प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेपाल के जनकपुर में हैं। जनकपुर में प्रधानमंत्री का अभूतपूर्व स्वागत किया गया। यहां राम जानकी मंदिर में सीता माता के दर्शन पूजन के बाद बारहबीघा मैदान में उनका नागरिक अभिनंदन हुआ। प्रधानमंत्री जनसभा को संबोधित करने के बाद जनकपुर से काठमांडू चले जाएंगे। लेकिन पीएम इस यात्रा में एक तीर से दो निशाने साधते नजर आ रहे हैं। पीएम की यह यात्रा कर्नाटक विधानसभा चुनाव को भी कनेक्ट कर रही है और जनकरपुर जाने का निर्णय लेकर वह हिन्दुत्व के मुद्दे पर मुंह न मोड़ने का संदेश भी दे रहे हैं।
10 मई को कर्नाटक विधानसभा चुनाव का प्रचार समाप्त हुआ है। 12 मई को वहां मतदान होना है। 12 मई को प्रधानमंत्री एक मात्र हिन्दू राष्ट्र कहे जाने वाले नेपाल में मुक्तिनाथ धाम की यात्रा पूरी करके लौट आएंगे। यह एक संयोग ही है कि प्रधानमंत्री ने 11 मई को नेपाल की यात्रा के लिए चुना है। नेपाल की यात्रा के लिए उन्होंने पटना से हेलीकाप्टर के जरिए जनकपुर और जनकपुर से काठमांडू जाने का निर्णय लिया। यह पहली बार हो रहा है, जब देश के प्रधानमंत्री जनकपुर जा रहे हैं। दो देशों के बीच में द्विपक्षीय रिश्तों का आधर धर्म, आस्था और संपर्क के विस्तार के जरिए जोड़ने की कोशिश हो रही है।
रामायण सर्किट
प्रधानमंत्री की यात्रा का रूट बड़ी योजना के तहत निर्धारित हुआ है। उत्तर प्रदेश (उ.प्र.) सरकार भी इसमें अहम योगदान दे रही है। अयोध्या से जनकपुर तक के लिए डीलक्स बस सेवा शुरू की जा रही है। इसका मकसद रामायण सर्किट को जोड़ना है। डीलक्स बस को उ.प्र. के मुख्यमंत्री अयोध्या से जनकपुर के लिए रवाना करेंगे। इस तरह से भारत पहली बार नेपाल के साथ सांस्कृति, धार्मिक रिश्ते के साथ-साथ संपर्क मार्ग को भी नया आधार दे रहा है।
प्रधानमंत्री काठमांडू में अपने समकक्ष केपी शर्मा ओली से भी शुक्रवार को ही द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस वार्ता में रक्सौल से काठमांडू तक रेलमार्ग विकसित करने की रूपरेखा पर चर्चा होगी। इसमें दोनों देशों के बीच संयुक्त समिति को गठित करने पर सहमति बनने के पूरे आसार हैं। यह समिति इस साल के आखिर तक इस परियोजना पर अपनी रिपोर्ट देगी, ताकि समय रहते रक्सौल के काठमांडू को रेल नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
रामायण सर्किट, जनकपुर का महत्व
रामायण सर्किट और जनकपुर में प्रधानमंत्री का जाना काफी मायने रखता है। यह दोनों देशों को जहां सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है, वहीं इसके राजनीतिक मायने भी हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव होना है। लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद ही बिहार विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित है। ऐसे में सीता जी की जन्मस्थली जनकपुर को याद करना और बिहार राज्य से सटे जनकपुर से भगवान राम की अलख जगाना पूरे देश में एक खास संदेश देने जैसा है।
राजनीतिक दल भी इसके राजनीतिक मायने निकाल रहे हैं। प्रधानमंत्री यह यात्रा ऐसे समय में कर रहे हैं, जब बिहार में भाजपा के गठबंधन की सरकार है और नेपाल से सटे उ.प्र. तथा उत्तराखंड में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है। कर्नाटक चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और 12 मई को वहां मतदान होना है।