पीएम मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि ब्राजील के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने पर लूला डा सिल्वा को हार्दिक बधाई। मैं उनके तीसरे कार्यकाल के सफल होने की कामना करता हूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ब्राजील के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने पर वामपंथी नेता लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को बधाई दी। पीएम ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए वह उनके साथ मिलकर काम करने को तत्पर हैं।
मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि ब्राजील के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने पर लूला डा सिल्वा को हार्दिक बधाई। मैं उनके तीसरे कार्यकाल के सफल होने की कामना करता हूं और भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए उनके साथ काम करने के लिए तत्पर हूं। डा सिल्वा ने एक जनवरी को ब्राजील के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। लूला डा सिल्वा ने अक्तूबर में जेयर बोल्सनारो को हराकर जीत हासिल की थी।
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मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि
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मन्नथु पद्मनाभन
- फोटो : सोशल मीडिया
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) के संस्थापक और समाज सुधारक मन्नथु पद्मनाभन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। पीएम ने कहा कि सामाजिक सुधार में उनका योगदान और उनकी सेवा तमाम लोगों को प्रेरित करती है। ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनका उल्लेखनीय योगदान है।
आधुनिक भारतीय इतिहास पर शोध के दायरे को व्यापक बनाने की आवश्यकत : मोदी
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PM Modi
- फोटो : Twitter@bjp4 india
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधुनिक भारतीय इतिहास पर शोध के दायरे को व्यापक बनाने की आवश्यकता बताई ताकि भारत के अतीत के बारे में लोगों में बेहतर जागरूकता पैदा की जा सके। साथ ही उन्होंने देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इसकी विषय सामग्री के बारे में प्रतियोगिता कराकर प्रधानमंत्री संग्रहालय को युवाओं में लोकप्रिय बनाने पर जोर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि पीएम मोदी ने सोमवार को 7 लोक कल्याण मार्ग पर नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय (एनएमएमएल) सोसायटी के अध्यक्ष के रूप में इसकी वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता की। एनएमएमएल की स्थापना देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की स्मृति में की गई थी और यह संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है। उन्होंने व्यक्तियों, संस्थानों और विषयों के संदर्भ में आधुनिक भारतीय इतिहास पर शोध के दायरे को व्यापक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे भारत के अतीत के बारे में लोगों में बेहतर जागरूकता पैदा की जा सके। उन्होंने वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढि़यों के लाभ के लिए अपनी अच्छी तरह से लेखापरीक्षित और शोधित स्मृति दर्ज करने के लिए देश में संस्थानों की जरूरत पर बल दिया।