भारतीय सेना के सेनानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने भी ट्विटर पर भी इस बात को उठाया। लेह को परिस्थिति अनुकूलन के मामले में पहले चरण का स्थान माना जाता है। इसका मतलब आप सीधे वहां लैंड तो कर सकते हैं लेकिन इसके बाद कुछ दिनों के लिए आपको अपनी रफ्तार धीमी रखनी होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को ऐसी कठिन यात्रा पर ले जाना ठीक नहीं था।
ट्विटर पर हसनैन के इस ट्वीट पर एक यूजर ने लिखा कि, यही मेरे दिमाग में भी आया था! लेह में भी कई लोग जो दिल्ली से जाकर सीधे लैंड करते हैं, ऊंचाई में बदलाव आने के कारण उन्हें कुछ समस्याएं होने लगती हैं। यह कैसे संभव है कि प्रधानमंत्री बिना किसी अभ्यास के इस तरह की यात्रा कर पा रहे हैं। वहीं एक अन्य यूजर ने उनकी जीवनशैली का हवाला देते हुए लिखा कि शायद योग इसमें उनकी मदद करता है।