मुंबई के किनारे अरब सागर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को छत्रपति शिवाजी महाराज के भव्य स्मारक की आधारशिला रखेंगे। यह लंदन के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की तर्ज पर विश्व का सबसे बड़ा स्मारक होगा। हालांकि बीच समुद्र में चट्टान पर शिवाजी का स्मारक बनाने के निर्णय से मछुआरों को आपत्ति है। लेकिन, सरकार ने उनके विरोध को नजरंदाज करते हुए स्मारक के भूमिपूजन की तैयारी पूरी कर ली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई आगमन से पहले शुक्रवार को अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृति समिति के अध्यक्ष दामोदर तांडेल को हिरासत में ले लिया गया। तांडेल शिवाजी स्मारक का पुरजोर विरोध कर रहे थे। तांडेल ने घोषणा की थी कि मोदी के आगमन से पहले मछुआरिनें हाथों में काला झंडा लेकर नरीमन प्वाइंट से गिरगांव चौपाटी तक एक मानव श्रृंखला बनाकर विरोध करेंगी। उनका कहना है कि समुद्र में चट्टान पर स्मारक बनाए जाने से 80 हजार मछुआरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।
अगर, स्मारक बना तो आसपास की मछलियां खत्म हो जाएंगी और मछुआरों पर भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। तांडेल का दावा है कि दक्षिण दिल्ली के हजारों मछुआरों की आजीविका इस तट पर निर्भर है। जिनकी 1500 बड़ी नौकाएं और 450 छोटी नौकाएं मछली पकड़ने के लिए चलती हैं। स्मारक के निर्माण से सीधे तौर पर उनकी आजीविका प्रभावित होगी। इसलिए मोदी के आगमन से पहले मछुआरिनें विरोध प्रदर्शन करेंगी।