राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पीएम मोदी का संबोधन
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राष्ट्रपति का अभिभाषण पूरे 140 करोड़ देशवासियों के लिए
उन्होंने कहा कि किसी ने उनके अभिभषाण की बातों का विरोध नहीं किया, इस बात की खुशी है। सदन में हंसी-मजाक, टीका-टिप्पणी, नोकझोंक होती रहती है, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि आज राष्ट्र के रूप में गौरवपूर्ण अवसर हमारे सामने है। राष्ट्रपति जी के पूरे भाषण में है, वो पूरे 140 करोड़ देशवासियों के लिए हैं। सौ साल में एक बार आई भयंकर महामारी, दूसरी तरफ युद्ध की स्थिति और बंटा हुआ विश्व, इस स्थिति में भी और इस संकट के माहौल में भी देश जिस प्रकार से संभला है, इससे पूरा देश आत्मविश्वास से भर रहा है।
देशवासियों का जज्बा चुनौतियों से भी ज्यादा मजबूत
उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बिना जीवन नहीं होता है, चुनौतियां तो आती हैं, लेकिन चुनौतियों से ज्यादा सामर्थ्यवान है- 140 करोड़ देशवासियों का जज्बा। उनका सामर्थ्य चुनौतियों से भी ज्यादा मजबूत, बड़ा है। अनेक देशों में अस्थिरता का माहौल है। भीषण महंगाई है। खाने-पीने का संकट है। हमारे अड़ोस-पड़ोस में भी जिस प्रकार के हालात बने हुए हैं, ऐसी स्थिति में कौन हिंदुस्तानी इस बात पर गर्व नहीं करेगा कि ऐसे समय में भी देश दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। आज पूरे विश्व में भारत को लेकर पॉजिटिविटी है, एक आशा है, भरोसा है। यह भी खुशी की बात है कि आज भारत को विश्व के समृद्ध देशों के समूह जी-20 की अध्यक्षता का अवसर मिला है। यह देश के लिए गर्व की बात है। 140 करोड़ देशवासियों के लिए गौरव की बात है, लेकिन पहले मुझे नहीं लगता था, लेकिन अभी लग रहा है कि इससे भी कुछ लोगों को दुख हो रहा है। वे आत्मनिरीक्षण करें कि वे कौन लोग हैं, जिन्हें इसका भी दुख हो रहा है।
सभी को आज भारत के प्रति बहुत आशा
उन्होंने कहा कि आज दुनिया की हर विश्वसनीयता संस्था, सारे विशेषज्ञ जो वैश्विक प्रवाहों का गहराई से अध्ययन करते हैं, जो भविष्य का अच्छे से अनुमान भी लगा सकते हैं, उन सभी को आज भारत के प्रति बहुत आशा है, विश्वास है और बहुत मात्रा में उमंग भी है। आखिर यह सब क्यों है, ऐसे ही तो नहीं है। आज पूरी दुनिया भारत को इस प्रकार की नजरों से क्यों देख रही है, इसका जवाब है भारत में आई स्थिरता, वैश्विक साख में और भारत में बनती नई संभावनाओं में।
देश में स्थिर और निर्णय लेने वाली सरकार
पीएम मोदी ने कहा कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में जो बातें हो रही हैं, उसे समझाने की कोशिश करूंगा। भारत में दो-तीन दशक तक अस्थिरता रही, आज स्थिरता है, राजनीतिक स्थिरता है। स्थिर और निर्णय लेने वाली सरकार है। इसका भरोसा स्वाभाविक होता है। एक निर्णायक सरकार है, एक पूर्ण बहुमत से चलने वाली सरकार है, जो राष्ट्रहित में फैसले लेने का सामर्थ्य रखती है। यह वह सरकार है, जो मजबूरी के आधार पर सुधार नहीं करती, बल्कि दृढ़ संकल्प की वजह से सुधार लाती है। हम इस मार्ग से हटेंगे नहीं। देश को समय की मांग के अनुसार जो चाहिए, वो देते रहेंगे।
कोरोना वैक्सीनेशन की तारीफ की
पीएम मोदी ने कहा कि एक और उदाहरण देता हूं। इस कोरोनाकाल में भारत निर्मित वैक्सीन तैयार हुई। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया गया। अपने करोड़ों नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन के टीके लगाए गए। 150 से ज्यादा देशों को इस संकट के समय में हमने जहां जरूरत थी, वहां दवाई और वैक्सीन पहुंचाई। आज विश्व के कई देश भारत के विषय में यह बात गौरव से विश्व मंच पर कहते हैं, भारत का गौरवगान करते हैं। तीसरा पहलू यह है कि आज भारत का डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत है। इसने ताकत दिखाई है। पूरा विश्व इसका अध्ययन कर रहा है। बाली में जी-20 में डिजिटल इंडिया की वाहवाही हो रही थी। कोरोनाकाल में दुनिया के बड़े-बड़े देश अपने नागरिकों को आर्थिक मदद पहुंचाना चाहते थे। यह देश है, जो एक सेकंड एक हिस्से में हजारों करोड़ रुपये ट्रांसफर कर देता है। एक समय था, जब देश छोटी तकनीक के लिए भी तरसता था। आज देश आगे बढ़ रहा है।
देश की उपलब्धियां भी गिनाईं
उन्होंने कहा कि भारत में नई संभावनाएं हैं। कइयों को यह बात समझने में देर लग जाएगी, लेकिन भारत सप्लाई चेन के मामले में आगे बढ़ गया है। भारत मैन्यूफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित हो रहा है। दुनिया भारत की समृद्धि में अपनी समृद्धि देख रही है। निराशा में डूबे हुए कुछ लोग इस देश की प्रगति को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे। 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ और परिश्रम उपलब्धि उन्हें नजर नहीं आ रही। पिछले नौ वर्ष में भारत में 90 हजार स्टार्टअप आए हैं। आज स्टार्टअप के मामले में हम दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। बहुत बड़ा स्टार्टअप ईकोसिस्टम देश की टियर-3 शहरों तक पहुंच चुका है। इतने कम समय में और कोरोना के विकट कालखंड में 108 यूनिकॉर्न बने। एक यूनिकॉर्न यानी छह-सात हजार करोड़ से ज्यादा का मूल्य। आज भारत दुनिया में मोबाइल बनाने में दूसरा बड़ा देश बन गया है। घरेलू विमान यात्रियों के मामले में हम दुनिया में तीसरे नंबर पर हैं।
पिछली यूपीए सरकार को दिखाया आइना
उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच देश की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल हो गई थी, महंगाई डबल डिजिट रही। निराशा नहीं होगी तो क्या होगा। जिन्होंने बेरोजगारी दूर करने के वादे किए थे, उन्होंने बेरोगजारी दूर करने के नाम पर कानून दिखा दिया। अपने तरीके से पल्ला झाड़ दिया। आजादी के इतिहास में वह सबसे ज्यादा घोटालों का दशक रहा। यूपीए के वही दस साल में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत के हर कोने में आतंकी हमलों का सिलसिला चलता रहा। चारों तरफ यही सूचना रहती थी कि अनजानी चीज को हाथ नहीं लगाना, दूर रहना। दस साल में जम्मू-कश्मीर से पूर्वोत्तर तक हिंसा ही हिंसा थी। भारत की आवाज ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर इतनी कमजोर थी कि दुनिया सुनने को तैयार नहीं थी। ये 2जी में फंसे रहे। जब असैन्य परमाणु करार हुआ, तब ये वोट के बदले नोट में फंसे रहे। 2010 में राष्ट्रमंडल खेल हुए। भारत को दुनिया के सामने प्रस्तुत का अवसर था। फिर घोटाले में पूरा देश दुनिया में बदनाम हो गया।
ईडी, हॉर्वर्ड, दुष्यंत कुमार
पीएम मोदी ने कहा कि हमने नौ साल का समय देखा है। उनके दिवालियापन को देखा है। रचनात्मक आलोचना की जगह मजबूरी में आलोचना करने की प्रवृत्ति ने ले ली है। कई लोगों ने उनके सुर में अपने सुर मिला लिए। इससे तो एक मंच पर आए नहीं, लेकिन इन लोगों को ईडी का धन्यवाद देना चाहिए कि ईडी ने ही इन लोगों को एक मंच पर ला दिया है। जो काम देश के मतदाता नहीं कर पाए, वह ईडी ने कर दिया। मैंने कई बार सुना है। यहां कुछ लोगों को हार्वर्ड का बड़ा क्रेज है। कोरोनाकाल में ऐसा ही कहा गया था और कांग्रेस ने कहा था कि भारत की बर्बादी पर हॉर्वर्ड में केस स्टडी होगी। और फिर कल सदन में हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में स्टडी की बात हुई, लेकिन बीते वर्षों में वहां एक बहुत बढ़िया और महत्वपूर्ण स्टडी हुई। उसका विषय था- द राइज एंड डिक्लाइन ऑफ इंडियाज कांग्रेस पार्टी। मुझे विश्वास है कि भविष्य में कांग्रेस की बर्बादी पर हॉर्वर्ड नहीं, बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में अध्ययन होना ही होना है और कांग्रेस को डुबाने वाले लोगों पर भी अध्ययन होने वाला है। मैं ऐसे लोगों के लिए दुष्यंत कुमार ने बहुत बढ़िया बात कही है। उन्होंने कहा है कि तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं?