प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने ब्रिक्स देशों के समूह के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जोहानिसबर्ग की यात्रा करेंगे। केंद्र सरकार ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की है। ब्रिक्स के वर्तमान पांच सदस्य ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका 22 से 24 अगस्त को वहां एकत्र होंगे। शिखर सम्मेलन में चीन और रूस संगठन के विस्तार पर चर्चा करने के इच्छुक हैं जिसका उद्देश्य वैश्विक मामलों में अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिम के कथित प्रभुत्व को कम करना है।
इसके बाद पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा से बात करके खुशी हुई। हम अपने राजनयिक संबंधों की 30वीं वर्षगांठ मना रहे हैं और द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति की समीक्षा की। इस महीने के अंत में जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए उत्सुक हूं।
इससे पहले खबरें आई थीं कि प्रधानमंत्री मोदी महीने के अंत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दक्षिण अफ्रीका नहीं जाएंगे। बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिये वर्चुअल रूप से सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी सम्मेलन में वर्चुअल रूप से शामिल होंगे।
चीन पर भारत का कड़ा रुख
ब्रिक्स के जरिए दुनिया पर दबदबा बनाने की चीनी मंशा पर हाल ही में भारत ने कहा था कि ब्रिक्स में शामिल होने को लेकर कुछ नियम बनने चाहिए। ताकि औपचारिक विस्तार से पहले ऐसा कुछ ना हो। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे चीन की असल मंशा यह है कि ब्रिक्स का ऐसा विस्तार किया जाए कि वह अमेरिका और यूरोपीय संघ के मुकाबले मजबूत दिखाई दे। चीन की इच्छा है कि इसमें इंडोनेशिया और सऊदी अरब को भी शामिल कर लिया जाए। दुनियाभर में करीब एक दर्जन देश ऐसे हैं, जो इस संगठन का हिस्सा बनना चाहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले महीने दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स की बैठक होने वाली है। इस बीच चीन ने दूसरे देशों को संगठन में शामिल करने की सिफारिशें की हैं।