प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय पर हस्तक्षेप और इसरो के रॉकेट उपलब्ध कराने में भारत सरकार के सहयोग से वनवेब के 36 उपग्रहों के अंतिम सेट के प्रक्षेपण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उपग्रह दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी के प्रमुख सुनील भारती मित्तल ने रविवार को यह जानकारी दी।
लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) उपग्रह संचार फर्म ने आज आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इसरो एलएमआरओ-3 रॉकेट से उपग्रहों का प्रक्षेपण किया। ये उपग्रह कंपनी के लिए अंतरिक्ष से पृथ्वी पर किसी भी स्थान पर ब्रॉडबैंड इंटरनेट कवरेज देने में महत्वपूर्ण हैं।
भारती ग्लोबल के संस्थापक मित्तल ने कहा, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण हमें बड़ा झटका लगा था क्योंकि उपग्रहों के छह प्रक्षेपण को वापस ले लिया गया था। इनके लिए पूरी तरह से अनुबंध और भुगतान किया गया था। उन्होंने कहा, इसी वजह से वनवेब अपना पैसा वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहा था।
दूरसंचार कारोबारी ने प्रक्षेपण के बाद ऑनलाइन बातचीत में मीडियाकर्मियों से कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षण को पहचाना और भारत में पूरे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र (स्पेस इकोसिस्टम) को दो रॉकेट देने का निर्देश दिया, जो मुझे लगता है कि हमारे लिए पासा पलटने वाला साबित हुआ है।
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वनवेब के मिशन को तब खतरे का सामना करना पड़ा था, जब पिछले साल मार्च में रूसी निर्मित सोयुज रॉकेट पर उड़ान भरने वाले इसके 36 उपग्रहों को कजाकिस्तान में लॉन्च पैड से हटा दिया गया था, जिसे रूसी एयरोस्पेस फोर्सेज और रूस की संघीय अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस द्वारा संयुक्त रूप से प्रबंधित किया गया है।
रूस ने कथित तौर पर मांग की थी कि वनवेब गारंटी दे कि उपग्रहों का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा। ब्रिटेन की सरकार ने भी लंदन स्थित कंपनी से खुद को अलग कर लिया था।। मित्तल ने कहा, मैं इसरो की सराहना करना चाहता हूं जिसने शानदार काम किया है। और यह अत्यंत तंग समय-सीमा में किया गया है।