प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र और असम सरकार द्वारा उल्फा के साथ किए गए हस्ताक्षरित शांति समझौते की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस समझौते से राज्य की स्थायी प्रगति सुनिश्चित होगी। वहीं, असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का कहना है कि इस समझौते को लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह समझौता अमस की शांति के लिए है। हमें इसका इस्तेमाल वोट के लिए नहीं करना। समझौते के दौरान गृहमंत्री अमित शाह भी सीएम सरमा के साथ मौजूद थे। शाह ने कहा कि यह दिन असम के लोगों के लिए एक सुनहरा दिन है। बता दें, उल्फा एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन है।
असम में स्थाई प्रगति का मार्ग प्रशस्त
पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि असम की शांति और विकास की यात्रा में यह समझौता बेहद अहम है। यह मील का पत्थर है। यह समझौता असम में स्थायी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। मैं ऐतिहासिक उपलब्धि में शामिल लोगों के प्रयासों की सराहना करता हूं। हम सभी के लिए एकता, विकास और समृद्धि का भविष्य सुनिश्चित कर रहे हैं।
हिमंता ने कहा- हम शांतिपूर्ण समझौते की कल्पना करते हैं
वहीं, सीएम सरमा का कहना है कि असम में उल्फा का आंदोलन 1987 में शुरू हुआ था। बाद में यह हिंसक होता चला गया। 10 हजार लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। अब शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं। उससे हम एक नए असम, एक शांतिपूर्ण असम की कल्पना करते हैं। समझौता बहुत ऐतिहासिक है। इस मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह समझौता सिर्फ असम की शांति के लिए है। इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
1979 में हुआ था गठन
अलगाववादी संगठन उल्फा का गठन अप्रैल 1979 में बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से आए बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के खिलाफ आंदोलन के बाद हुआ था। फरवरी 2011 में यह दो समूहों में विभाजित हो गया था और अरबिंद राजखोवा के नेतृत्व वाले गुट ने हिंसा छोड़ दी थी। यह गुट बिना शर्त सरकार के साथ बातचीत के लिए सहमत है। दूसरे उल्फा गुट का नेतृत्व करने वाले परेश बरुआ बातचीत के खिलाफ हैं। वार्ता समर्थक गुट ने असम के मूल निवासियों की भूमि के अधिकार समेत उनकी पहचान और संसाधनों की सुरक्षा के लिए सुधारों की मांग की है।