प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुसलिम समाज से गुजारिश की है कि तीन तलाक के मसले का राजनीतिकरण नहीं करें। उन्होंने कहा कि तीन तलाक की प्रथा के खराब प्रभावों से मुसलिम महिलाएं सीधा प्रभावित हो रही हैं। लिहाजा इसी समुदाय को खुद आगे आकर इसका समाधआन ढूंढना चाहिए। प्रधानमंत्री ने मुसलिम समुदाय के वादा किया है कि उनकी सरकार इस पुरातन प्रथा को खत्म करेगी।
12वीं सताब्दी के विचारक एवं सामाज सुधारक बासवा की जन्म शताब्दी के मौके पर मोदी ने उम्मीद जताई कि मुसलिम समाज सुधारक भी अपने समुदाय की महिलाओं की परेशाना समझेंगे और इस पुरातक परंपरा के खिलाफ खड़े होंगे। उन्होंने पूरे समुदाय से कहा कि खुले दिमाग से तीन तलाक की खामियों पर गौर कर समाधान की दिशा में आगे बढ़ें ना कि इसे राजनीतिक चश्में से देखें।
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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ महीनों में तीन तलाक के मसले को कई मंच पर उठाया है। इस महीने की शुरुआत में भुवनेश्वर में हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी मोदी ने इस सामाजिक बुराई की खिलाफ पूरी समुदाय को सामने आने को कहा था। उधर कई मुसलिम महिलाओं ने भी तीन तलाक केखिलाफ सुप्रीम कोर्ट समेत कई अदालतों में अपनी बात रखी है। सुप्रीम कोर्ट भी इससे जुड़े कई मामलों की सुनवाई कर रहा है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की नोटिस से जवाब में कहा है कि तीन तलाक का सरोकार मुसलिम धर्म और इबादत से नहीं है। यह एक ऐसी पुरातन प्रथा है जो मुसिलम महिलाओं के सम्मान और आजादी के खिलाफ है। हालांकि अखिल भारतीय मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि अदालत को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए।
बोर्ड के मुताबिक बिना किसी ठोस कारण के तलाक की इजाजत नहीं है। पिछले साल यह मामला गरमाया जब विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता पर लोगों के विचार जानने का काम शुरु किया। इसी क्रम में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामें कहा कि तीन तलाक और एक से अधिक शादी की प्रथा मुस्लिम महिलाओं से भेदभाव वाला है।