उठकर जनहित के मामलों पर चर्चा करती हैं। पिछले सत्र के दौरान संसदीय समितियों द्वारा 2664 सिफारिशें की गईं, जिनमें से 1762 को सरकार ने स्वीकार कर लिया। निश्चित रूप से संसदीय समितियों का महत्व है।

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