ससे पहले पीएम मोदी ने मंगलवार रात (स्थानीय समयानुसार) मार्सिले पहुंचने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'मार्सिले पहुंचा हूं। भारत के स्वतंत्रता के संघर्ष में यह शहर विशेष महत्व रखता है। यहीं पर महान वीर सावरकर ने भाग निकलने का साहसिक प्रयास किया था।'
शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। दरअसल, पीएम मोदी इस वक्त फ्रांस में हैं। अवनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान पीएम मोदी मार्सिले शहर की यात्रा पर भी गए थे और यहां उन्होंने वीर सावरकर को याद किया था। इस पर संजय राउत ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री वहां जाते हैं और उन्हें (वीर सावरकर) याद करते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है। यह हमारे लिए गर्व की बात है।
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संजय राउत ने कहा, 'वीर सावरकर पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। वीर सावरकर नाव से भागकर तैरकर किनारे पर आए थे और फिर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया। अगर प्रधानमंत्री उस जगह जाते हैं और उन्हें याद करते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है। यह गर्व की बात है। वीर सावरकर निडर थे। उनकी विचारधारा से हमारे मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वे एक बड़े स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी थे।'
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मामले में शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'वीर सावरकर इतिहास में एक महान व्यक्ति, स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका रास्ता भले ही अलग रहा हो, लेकिन उन्होंने इसमें योगदान दिया है। अगर उन्हें वहां श्रद्धांजलि दी जाती है तो मुझे नहीं लगता कि इस पर कोई राजनीति होनी चाहिए। हमारे सभी स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया जाना चाहिए।'
इससे पहले पीएम मोदी ने मंगलवार रात (स्थानीय समयानुसार) मार्सिले पहुंचने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'मार्सिले पहुंचा हूं। भारत के स्वतंत्रता के संघर्ष में यह शहर विशेष महत्व रखता है। यहीं पर महान वीर सावरकर ने भाग निकलने का साहसिक प्रयास किया था।' उन्होंने कहा, 'मैं मार्सिले के लोगों और उस समय के फ्रांसीसी कार्यकर्ताओं को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मांग की थी कि उन्हें ब्रिटिश हिरासत में नहीं सौंपा जाए। वीर सावरकर की बहादुरी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।'
ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर ने आठ जुलाई, 1910 को अग्रेजों की कैद से भागने का प्रयास किया था, जब उन्हें मुकदमे के लिए ब्रिटिश जहाज मोरिया से भारत लाया जा रहा था। ऐसा माना जाता है कि सावरकर ने जहाज के ‘पोर्टहोल’ से फिसलकर बाहर निकलने का प्रयास किया और तैर कर तट तक पहुंचने में कामयाब हो गए थे, लेकिन फ्रांसीसी अधिकारियों ने उन्हें पकड़ लिया और फिर उन्हें ब्रिटिश जहाज अधिकारियों की हिरासत में वापस सौंप दिया। इससे एक बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। सावरकर को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की सेल्युलर जेल में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।