प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रारंभ स्टार्टअप इंडिया इंटरनेशनल समिट को संबोधित करते हुए युवाओं को नौकरी की जगह स्टार्टअप शुरू करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पहले अगर कोई युवा स्टार्टअप शुरू करता था तो लोग कहते कि तुम नौकरी क्यों नहीं करते। स्टार्टअप क्यों? लेकिन अब लोग कहते हैं कि नौकरी ठीक है परन्तु स्टार्टअप क्यों नहीं शुरू करते। उन्होंने कहा कि ये बदलाव बिम्सटेक देशों की बहुत बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया मूवमेंट अपने सफल 5 साल पूरे कर रहा है। आज ही भारत ने कोरोना के खिलाफ ऐतिहासिक सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू की है। ये दिन हमारे वैज्ञानिकों, युवाओं और हमारे उद्यमियों की क्षमताओं और हमारे डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों के परिश्रम और सेवाभाव का साक्षी है।
पीएम ने कहा कि ये समय की मांग है कि भविष्य की टेक्नोलॉजी एशिया की लैब से निकले। भविष्य के एंटरप्रिन्योर्स हमारे यहां तैयार हों। इसके लिए एशिया के उन देशों को आगे आकर ज़िम्मेदारी लेनी होगी जो एक दूसरे के साथ मिलकर काम कर सकते हैं, एक दूसरे के लिए काम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। देश में 41,000 से अधिक स्टार्टअप हैं जिनमें आईटी क्षेत्र में लगभग 5,700 स्टार्टअप, स्वास्थ्य क्षेत्र में 3,600 और कृषि में 1,700 स्टार्टअप काम में लगे हुए हैं। ये स्टार्टअप व्यवसाय के जनसांख्यिकीय चित्र को बदल रहे हैं।
पीएम ने कहा कि आज हमारा देश कहता है कि 'हम यह करेंगे'। डिजिटल भुगतान, एआई क्रांति या सौर ऊर्जा क्षेत्र हो हम आज परिणाम देख सकते हैं। पीएम ने कहा कि हम देश में नए स्टार्टअप को विकसित करने में मदद करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड लॉन्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम एक स्टार्टअप प्रणाली बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए मंत्र पर आधारित है।