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'बिहार का मखाना पहुंच रहा ग्रीस': मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी, त्योहारी मौसम के लिए की क्या अपील?

Sun, 25 Oct 2026 12:14 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

खास बातें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी से 'मन की बात' कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह मासिक रेडियो कार्यक्रम की 139वीं कड़ी है। पीएम मोदी मे इस कार्यक्रम में कहा कि आज से 12 वर्ष पहले इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है। इस यात्रा के सहयात्री और मार्गदर्शकआप ही हैं।
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पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में साझा किए विचार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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लाइव अपडेट

12:14 PM, 25-Oct-2026

देशवासियों को दी त्योहारों की शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने कहा, ''आने वाले दिनों में दिवाली, छठ महापर्व और कई दूसरे त्योहारों की रौनक रहेगी। आप स्वस्थ और सुरक्षित रहकर पूरे परिवार के साथ त्योहार मनाएं, और, दूसरों को भी अपनी खुशी में शामिल करें। मैं आप सभी को आने वाले त्योहारों की शुभकामनाएं देता हूं। मुझे हमेशा की तरह आपके संदेशों और सुझावों का इंतजार रहेगा। आपके सुझावों से 'मन की बात' को नए विषय मिलते हैं, नई दिशा मिलती है।''

12:13 PM, 25-Oct-2026

पीएम मोदी ने किया भाई परमानंद जी का जिक्र

उन्होंने कहा, ''भारत की माटी में ऐसे कितने ही महान व्यक्तित्व पैदा हुए जिन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व हैं- भाई परमानंद जी। कुछ ही दिनों बाद 4 नवंबर को हम उनकी 150वीं जयंती मनाएंगे। भाई परमानंद जी की प्रेरणा और आदर्श का बड़ा स्त्रोत था आर्य समाज से उनका गहरा जुड़ाव। 20वीं सदी के बिल्कुल शुरुआती कालखंड में ही भाई परमानंद जी आर्य समाज के काम से दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां उनकी मुलाकात पूज्य बापू से भी हुई थी। उन्होंने गुयाना में गिरमिटिया समाज के बीच भी काम किया, जो उस समय आर्य समाज का एक बड़ा केंद्र था। मुझे भी गुयाना की अपनी यात्रा के समय आर्य समाज के स्मारक पर जाने का सौभाग्य मिला था | भाई परमानंद जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि भाई परमानंद जी ने ही लाला हरदयाल जी को अमेरिका जाने के लिए मनाया था। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से भी एक थे । आजादी की लड़ाई में उनका प्रभाव इतना ज्यादा था कि अंग्रेजों ने उन्हें काला पानी की सजा दे दी थी। उनकी एक किताब है 'आपबीती: काले पानी की कारावास कहानी'। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को समझने के लिए ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए। भाई परमानंद जी ने सजा खत्म होने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कदम बढ़ाया। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि उन्होंने वीर भगत सिंह को भी पढ़ाया था। बाद के समय में वे कई वर्षों तक हिन्दू महासभा से भी जुड़े रहे। यानि गांधी जी से लेकर गुयाना तक, गदर से लेकर अंडमान तक उनका व्यक्तित्व बहुत प्रेरणादायक है। मैं भाई परमानंद जी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। युवा साथियों से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में जानें और दूसरों को भी प्रेरित करें।''

12:07 PM, 25-Oct-2026

महर्षि वाल्मीकि की सीखों पर डाला प्रकाश

उन्होंने कहा, ''कल 26 अक्तूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती है। हजारों वर्ष बीत गए, लेकिन महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज भी हमें कुछ नया सिखाती है । महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से हमें जीवन की गहरी सीख दी है। एक ओर वे निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देते हैं, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व समझाते हैं। वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का बहुत सुंदर उदाहरण है। भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया। निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। सबको साथ लेकर चलने का भाव, ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं। इस भावना का प्रतिबिंब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी दिखाई देता है। वहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी बनाए गए हैं। मुझे संतोष है कि अयोध्या में एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि जी के नाम पर ही रखा गया है। ये प्रयास हमारी उसी महान परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, समरसता और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।''

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12:01 PM, 25-Oct-2026

नॉर्थ-ईस्ट में कैसे बढ़ी मोटे अनाज की खेती?

उन्होंने कहा, ''आप सभी को याद होगा कि भारत के आह्वान पर साल 2023 को 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' के रूप में मनाया गया था। इसे पूरी दुनिया में बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। इस पहल के जरिए लोगों ने जाना कि सुपर फूड श्रीअन्न, यानि मिलेट्स, हमारी अपनी संस्कृति से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। नॉर्थ-ईस्ट में भी मिलेट्स की खेती की एक समृद्ध परंपरा रही है। लेकिन समय के साथ लोग इससे दूर हो रहे थे। अब ये स्थिति बदल रही है। मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले में खांडुली नाम का एक गांव है। यहां कई पीढ़ियों से मिलेट्स, स्थानीय खान-पान परंपरा का अहम हिस्सा रहे हैं। लेकिन कुछ समय से, यहां इनकी खेती करने वाले किसानों की संख्या कम हो रही थी, ऐसे में, यहां की दो सहेलियों ने एक नई पहल की। उन्होंने मिलेट्स से नए प्रोडक्ट्स बनाने पर ध्यान दिया। मिलेट्स का वैल्यू एडिशन करते हुए उन्होंने कुकीज, केक और मफिंस के साथ-साथ मिलेट्स से बने बेबी फूड भी तैयार किए | इससे मिलेट्स से बने प्रो़क्ट्स की बिक्री बढ़ी और मिलेट्स की मांग भी बढ़ने लगी | ऐसे में यहां के किसानों ने भी फिर से मिलेट्स की खेती करना शुरु कर दिया है।''

उन्होंने कहा, ''मेघालय के ही पश्चिम गारो हिल्स जिले के सादोलपाड़ा गांव में भी कुछ नए प्रयास हो रहे हैं। यहां के किसान चेकजिंग संगमा ने, मिलेट्स का महत्व समझते हुए आधुनिक तरीकों से इसकी खेती शुरु की है। इससे उनकी आय भी बढ़ी है और गांव में भी एक जागरुकता आई है। इसी तरह नगालैंड के कोहिमा का एक गांव है केजोमा। इस गांव में एक दशक से भी ज्यादा समय से मिलेट्स की खेती बंद थी। इसके चलते यहां एक पूरी पीढ़ी इस पारंपरिक फसल से अनजान रह गई। सोचिए, जिस फसल को उनके दादा-दादी उगाते थे, उसे गांव वाले ही भूलने लगे। साल 2024 में यहां के लोगों ने मिलेट्स की खेती फिर से शुरू की। 2025 में केजोमा ने अपना पहला मिलेट्स फेस्टिलव मनाया।''

11:55 AM, 25-Oct-2026

पीएम मोदी बोले- पटेल जयंती पर रन फॉर यूनिटी से मदबूत होती है एकता

उन्होंने कहा, ''कुछ ही दिनों बाद 31 अक्तूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। इस दिन को देश 'एकता दिवस' के तौर पर मनाता है। इस अवसर पर देशभर में 'एकता दौड़' यानि 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन होता है | 'रन फॉर यूनिटी' हमारी एकता को मजबूत करने का, देश के प्रति अपने संकल्प को दोहराने का, एक बहुत बड़ा मौका है। मेरा आप सभी से आग्रह है कि इस बार भी 'रन फॉर यूनिटी' में बढ़-चढ़कर के हिस्सा लें। अपने परिवार, अपने मित्रों और आस-पास के लोगों को भी अपने साथ जोड़ें।''

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11:53 AM, 25-Oct-2026

फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक्स कहलाने वाले नरिंदर सिंह कपानी का किया जिक्र

उन्होंने कहा, ''आज हमारे युवा इतने असाधारण काम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें सही माहौल और समर्थन मिल रहा है। वरना, हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी कभी नहीं रही। आज से कुछ ही दिनों बाद 31 अक्तूबर को, भारत के एक ऐसे ही महान वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी जी की 100वीं जन्मजयंती है। उन्हें दुनिया 'फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक्स' के रूप में जानती है। उनका जन्म पंजाब के मोगा जिले में हुआ था। प्रकाश को महीन फाइबर के माध्यम से आगे पहुंचाने की तकनीक में उनकी एडवांस रिसर्च ने कम्युनिकेशन की दुनिया को नई दिशा दी। आज इंटरनेट और डिजिटल कम्युनिकेशन के जिस युग में हम जी रहे हैं, उसकी कल्पना भी फाइबर ऑप्टिक्स के बिना बहुत मुश्किल है। आज इस अवसर पर हम नरिंदर सिंह कपानी जी को नमन करते हैं। मैं चाहूंगा, हमारे युवा कपानी जी जैसे वैज्ञानिकों के बारे में पढ़ें, जानें और उनसे प्रेरणा लें।''

11:47 AM, 25-Oct-2026

पीएम मोदी ने अंगदान के लिए लोगों को किया प्रेरित

पीएम मोदी ने कहा, ''इस तरह की एडवांस रिसर्च में ऑर्गन डोनेशन की बहुत बड़ी भूमिका होती है। जो लोग अपना जीवन पूरा करने के बाद आग दान करके जाते हैं, वो कितने ही लोगों का जीवन भी बचाते हैं और रिसर्च को भी संभव बनाते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है - मध्य प्रदेश में नर्मदापुरम की शिवानी जी का। शिवानी जी एक सड़क दुर्घटना की शिकार हो गई थी। परिवार पर मुसीबत टूट पड़ी, लेकिन इस कठिन समय मे भी उनके परिवार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जो हम सभी के लिए प्रेरणा हैं। यह फैसला था- शिवानी जी के अंग दान का। शिवानी जी के परिवार के इस फैसले से समाज और देश के लिए एक बड़ा संदेश गया है। मानवता के ऐसे एक कदम से किसी परिवार मे खुशियां फिर से लौट सकती हैं और साथ ही रिसर्च के कामों मे भी बड़ी मदद मिलती हैं।''

11:38 AM, 25-Oct-2026

आईआईटी मद्रास में ब्रेन सेंटर की क्या खासियत?

पीएम मोदी ने कहा, ''इस महीने की शुरुआत में मैं चेन्नई गया था। मेरी मुलाकात वहां देश के कई वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं से हुई | हमारे युवा आज ऐसे विषयों पर भी काम कर रहे है जो पूरी मानवता का भविष्य बदल सकते हैं। ऐसा ही एक क्षेत्र है ब्रेन रिसर्च। इसी से जुड़े, 'सुधा गोपाल कृष्णन ब्रेन सेंटर' का मैंने आईआईटी मद्रास में लोकार्पण किया था। इस सेंटर ने एक ब्रेन इमेजिंग टेक्नॉलजी प्लेटफॉर्म बनाया है जो दुनिया-भर के लिए मिसाल है।''

उन्होंने आगे कहा, ''इसके जरिए मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3डी तस्वीरें तैयार की जा रही हैं। उनका लक्ष्य है आने वाले दिनों में 100 ह्यूमन ब्रेन की 3डी मैपिंग करके उनका बारीकी से अध्ययन करना।
पूरी दुनिया में ये इस तरह का पहला मिशन है । इस काम में परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस ब्रेन सेंटर के निर्माण में देश की इंडस्ट्री ने सरकार के साथ मिलकर बड़ी भूमिका निभाई है। आईआईटी के कई पूर्व छात्र और शिक्षक भी इस रिसर्च सेंटर के लिए साथ आए है ।''

प्रधानमंत्री ने कहा, ''ये प्रोजेक्ट इतना अहम इसलिए है, क्योंकि विज्ञान की इतनी प्रगति के बावजूद भी मानव मस्तिष्क आज भी एक बड़ी वैज्ञानिक पहेली है। आज भी अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियां हैं, जिनका कोई ठोस इलाज नहीं है। इसलिए विज्ञान ह्यूमन ब्रेन की फंक्शनिंग को जितना गहराई से समझेगा, उतने ही नए स्कोप आने वाले समय में बनेंगे। ये भी तय हुआ है कि 100 ह्यूमन ब्रेन का ये डेटा आगे अलग-अलग क्षेत्र में शोध के लिए ओपन सोर्स के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा।''

11:30 AM, 25-Oct-2026

पीएम बोले- तकनीक के सहारे आसान हो रही लोगों की जिंदगी

प्रधानमंत्री ने कहा, ''हमारे देश के लोगों की एक बड़ी विशेषता है। हम नई तकनीक को बहुत जल्दी अपना लेते हैं। हम सहज रूप से तकनीक को अपनी दैनिक जिंदगी का हिस्सा भी बना लेते हैं। 'ई-संजीवनी योजना' इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण है। इससे पता चलता है कि लोगों के जीवन को आसान बनाने में तकनीक का कैसे बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। मुझे ये देखकर बहुत संतोष होता है कि इसके जरिए अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा बहुत बड़ा है। तकनीक की ताकत, हमारे डॉक्टरों के सेवाभाव, और देशवासियों के विश्वास का यह बेहतरीन उदाहरण है।''

उन्होंने कहा, ''आज ई-संजीवनी सेवा अपने विशाल नेटवर्क के जरिए देश के दूरदराज के इलाकों में भी पहुंच चुकी है। इसका लाभ उठाने वाले लोगों की कहानियां आपको भावुक कर देंगी। अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के ओहो-ताहाने को तेज बुखार था। सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। ऐसे में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी ने ई-संजीवनी के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया। उस बच्चे को निमोनिया था और जैसे ही वो डॉक्टर की निगरानी में आया, उसकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा।''

उन्होंने कहा, ''एक समय था डॉक्टर को दिखाने में छोटी-सी स्वास्थ्य जांच में भी लोगों को काफी समय लग जाता था, बहुत कठिनाइयां आती थी। आज देशभर में लगभग 1 लाख 90 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों के जीवन में नई-नई सुविधाएं लेकर आए हैं। ये आरोग्य मंदिर एक प्रकार से, पंचायतों के वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित हो रहे हैं। सबसे सुखद बात यह है कि अब गांवों के लोग भी नियमित जांच करवा रहे हैं, ताकि वे स्वस्थ रहें। और इसमें ई-संजीवनी बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है।''

11:26 AM, 25-Oct-2026

पीएम मोदी ने की वोकल फॉर लोकल की अपील

प्रधानमंत्री ने कहा, ''त्योहारों पर हम अपने परिवार और प्रियजनों के लिए बहुत कुछ खरीदते हैं। इस बार भी खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता दीजिए । आपकी खरीदारी से उनका उत्साह बढ़ेगा | आपका ये अपनापन 'वोकस फॉर लोकल' अभियान को और आगे ले जाएगा, और, जितना 'वोकल फॉर लोकल' अभियान आगे बढ़ेगा, उतनी ही तेजी से आत्मनिर्भर भारत का सपना भी पूरा होगा और इसलिए मेरा व्यक्तिगत रुप से आपसे आग्रह है कि आप स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता दीजिए, प्रमुखता दीजिए |''

11:25 AM, 25-Oct-2026

खादी की बिक्री में बढ़त का

प्रधानमंत्री ने कहा, ''जब स्थानीय उत्पादों की बात होती है तो खादी की चर्चा स्वाभाविक है । इस बार गांधी जयंती पर सिर्फ एक दिन में खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों इसकी बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक की रही | ये पिछले साल से भी डेढ़ करोड़ रुपये और ज्यादा ही है, यानी खादी की लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है और इसका लाभ उन लोगों तक भी पहुंच रहा है, जिनके हुनर और मेहनत से खादी हैंडीक्राफ्ट जैसी अनेक चीजें तैयार होती हैं।''

11:24 AM, 25-Oct-2026

पैकेजिंग में आदिवासी कला की छाप

प्रधानमंत्री ने कहा, ''महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों ने अपने बनाए उत्पादों की पैकेजिंग पर बहुत ध्यान दिया है । यहां 'शबरी नेचुरल्स' के जरिए शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की छाप है । आपको जानकर खुशी होगी कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित 'गुड डिजाइन अवार्ड' मिला है। हमारे युवा भी इस क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं | कर्नाटक का 'बैंबू' स्टार्टअप। बांस और खेती से निकलने वाले अवशेषों से पैकेजिंग मैटेरियल बना रहा है।''

11:21 AM, 25-Oct-2026

भारतीय किसानों के लिए खुल रहे नए बाजार

पीएम मोदी ने कहा, ''त्योहारों के इस मौसम में आप सभी ने अपने आस-पास एक बदलाव जरूर महसूस किया होगा | अब लोग खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को बहुत महत्व देने लगे हैं | 'वोकल फॉर लोकल' की ये भावना अब हमारे उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा रही है। बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है। कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल अब मालदीव जा रही है, यानि, भारत के किसानों के लिए दुनिया में नए बाजार खुल रहे हैं।''

11:18 AM, 25-Oct-2026

टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को स्थानीय लोगों ने दिया नया जीवन

उन्होंने आगे कहा, ''हमारे यहां प्रकृति के प्रति सम्मान की बहुत पुरानी परंपरा रही है। हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया है कि अपने आस-पास स्वच्छता रखना, जल-स्रोतों की देखभाल करना ये हमारी अपनी जिम्मेदारी है। मुझे खुशी होती है, जब मैं देखता हूं कि देश के कितने ही लोग इसी भावना को अपना जीवन बनाए हुए हैं। यही भाव उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में भी देखने को मिलता है। यहां लोगों ने मिलकर एक नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया है। ये नदी है 'हेवल'।''

उन्होंने कहा, ''कुछ समय पहले हेवल नदी में पानी कम होने लगा था | आस-पास के प्राकृतिक जल-स्रोत भी सूख रहे थे। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और गांव के लोगों ने मिलकर हेवल नदी को बचाने का अभियान चलाया। इस दौरान बारिश का पानी रोकने के उपाय हुए, जमीन में पानी पहुंचाने के लिए काम हुआ और बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए | आज इस प्रयास से हेवल नदी को नया जीवनदान मिला है और साथ ही दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली है।''

11:14 AM, 25-Oct-2026

खेती विरासत मिशन का किया जिक्र

पीएम मोदी ने कहा, ''हमारे देश में ऐसे अनेक पारंपरिक हुनर हैं, जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं, और सुखद ये है कि अब इन परंपराओं से जुड़कर अनेक नए प्रयोग भी हो रहे हैं, इन्हें आज के समय के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। पंजाब में ऐसा ही एक प्रयास काफी समय से चल रहा है, यहां 'खेती विरासत मिशन' नाम की एक संस्था ने आर्गेनिक फार्मिंग और पारंपरिक कृषि के तौर-तरीकों को नया जीवन देना शुरू किया। इस टीम के लोग पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहते थे। इस पहल को नाम दिया गया 'नव-त्रिन्जन'।''

उन्होंने कहा, ''इस पहल के तहत यहां बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है । यहां प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है इससे तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अलग से केमिकल इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती । आप कल्पना कर सकते हैं, इससे पर्यावरण की कितनी बड़ी मदद हो रही है। साथियो, कुछ साल पहले 'नव-त्रिन्जन' ने एक वीविंग स्कूल भी शुरू किया | इसका लक्ष्य है बुनकरी के हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना | इस स्कूल ने भी बहुत सारी महिलाओं की लोगों की जिंदगी बदल दी है।''

11:12 AM, 25-Oct-2026

'बिहार का मखाना पहुंच रहा ग्रीस': मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी, त्योहारी मौसम के लिए की क्या अपील?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी से 'मन की बात' कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह मासिक रेडियो कार्यक्रम की 139वीं कड़ी है। पीएम मोदी मे इस कार्यक्रम में कहा कि आज से 12 वर्ष पहले इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है। इस यात्रा के सहयात्री और मार्गदर्शकआप ही हैं।

पीएम मोदी ने कहा, ''मेरे लिए मन की बात देश के लोगों के लोगों के परिश्रम, पराक्रम, प्रतिबद्धता, समर्पण और सेवा भाव का गौरवगान करने का शुभ अवसर रहा है। मेरे लिए मन की बात तीर्थ यात्रा की तरह है। 12 वर्षों में देश के हर कोने से ऐसे अनेक लोग सामने आए हैं जिनकी असाधारण कार्यों की ओर सामान्य रूप से समाज का ध्यान नहीं जाता । 'मन की बात' ने ऐसी अनगिनत प्रेरक कहानियों को आप सब के सामने लाने का काम किया है।''

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