पीएम मोदी ने कहा कि यदि गरीबों की पहुंच बैंकों तक ना हो तो बैंकों को उनके पास पहुंचना चाहिए। ऐसी ही योजना जन धन। यदि गरीबों की पहुंच बीमे तक ना हो तो उन्हें यह मिलना चाहिए और वह है जन सुरक्षा योजना। यदि गरीबों की पहुंच स्वास्थ्य सेवाओं तक ना हो तो स्वास्थ्य सेवाओं को गरीबों तक पहुंचना चाहिए और वह है आयुष्मान भारत योजना। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि कमजोरी का उपाय उसे लटकाए रखना नहीं है बल्कि उसके समाधान के रास्ते तैयार करना है। जब हम बाधाओं की सोच कर चलते हैं तो हम उसमें दब जाते हैं, जब हम अवसरों की सोच कर चलते हैं तो आगे बढ़ते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी को ही लीजिए। भारत ने क्या किया? समस्या देखकर वह हताश नहीं हुआ। भारत ने समाधान के रास्ते तलाशे। पीपीई किट के उत्पादन से लेकर विश्व की फार्मेसी बनने तक हमारा देश मजबूत होता गया। भारत कोविड-19 का टीका विकसित करने में अग्रिम मोर्चे पर रहा और कुछ दिनों पूर्व ही देश में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान आरंभ किया। अब हम अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल दूसरे देशों की मदद करने में भी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक ऐसी समस्या है जिसका सामना पूरी दुनिया कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने ना सिर्फ समस्या को उठाया बल्कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के रूप में समाधान भी पेश किया। उन्होंने कहा, हम नवीकरणीय संसाधनों के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर भी बल दे रहे हैं। स्वामी विवेकानंद की दृष्टि वाला प्रबुद्ध भारत तैयार किया जा रहा है। यह ऐसा भारत है जो आज विश्व को समाधान दे रहा है।
बता दें, ‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका की शुरुआत 1896 में स्वामी विवेकानंद ने की थी। आरंभ में यह पत्रिका मद्रास अब चेन्नई से प्रकाशित की जाती थी, लेकिन दो वर्ष बाद यह अल्मोड़ा से प्रकाशित होने लगी। अप्रैल 1899 के बाद इसका प्रकाशन अद्वैत आश्रम से होने लगा और उसके बाद से वहां से इसका सतत प्रकाशन हो रहा है।
नेताजी, तिलक, सिस्टर निवेदिता, श्री अरबिंदो, राधाकृष्णन ने भी लिखे लेख
इस ऐतिहासिक पत्रिका में देश की कई नामचीन शख्सियतों ने योगदान दिया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, सिस्टर निवेदिता, श्री अरबिंदो, पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन आदि ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, दर्शन, इतिहास, मनोविज्ञान, कला और अन्य सामाजिक मुद्दों पर अपने लेखन के माध्यम से ‘प्रबुद्ध भारत’ के पन्नों पर अपनी छाप छोड़ी है।