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पीएम ने अंडमान निकोबार केबल संचार सुविधा का उद्घाटन किया, बंदरगाह नेटवर्क मजबूत बनाने पर जोर

Mon, 10 Aug 2020 10:44 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए समुद्र के नीचे बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबल सुविधा का उद्घाटन किया। इस केबल के लगने के बाद यहां हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी होगी, जिससे व्यापार और पयर्टन को बढ़ावा मिलेगा।  

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प्रधानमंत्री ने यहां लोगों को संबोधित करते हुए कहा, चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर, पोर्ट ब्लेयर से लिटिल अंडमान और पोर्ट ब्लेयर से स्वराज द्वीप तक, अंडमान निकोबार के एक बड़े हिस्से में ये सेवा आज से शुरु हो चुकी है। मैं अंडमान-निकोबार के लोगों को अनंत अवसरों से भरी इस कनेक्टिविटी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।


उन्होंने कहा कि इस फाइबर केबल कनेक्टिविटी से यहां आने वाले लोगों को काफी सुविधा मिलेगी और यहां के लोगों को पर्यटन से रोजगार हासिल होगा। बेहतर नेट कनेक्टिविटी आज किसी भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन की सबसे पहली प्राथमिकता हो गई है। जल्द ही अंडमान पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। 
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पढ़ें उनके संबोधन की मुख्य बातें... 

  • भारत की आजादी की तपोस्थली, संकल्पस्थली, अंडमान-निकोबार की भूमि और वहां रहने वाले सभी लोगों को मेरा नमस्कार! आज का दिन अंडमान-निकोबार के दर्जनों द्वीपों में बसे लाखों साथियों के लिए तो अहम है ही, पूरे देश के लिए भी महत्वपूर्ण है।
  • नेता जी सुभाषचंद्र बोस को नमन करते हुए, करीब डेढ़ वर्ष पहले मुझे सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल कनेक्टिविटी परियोजना के शुभारंभ का अवसर मिला था। मुझे खुशी है कि अब इसका काम पूरा हुआ है और आज इसके लोकार्पण का भी सौभाग्य मुझे मिला है।
  • चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर, पोर्ट ब्लेयर से लिटिल अंडमान और पोर्ट ब्लेयर से स्वराज द्वीप तक, अंडमान निकोबार के एक बड़े हिस्से में ये सेवा आज से शुरु हो चुकी है। मैं अंडमान-निकोबार के लोगों को अनंत अवसरों से भरी इस कनेक्टिविटी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
  • समंदर के भीतर करीब 2300 किलोमीटर तक केबल बिछाने का ये काम समय से पहले पूरा करना, अपने आप में बहुत प्रशंसनीय है। गहरे समंदर में सर्वे करना, केबल की गुणवत्ता बरकरार रखना, विशेष जहाजों के जरिए केबल को बिछाना इतना आसान भी नहीं है।
  • जितना बड़ा ये प्रोजेक्ट था, उतनी ही विराट चुनौतियां थीं। ये भी एक वजह थी कि बरसों से इस सुविधा की जरूरत महसूस होते हुए भी इस पर काम नहीं हो पाया था। लेकिन मुझे खुशी है कि सारी रुकावटों को किनारे करके, इस काम को पूरा किया गया।
  • देश के इतिहास, वर्तमान और भविष्य के लिए इतने महत्वपूर्ण स्थान को, वहां के परिश्रमी नागरिकों को आधुनिक टेलीकॉम कनेक्टिविटी देना देश का दायित्व था। एक बेहद समर्पित टीम के द्वारा, टीम भावना से आज एक पुराना सपना साकार हुआ है। 
  • हमारा समर्पण रहा है कि देश के हर नागरिक, हर क्षेत्र की दिल्ली से और दिल से, दोनों दूरियों को पाटा जाए। हमारा समर्पण रहा है कि, देश के हर जन, हर क्षेत्र तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचे, उनका जीवन आसान बने। 
  • अंडमान निकोबार को बाकी देश और दुनिया से जोड़ने वाला ये ऑप्टिकल फाइबर प्रोजेक्ट, इज ऑफ लिविंग के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
  • ऑनलाइन पढ़ाई हो, टूरिज्म से कमाई हो, बैंकिंग हो, शॉपिंग हो या टेली-मेडिसिन दवाई हो, अब अंडमान निकोबार के हजारों परिवारों को भी ये ऑनलाइन मिल पाएंगी।
  • आज अंडमान को जो सुविधा मिली है, उसका बहुत बड़ा लाभ वहां जाने वाले पर्यटकों को भी मिलेगा। बेहतर नेट कनेक्टिविटी आज किसी भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन की सबसे पहली प्राथमिकता हो गई है।
  • हिंद महासागर हजारों वर्षों से भारत के व्यापारिक और सामरिक सामर्थ्य का सेंटर रहा है। अब जब भारत भारत-प्रशांत में व्यापार-कारोबार और सहयोग की नई नीति और रीति पर चल रहा है, तब अंडमान-निकोबार सहित हमारे तमाम द्वीपों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। 
  • पूरब की ओर देखो नीति के तहत पूर्वी एशियाई देशों और समंदर से जुड़े दूसरे देशों के साथ भारत के मजबूत होते रिश्तों में अंडमान निकोबार की भूमिका बहुत अधिक है और ये निरंतर बढ़ने वाली है।
  • नए भारत में, अंडमान निकोबार द्वीप समूह की इसी भूमिका को मजबूत करने के लिए, 3 साल पहले द्वीप विकास एजेंसी का गठन किया गया था। आज आप देख रहे हैं, कि अंडमान निकोबार में जो प्रोजेक्ट बरसों-बरस पूरे नहीं होते थे, वो अब तेजी से पूरे हो रहे हैं। 
  • अंडमान और निकोबार के 12 आइलैंड्स में हाई इंपैक्ट प्रोजेक्ट का विस्तार किया जा रहा है। मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी की एक बहुत बड़ी समस्या का समाधान तो आज हो चुका है। इसके अलावा रोड, एयर और वॉटर के जरिए फिजिकल कनेक्टिविटी को भी सशक्त किया जा रहा है।
  • नॉर्थ और मिडिल अंडमान की रोड कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 2 बड़े ब्रिज और एनएच-4 के चौड़ीकरण पर तेजी से काम हो रहा है। पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट में एक साथ 1200 यात्रियों को हैंडल करने की क्षमता आने वाले कुछ महीनों में बनकर तैयार हो जाएगी। 
  • द्वीप के बीच और बाकी देश से वॉटर कनेक्टिविटी की सुविधा को बढ़ाने के लिए कोची शिपयार्ड में जो 4 जहाज बनाए जा रहे हैं, उनकी डिलिवरी भी आने वाले कुछ महीनों में हो जाएगी। 
  • आज जब भारत आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में, वैश्विक आपूर्ति और मूल्य श्रृंखला के एक अहम खिलाड़ी के रूप में खुद को स्थापित करने में जुटा है, तब हमारे जलमार्ग और हमारे बंदरगाह के नेटवर्क को सशक्त करना बहुत जरूरी है। 
  • पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में जो कानूनी अड़चनें थे, उन्हें भी निरंतर दूर किया जा रहा है। सरकार का ध्यान, समंदर में ईज ऑफ बिजनेस को बढ़ावा देना और समुद्री रसद को सरल बनाना भी है।
  • इसी तरह, ईस्ट कोस्ट में आंतरिक बंदरगाह के निर्माण का काम भी खत्म होने जा रहा है। अब ग्रेट निकोबार में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की संभावित लागत से ट्रांस शिपमेंट पोर्ट के निर्माण का प्रस्ताव है। 
  • एक बार जब ये पोर्ट बनकर तैयार हो जाएगा तो यहां बड़े-बड़े जहाज भी रुक पाएंगे। इससे समुद्री व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी, हमारे युवाओं को नए मौके मिलेंगे। 
  • आज जितना भी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर अंडमान निकोबार में तैयार हो रहा है, वो ब्लू इकॉनॉमी भी गति देगा। ब्लू इकॉनॉमी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मत्स्य पालन, एक्वाकल्चर और समुद्री खरपतवार की खेती है। 
  • मुझे उम्मीद है, हमारे आज के प्रयास, इस दशक में अंडमान-निकोबार को, वहां के लोगों को, न सिर्फ नई सहूलियत देंगे बल्कि वर्ल्ड टूरिस्ट मैप में भी प्रमुख स्थान के तौर पर स्थापित करेंगे। 
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