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विश्व भारती का शताब्दी समारोह: पीएम मोदी बोले- भारत के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बंगाल की पीढ़ियों ने खुद को खपाया

Thu, 24 Dec 2020 11:46 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने संबोधित करते हुए कहा, विश्व भारती, मां भारती के लिए गुरुदेव के चिंतन, दर्शन और परिश्रम का एक साकार अवतार है। भारत के लिए गुरुदेव ने जो स्वप्न देखा था, उस स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए देश को निरंतर ऊर्जा देने वाला ये एक तरह से आराध्य स्थल है। इस समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी उपस्थित हैं। 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI
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लाइव अपडेट

11:41 AM, 24-Dec-2020

वोकल फॉर लोकल का मंत्र पौष मेले से जुड़ा

पीएम मोदी ने कहा, पौष मेले के साथ वोकल फॉर लोकल का मंत्र हमेशा से जुड़ा रहा है। जब हम आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता की बात कर रहे हैं तो विश्व भारती के छात्र-छात्राएं पौष मेले में आने वाले कलाकारों की कलाकृतियां ऑनलाइन बेचने की व्यवस्था करें।

11:39 AM, 24-Dec-2020

गुरुदेव ने हमें स्वदेशी समाज का संकल्प दिया

प्रधानमंत्री ने कहा, गुरुदेव ने हमें स्वदेशी समाज का संकल्प दिया था। वो हमारे गांवों, कृषि को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। वो वाणिज्य, व्यापार, कला, साहित्य को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे। उन्होंने कहा, भारत की आत्मा, भारत की आत्मनिर्भरता और भारत का आत्मसम्मान एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए तो बंगाल की पीढ़ियों ने खुद को खपा दिया था।

11:36 AM, 24-Dec-2020

गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार 

पीएम मोदी ने कहा, विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है। आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है। ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है। 

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11:32 AM, 24-Dec-2020

भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद के चिंतन में भी मुखर थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद के चिंतन में भी मुखर थी और ये धारा अंतर्मुखी नहीं थी। वो भारत को विश्व के अन्य देशों से अलग रखने वाली नहीं थी। 

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, उनका विजन था कि जो भारत में सर्वश्रेष्ठ है, उससे विश्व को लाभ हो और जो दुनिया में अच्छा है, भारत उससे भी सीखे। आपके विश्वविद्यालय का नाम ही देखिए: विश्व-भारती। मां भारती और विश्व के साथ समन्वय।

11:30 AM, 24-Dec-2020

पीएम मोदी ने बताया किन तीन आंदोलनों से मिली आजादी के आंदोलन को ऊर्जा

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, समय की मांग थी कि ज्ञान के अधिष्ठान पर आजादी की जंग जीतने के लिए  वैचारिक आंदोलन भी खड़ा किया जाए और साथ ही उज्ज्वल भावी भारत के निर्माण के लिए नई पीढ़ी को तैयार भी किया जाए। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई, कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों ने, विश्वविद्यालयों ने। 

उन्होंने कहा, इन शिक्षण संस्थाओं ने भारत की आजादी के लिए चल रहे वैचारिक आंदोलन को नई ऊर्जा दी, नई दिशा दी, नई ऊंचाई दी। भक्ति आंदोलन से हम एकजुट हुए। ज्ञान आंदोलन ने बौद्धिक मजबूती दी और कर्म आंदोलन ने हमें अपने हक के लिए लड़ाई का हौसला और साहस दिया। 

पीएम मोदी ने कहा, सैकड़ों वर्षों के कालखंड में चले ये आंदोलन त्याग, तपस्या और तर्पण की अनूठी मिसाल बन गए थे। इन आंदोलनों से प्रभावित होकर हज़ारों लोग आजादी की लड़ाई में बलिदान देने के लिए आगे आए। 

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11:27 AM, 24-Dec-2020

भक्ति आंदोलन के साथ देश में कर्म आंदोलन भी चला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भक्ति आंदोलन के सैकड़ों वर्षों के कालखंड के साथ-साथ देश में कर्म आंदोलन भी चला। भारत के लोग गुलामी और साम्राज्यवाद से लड़ रहे थे। चाहे वो छत्रपति शिवाजी हों, महाराणा प्रताप हों, रानी लक्ष्मीबाई हों, कित्तूर की रानी चेनम्मा हों, भगवान बिरसा मुंडा का सशस्त्र संग्राम हो। 

11:24 AM, 24-Dec-2020

भक्ति आंदोलन ने संघर्षरत भारत को सामूहिक चेतना और आत्मविश्वास से भर दिया

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, भक्ति आंदोलन वो डोर थी जिसने सदियों से संघर्षरत भारत को सामूहिक चेतना और आत्मविश्वास से भर दिया। भक्ति का ये विषय तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक महान काली भक्त श्रीरामकृष्ण परमहंस की चर्चा ना हो। वो महान संत, जिनके कारण भारत को स्वामी विवेकानंद मिले। स्वामी विवेकानंद भक्ति, ज्ञान और कर्म, तीनों को अपने में समाए हुए थे। उन्होंने कहा, श्रीरामकृष्ण परमहंस ने भक्ति का दायरा बढ़ाते हुए हर व्यक्ति में दिव्यता को देखना शुरू किया। उन्होंने व्यक्ति और संस्थान के निर्माण पर बल देते हुए कर्म को भी अभिव्यक्ति दी, प्रेरणा दी। 

11:20 AM, 24-Dec-2020

आजादी के आंदोलन को सदियों पहले से चले आ रहे अनेक आंदोलनों से ऊर्जा मिली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, जब हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं तो हमारे मन में सीधे 19-20वीं सदी का विचार आता है। लेकिन ये भी एक तथ्य है कि इन आंदोलनों की नींव बहुत पहले रखी गई थी। भारत की आजादी के आंदोलन को सदियों पहले से चले आ रहे अनेक आंदोलनों से ऊर्जा मिली थी। 

उन्होंने कहा, भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता को भक्ति आंदोलन ने मजबूत करने का काम किया था। भक्ति युग में, हिंदुस्तान के हर क्षेत्र, हर इलाके, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, हर दिशा में हमारे संतों ने, महंतों ने, आचार्यों ने देश की चेतना को जागृत रखने का प्रयास किया। 

11:17 AM, 24-Dec-2020

भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के जरिए कर रहा पर्यावरण संरक्षण

पीएम मोदी ने कहा, हमारा देश, विश्व भारती से निकले संदेश को पूरे विश्व तक पहुंचा रहा है। भारत आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में विश्व का नेतृत्व कर रहा है। भारत आज इकलौता बड़ा देश है जो पेरिस समझौते के पर्यावरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के सही मार्ग पर है। 

11:12 AM, 24-Dec-2020

विश्व भारती गुरुदेव के चिंतन, दर्शन और परिश्रम का एक साकार अवतार 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, विश्व भारती की सौ वर्ष यात्रा बहुत विशेष है। विश्व भारती, मां भारती के लिए गुरुदेव के चिंतन, दर्शन और परिश्रम का एक साकार अवतार है। भारत के लिए गुरुदेव ने जो स्वप्न देखा था, उस स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए देश को निरंतर ऊर्जा देने वाला ये एक तरह से आराध्य स्थल है। 

11:07 AM, 24-Dec-2020

समारोह में शामिल हुए पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में शामिल हुए हैं। वह लोगों को संबोधित कर रहे हैं।
 

 

10:31 AM, 24-Dec-2020

पीएम मोदी बोले- भारत के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बंगाल की पीढ़ियों ने खुद को खपाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए हैं। इस समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी उपस्थित हैं। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1921 में स्थापित विश्व भारती, देश का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर पश्चिम बंगाल की प्रमुख हस्तियों में गिने जाते हैं। वर्ष 1951 में विश्व भारती को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया था और उसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में शुमार किया गया था। प्रधानमंत्री इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होते हैं।
 

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