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PM के 'मन की बात': खाने की बर्बादी सामाजिक अपराध, जूठन न छोड़ें

Sun, 26 Mar 2017 06:59 PM IST
amarujala.com- Presented by: अजय कुमार सिंह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30वें 'मन की बात' कार्यक्रम में कई बातों पर जोर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में पीएम ने बच्चों के एग्जाम और बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस पर बात की। उन्होंने कहा कि आज 26 मार्च है और आज का दिन बांग्लादेश ने स्वतंत्रता पाई थी। प्रधानमंत्री ने कामना जताई कि बांग्लादेश आगे बढ़े और विकास करे।
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उन्होंने देश के युवाओं से अनुरोध किया कि जब भी समय मिले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधि पर जरूर जाएं। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह हम सब की प्रेरणा हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कामकाजी महिलाओं के लिए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब गर्भवती महिलाओं को 26 हफ्तों का अवकाश निर्धारित किया गया है। विश्व में सिर्फ तीन देशों में इससे ज्यादा छुट्टी का प्रावधान है।  

पीएम ने अपील करते हुए कहा कि 21 जून को योग दिवस मनाने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि खुद को स्वस्थ रखने और तनाव-दबाव से मुक्त रखने के लिए योग भी अच्छा उपाय है। पीएम ने कहा कि 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस है। दुनिया में 35 करोड़ लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। हमें इसको लेकर बात करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि डिप्रेशन के सप्रेशन की बजाए एक्सप्रेशन की जरूरत है। अपनों के बीच में खुलकर खुद को एक्सप्रेस नहीं कर पाते हैं तो अगल-बगल के लोगों के प्रति सेवा भाव से जुड़िए, देखिएगा आपका दुख कम हो जाएगा।

पीएम ने कहा कि खाना फेंकना गंदी आदत है। उन्होंने कहा कि हम जरूरत से ज्यादा चीजें प्लेट में ले लेते हैं और फिर जूठन छोड़ देते हैं। हमने कभी सोचा है कि अगर जूठन न छोड़ें तो कितने गरीबों का पेट भरा जा सकता है। पीएम ने खाना फेंकने को समाज द्रोह बताया।

ब्लैकमनी के खिलाफ लड़ाई आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कहा कि देशवासी वर्ष में 2500 करोड़ डिजिटल लेन-देन करने का संकल्प कर सकते हैं क्या? उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जन्म-जयंती है और उनकी जन्म-जयंती पर डिजी-मेला का समापन होने वाला है। नोटबंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट के अलग-अलग तरीकों में काफी वृद्धि देखने को मिली है।

पीएम ने कहा कि यह चंपारण सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष है। भारत की आजादी के आंदोलन में, गांधी विचार शैली का प्रकट रूप पहली बार चंपारण में नजर आया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक ट्रैफिक नियमों का पालन करने का संकल्प करे। साथ ही एक दिन डीजल-पेट्रोल का इस्तेमाल भी नहीं करने का संकल्प लें।

उन्होंने गांधी को याद करते हुए कहा कि गांधी जी ने संघर्ष और सृजन दोनों सिखाया। ब्रिटिश सम्राज्य के खिलाफ संघर्ष तो भारत के पक्ष में सृजन के कई कार्यक्रम चलाए। उन्होंने कहा कि गांधी जी देश की नब्ज को जानते थे। सामाजिक जीवन की शुरुआत करने वाले चंपारण सत्याग्रह को जानें।
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