प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्पादक व्यय को अपनी सरकार की पहचान बताते हुए रविवार को कहा कि हाल ही में पेश केंद्रीय बजट में जानबूझकर अल्पकालिक लोकलुभावन उपायों से बचते हुए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय के जरिये बुनियादी ढांचे में निवेश किया गया है ताकि रोजगार सृजन और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि को गति दी जा सके। विस्तार से पढ़ें पीएम मोदी का पूरा साक्षात्कार...
प्रश्न: सरकार ने हाल ही में संसद में बजट 2026-27 पेश किया। इस साल भी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर जारी है। इस बजट में आपकी सरकार के कुछ प्रमुख रणनीतिक फैसले क्या हैं?
पीएम मोदी ने कहा, लंबे समय तक उच्च गुणवत्ता वाला इंफ्रास्ट्रक्चर उपेक्षित रहा है जिसका असर आम लोगों और व्यवसायों दोनों पर पड़ा। टूटा-फूटा और पुराना ढांचा “विकसित भारत” के लक्ष्य के साथ मेल नहीं खाता। इसलिए हमने स्पीड, स्केल और भविष्य-दृष्टि के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर को एक मिशन की तरह आगे बढ़ाया।
पिछले दशक में भारत ने शायद अपने इतिहास की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर-बिल्डिंग ड्राइव देखी है और इसमें “गुणवत्ता” पर जोर भी अभूतपूर्व रहा। सबसे अहम बात यह कि हमने इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल आज के लिए नहीं, भविष्य के लिए तैयार किया।
आज जब भारत हजारों विमानों का ऑर्डर दे रहा है, एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी हुई है। जब शहरीकरण बढ़ रहा है, मेट्रो वाले शहर चार गुना से ज्यादा हुए हैं। जब ग्रामीण आकांक्षाएं बढ़ रही हैं, ग्रामीण सड़कें और इंटरनेट कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ रही है। और जब 38 देशों के साथ बड़े व्यापार समझौते हो चुके हैं और व्यापार बढ़ने की संभावना है तो फ्रेट कॉरिडोर, पोर्ट्स और कोस्टल कनेक्टिविटी का विस्तार भी उसी रणनीति का हिस्सा है। आर्थिक सर्वेक्षण ने बताया है कि कैपिटल एक्यूम्यूलेशन, लेबर फॉर्मलाइजेशन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मिलकर भारत की संभावित विकास दर को 7% तक ले गए हैं। यही बजट की सोच का आधार है।
2026-27 के लिए कुल कैपेक्स लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये है-जो 2013 के मुकाबले करीब पाँच गुना है। यह एक स्पष्ट नीति विकल्प है: अल्पकालिक लोकलुभावन कदमों के बजाय ऐसे एसेट्स में निवेश, जो उत्पादकता, रोजगार और भविष्य की आर्थिक क्षमता बढ़ाएँ।
रेलवे के लिए लगभग 3 लाख करोड़ का पूंजीगत प्रावधान है हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, फ्रेट क्षमता और सेफ्टी पर फोकस के साथ। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें “साउथ हाई-स्पीड डायमंड कॉरिडोर” भी है जो कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी को लाभ देगा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार यात्रियों के रूट्स को डीकंजेस्ट करेगा और लॉजिस्टिक्स लागत घटाएगा। राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए आवंटन एक दशक में लगभग 500% बढ़ा है।
इस बजट का एक अहम पहलू “ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस” है कागजी कार्रवाई कम करना, अपराधों को डी-क्रिमिनलाइज करना, कंप्लायंस घटाना। क्योंकि हमारी सोच में राज्य “रोकने वाला” नहीं, “सक्षम बनाने वाला” है और नागरिकों पर भरोसा हमारी नीति का आधार है।
प्रश्न: यह बजट किसी सामान्य “बही-खाता” दस्तावेज़ जैसा नहीं लगता, बल्कि भारत के भविष्य का विज़न स्टेटमेंट लगता है। खासकर अभी क्यों? क्या यह “अब या कभी नहीं” जैसी स्थिति थी?
पीएम मोदी ने कहा, मैं आदरपूर्वक कहूंगा कि हमारे बजट कभी “साधारण बही-खाता” सोच के साथ बने ही नहीं। यह हमारी कार्यशैली नहीं है। मुझे जनता का आशीर्वाद लंबे समय से मिला है और मैंने 25 वर्षों तक शासन का नेतृत्व किया है पहले राज्य में और अब केंद्र में। अगर इन वर्षों को ध्यान से देखें तो साफ दिखता है कि हमारा काम छोटे-छोटे टुकड़ों में नहीं चलता। इसके पीछे एक व्यापक रणनीति, कार्ययोजना और निरंतर अमल की प्रक्रिया रहती है कि “Whole of Nation” सोच के साथ।
2014 के बाद बजट केवल आंकड़ों की किताब नहीं रहा। हर बजट में इरादा, रोडमैप, टाइमलाइन और कदमों की कड़ी रही और फिर हम उसके इम्प्लीमेंटेशन पर काम करते हैं, अगले बजट में उसे अगले स्तर पर ले जाते हैं। इन वर्षों में हमने पहले की सरकारों से रह गई संरचनात्मक कमियों को भरा, बड़े सुधार किए, गरीबों के लिए अवसर बढ़ाए, युवाओं को सशक्त किया, महिलाओं की भूमिका मज़बूत की और किसानों की गरिमा व सुरक्षा को प्राथमिकता दी। साथ ही, टेक-ड्रिवन लेकिन इंसान-केंद्रित कल्याण व्यवस्था बनाई जो आखिरी व्यक्ति तक पहुँचे।
यह बजट इसी यात्रा का अगला स्तर है ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को नई गति देने के लिए, और तेजी से बदलती दुनिया में युवाओं को अवसरों के लिए तैयार करने के लिए। मैंने कुछ साल पहले लाल किले से कहा था कि “यही समय है, सही समय है।” आज यह भावना केवल सरकार की नहीं रही, यह राष्ट्र का सामूहिक संकल्प बन चुकी है।
यह मजबूरी का “अब या कभी नहीं” पल नहीं है। यह तैयारी और प्रेरणा से पैदा हुआ “हम तैयार हैं” का पल है। इसलिए इसे केवल बजट 2026 नहीं समझना चाहिए यह 21वीं सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है। जैसे 1920 के दशक के फैसलों ने 1947 की नींव रखी, वैसे ही आज के फैसले 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।
प्रश्न: बजट से लगता है सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग पर दांव और बढ़ा दिया है इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिफेंस, कंटेनर, बायोफार्मा, टेक्सटाइल। पहले के प्रयासों से क्या नतीजे आए? और मैन्युफैक्चरिंग रोजगार व विकास का सबसे बड़ा इंजन क्यों बन सकता है?
पीएम मोदी ने कहा, औद्योगीकरण और शहरीकरण के साथ बड़ी संख्या में युवा गांवों और कस्बों से शहरों की ओर बढ़ते हैं—वैश्विक उद्योगों में काम करने की आकांक्षा के साथ। उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में क्रांति जरूरी है। यह काम बहुत पहले होना चाहिए था, लेकिन पहले की सरकारों में इस दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं हुए। हमने अपना दृष्टिकोण बदला।
विकसित भारत की कल्पना में मैन्युफैक्चरिंग हमेशा केंद्र में रहा है। कोई भी देश केवल उपभोक्ता बनकर तेज़ी से नहीं बढ़ सकता। उसे उच्च गुणवत्ता वाले, वैश्विक प्रतिस्पर्धी उत्पादों का निर्माता बनना पड़ेगा। इसी सोच से ‘Make in India’ शुरू हुआ और आगे चलकर PLI जैसी पहलें आईं जो हमारे औद्योगिक आधार को मजबूत कर रही हैं, हमें ग्लोबल वैल्यू चेन में जोड़ रही हैं, और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर रही हैं।
नतीजे साफ दिखते हैं। भारत के गुड्स एक्सपोर्ट ने कई बार पुराने रिकॉर्ड तोड़े हैं। एक दशक पहले जो देश लगभग सारे मोबाइल फोन आयात करता था, आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है और एक्सपोर्ट उत्पादन का बड़ा हिस्सा बन चुका है।
प्रश्न: आईटी सेक्टर और डेटा सेंटर को कुछ टैक्स इंसेंटिव मिले हैं। इससे भारत का टेक पावरहाउस और AI लीडर बनने का लक्ष्य कैसे आगे बढ़ेगा?
पीएम मोदी ने कहा, दुनिया में तकनीक का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब केवल डिजिटल अपनाना काफी नहींडिजिटल नेतृत्व जरूरी है। जैसे UPI के जरिए हमने डिजिटल पेमेंट में नेतृत्व दिखाया, वैसे ही अगली लहर डेटा और AI की है। इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में हम उपनिवेशवाद के कारण पीछे रह गए। पिछली मैन्युफैक्चरिंग रिवोल्यूशन में उपेक्षा के कारण। लेकिन इस डेटा-ड्रिवन टेक रिवोल्यूशन में हमें लीड करना है। भारत 140 करोड़ की आबादी के साथ दुनिया के सबसे बड़े डेटा जनरेटर और उपभोक्ताओं में है। इतना बड़ा और विविध डेटा पूल तभी शक्ति बनता है जब उसे सुरक्षित और उत्पादक तरीके से उपयोग किया जाए। इसलिए सुरक्षा, स्किल्स, सॉफ्टवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर सब पर समान ध्यान है।