'बंगाल में डबल इंजन सरकार बनने दें'
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कई विकास परियोजनाएं राज्य सरकार की वजह से लंबित पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अगर टीएमसी भाजपा का विरोध करना चाहती है तो करे, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए विकास को रोके जाने की बात समझ से बाहर है। पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि वे भाजपा को एक मौका दें, डबल इंजन सरकार बनने दें और भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार बंगाल के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेगी।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन से पहले 3,200 करोड़ रुपये के नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन भी किया। पीएम मोदी सुबह करीब 10.40 बजे दिल्ली से कोलकाता पहुंचे थे। वहां से हेलिकॉप्टर से ताहिरपुर रवाना हुए। लेकिन, घने कोहरे के कारण हेलिकॉप्टर कुछ देर तक हेलीपैड के ऊपर मंडराने के बाद वापस कोलकाता लौट गया।
बंगाल को 3200 करोड़ रुपये की सौगात- पीएम मोदी
गौरतलब है कि अपने बंगाल दौरे पर प्रधानमंत्री करीब 3,200 करोड़ रुपये की दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। नदिया जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के बरजागुली-कृष्णानगर सेक्शन के 66.7 किलोमीटर लंबे फोर-लेन का उद्घाटन और उत्तर 24 परगना जिले में 17.6 किलोमीटर लंबे बारासात-बरजागुली सेक्शन के फोर-लेन का शिलान्यास किया। अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं से कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी लिंक बनने की उम्मीद है, जिससे राज्य के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
SIR प्रक्रिया के बीच पीएम मोदी की पहली जनसभा
पीएम मोदी ने बंगाल दौरे से पहले शुक्रवार शाम को एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'पश्चिम बंगाल के लोगों को केंद्र सरकार की कई जन-समर्थक पहलों से फायदा हो रहा है। साथ ही, वे हर क्षेत्र में टीएमसी के कुशासन के कारण पीड़ित हैं।'
प्रधानमंत्री ने लिखा, 'टीएमसी की लूट और धमकियों ने सभी हदें पार कर दी हैं। इसीलिए, भाजपा से लोगों को उम्मीद है। प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस एसआईआर का लगातार विरोध कर रही है। टीएमसी का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया 'जल्दबाजी' में की जा रही है और इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों, खासकर शरणार्थी हिंदुओं को, उनके मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। एसआईआर ड्राफ्ट में पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों में से 58 लाख से ज्यादा नामों को हटाया गया है। इसके बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या घटकर 7.08 करोड़ रह गई है।