प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अप्रैल को केरल में भारत की पहली ‘वाटर मेट्रो रेल सेवा’ का लोकार्पण करेंगे। कोच्चि व आस-पास के दस द्वीपों के बीच शुरू हो रही सेवा ऐसे शहरों के लिए बेहद उपयोगी मानी जा रही है, जहां पारंपरिक मेट्रो रेल में कई बाधाएं हैं।
पीएम मोदी ने वाटर मेट्रो की तस्वीरें जारी करते हुए बताया, कोच्चि वाटर मेट्रो शहर के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में अहम साबित होगी। करीब 1,136 करोड़ रुपये की परियोजना को केरल के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जा रहा है। यह शहर में सार्वजनिक परिवहन व पर्यटन के जरिये आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकेगा।
दरअसल, बुनियादी ढांचे व परिवहन साधन मुहैया करवाने के लिए सरकार सावधानी से विकल्प चुन रही है। उसका मानना है, एक ही तरह का समाधान हर शहर के लिए उपयोगी नहीं हो सकता।
मेट्रो ट्रेन की तरह यह पूरी तरह वातानुकूलित होंगी और रोजाना 15 मिनट के अंतराल पर 12 घंटे तक सेवाएं देंगी। अभी शुरुआत में 23 नावें व 14 टर्मिनल हैं। वहीं, प्रत्येक मेट्रो में 50 से 100 यात्री बैठ सकते हैं।
अब शहर की जरूरत के अनुसार परिवहन प्रणाली
मेट्रो लाइट : गोरखपुर, जम्मू में
- अनुभव, आराम, सुविधाएं, समयबद्धता, विश्वसनीयता, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पारंपरिक मेट्रो की तरह।
- जम्मू, श्रीनगर, गोरखपुर जैसे टियर-2 व छोटे शहरों के लिए।
- एक समय में अधिकतम 15 हजार लोगों को सेवाएं।
- 40% कम लागत पारंपरिक मेट्रो से।
मेट्रो नियो : नासिक में
रबर के पहियों वाली यह मेट्रो सेवा ओवरहेड ट्रैक्शन लाइन से बिजली लेकर रोड स्लैब पर चलाई जाएंगी। पारंपरिक मेट्रो जैसी सुविधाएं।
नासिक में तैयारी। इलेक्ट्रिक बस ट्रॉली की तरह होगी।
एक समय में अधिकतम आठ हजार यात्रियों को ले जाएगी।
स्थानीय तीव्र परिवहन प्रणाली : एनसीआर, मेरठ में
देश में पहली बार स्थानीय स्तर पर तीव्र परिवहन प्रणाली या आरआरटीएस के जरिये दो शहरों को मेट्रो से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
एनसीआर-मेरठ के लिए। स्थानीय स्तर पर विकास को तेजी की उम्मीद की जा रही है। नागरिकों को भी बेहतर परिवहन सेवाएं मिल सकेंगी।