प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के अपने समकक्ष शिंजो अबे के साथ गुजरात के अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन की आधार शिला रखेंगे। अहमदाबाद से मुंबई के बीच दौड़ने वाली इस ट्रेन की परियोजना पर करीब एक लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा और 2023 तक इसके पूरा हो जाने की संभावना है। लेकिन इसी के साथ इसे जिओपालिटिक्स की कूटनीतिक पिच पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फेंकी गई यार्कर के तौर पर देखा जा रहा है। जापान और भारत की निकटता से जहां चीन की बेचैनी बढ़ेगी, वहीं दक्षिण एशिया और एशिया में समीकरण भी बदलेंगे।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी 2014 में जापान गए थे। तब उन्होंने शिंजो आबे के साथ बुलेट ट्रेन में सफर किया था। जापान में बुलेट ट्रेन को शिंकासेन कहा जाता है और इसका रिकॉर्ड है कि कभी भी 59 या 60 सेकेंड से ज्यादा लेट नहीं हुई है। प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद जापान के पीएम 2015 में भारत आए थे। तब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देश की धार्मिक नगरी वाराणसी गए थे।
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आबे वहां गंगा आरती में शरीक हुए थे। इसके बाद बनारस के ब्राह्मणों का एक दल जापान गया था और वहां की खुशहाली तथा समृद्धि के लिए पूजा-पाठ किया था। अब 13 सितंबर 2017 को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे दो दिन की भारत यात्रा पर आ रहे हैं।
चीन की बेचैनी की वजह
Xi Jinping
सितंबर 2014 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुजरात आए थे। लेकिन तीन साल के भीतर भारत और चीन के रिश्ते में कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पाई। हाल ही में डोकलाम में चीन और भारत के सैनिकों के बीच बने गतिरोध ने रिश्ते की कलई खोलकर रख दी है। दोनों देशों के बीच में आर्थिक संबंध, व्यापार तथा निवेश में भी खास प्रगति नहीं हुई है। चीन की नजर भारत की बुलेट परियोजना पर भी थी।
चीन, जापान का प्रतिद्वंदी है। दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ रहे प्रभाव का जापान विरोध कर रहा है। वहीं उत्तर कोरिया का परमाणु परीक्षण और आक्रामक रुख जापान को तंग कर रहा है। जापान के पास उच्च स्तर की तकनीक है। रक्षा तकनीक के मामले में भी जापान काफी आगे है। ऐसे में भारत और जापान की बढ़ रही दोस्ती चीन और उत्तर कोरिया दोनों खलेगी।
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घरेलू राजनीति भी
गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए बहुत कम समय बचा है। वहां पाटीदार आंदोलन चल रहा है और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पूरे दमखम से चुनाव में उतर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृहराज्य गुजरात है। इसलिए यहां का चुनाव भाजपा के लिए स्वाभिमान की तरह है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के महत्व को लगातार बनाए रखना चाहते हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी का अहमदाबाद में आठ किमी का रोड-शो भी इसी का हिस्सा है।
भारतीय मूल के परियोजना सलाहकार
बुलेट ट्रेन परियोजना के सलाहकार भी भारतीय मूल के हैं। संजीव सिन्हा मूलत: राजस्थान के सामान्य परिवार से हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से भौतिकी विज्ञान में इंटीग्रेटेड एमएससी किया है। पांच साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ दिन भारत में काम किया और इसके बाद जापान चले गए थे। संजीव सिन्हा पिछले 20 साल से अधिक समय से जापान में बसे हैं। उन्होंने एक जापानी लड़की से शादी की है।
बुलेट ट्रेन अहमदाबाद में
बुलेट ट्रेन
मुंबई और अहमदाबाद का रूट काफी व्यस्त रहता है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है तो अहमदाबाद ने भी काफी प्रगति की है। दोनों वाणिज्यक केन्द्रों के बीच में धनाढ्य (संपन्न) वर्ग का बड़ी संख्या में आना जाना है। ऐसे में भारतीय योजनाकारों को अनुमान है कि पहले चरण में बुलेट ट्रेन का प्रयोग इस क्षेत्र में सफल रहेगा। बुलेट ट्रेन परियोजना जितनी महंगी है, उतना ही महंगा इसका सफर होने की आशंका है।
यह एक लाख 10 हजार करोड़ की परियोजना बताई जा रही है, जो 2023 में पूरा हो सकती है और इसके परिचालन के बाद अहमदाबाद से मुंबई का 7-8 घंटे का 500 किमी से अधिक का सफर महज 2 घंटे में पूरा हो जाएगा। इससे करीब 50 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
इसका दूसरा पक्ष जापान से है। गुजरात में जापान की 50 कंपनियां काम कर रही हैं। करीब दर्जन भर और कंपनियां गुजरात और भारत आना चाह रही हैं। सुजुकी देश में स्वचालित मोटर कार का कारखाना लगाना चाहती है, जिसकी पहल शुरू कर दी गई है।
इतना ही नहीं जापान ने गुजरात में विशेष क्षेत्रों के अलावा सामान्य क्षेत्र के लिए भी ऋण देना शुरू किया है। ताकि आम लोगों के जीवन में इसका इस्तेमाल हो सके और उनके उपयोग का लाभ जापान की कंपनियों को मिल सके।
घरेलू राजनीति भी
गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए बहुत कम समय बचा है। वहां पाटीदार आंदोलन चल रहा है और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पूरे दमखम से चुनाव में उतर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृहराज्य गुजरात है। इसलिए यहां का चुनाव भाजपा के लिए स्वाभिमान की तरह है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के महत्व को लगातार बनाए रखना चाहते हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी का अहमदाबाद में आठ किमी का रोड-शो भी इसी का हिस्सा है।
भारतीय मूल के परियोजना सलाहकार
बुलेट ट्रेन परियोजना के सलाहकार भी भारतीय मूल के हैं। संजीव सिन्हा मूलत: राजस्थान के सामान्य परिवार से हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से भौतिकी विज्ञान में इंटीग्रेटेड एमएससी किया है। पांच साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ दिन भारत में काम किया और इसके बाद जापान चले गए थे। संजीव सिन्हा पिछले 20 साल से अधिक समय से जापान में बसे हैं। उन्होंने एक जापानी लड़की से शादी की है।