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PM Modi Speech: प्रधानमंत्री को पता है कि जनता क्या सुनना चाहती है और विपक्ष पर कैसे तंज कसना है

सार

PM Modi Speech: कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि प्रधानमंत्री वह भाषा और उसकी लाइने जानते हैं, जो देश की जनता सुनना चाहती है। उनका कहना है कि विपक्ष जब तक इसे नहीं समझ पाएगा, तबतक अपना वजूद नहीं बना सकेगा...
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pm modi speech in rajya sabha today - फोटो : Agency
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विस्तार
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बुधवार को राहुल गांधी जब संसद भवन से बाहर निकल रहे थे, तो उनके चेहरे पर एक मायूसी थी कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। यह प्रतिक्रिया कांग्रेस के सांसद और बौद्धिक वर्ग में गजब की छवि रखने वाले शशि थरूर की भी थी। राज्य सभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अपने शानदार अंदाज में बात रखी। अदाणी समूह पर लगे आरोप की जांच के लिए जेपीसी के गठन की मांग तक की। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के ऐसे सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। 2014 के बाद से राफेल लड़ाकू विमान, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी, जीएसटी, चीन की लद्दाख में घुसपैठ जैसे मुद्दों समेत कभी-कभार ही ऐसा अवसर आया, जब प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी द्वारा उठाए किसी सवाल का खुलकर जवाब दिया हो? राहुल गांधी ने संसद भवन से निकलते समय संवाददाताओं के सवाल पर कहा कि वह प्रधानमंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री अदाणी को बचा रहे हैं।

...जवाब दिया नहीं और हाथ से बाजी भी छीन ले गए प्रधानमंत्री

सीजीओ कॉम्प्लेक्स में केंद्र सरकार ने एक टीम बैठा रखी है। इस टीम में तमाम सदस्य हैं और प्रतिदिन एक नए एजेंडे पर काम करते हैं। इस टीम का मुख्य कार्य प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को लेकर अवधारणा (नरेशन) को बनाए रखना है। इसके एक प्रमुख सदस्य का कहना है कि यही तो प्रधानमंत्री की टीआरपी है। सूत्र का कहना है कि वह कहते नहीं, राष्ट्र के लिए करते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि प्रधानमंत्री को पता होता है कि उन्हें क्या करना है। इसलिए वह विपक्ष पर हमले करते हैं। अपनी बात अपने तरीके से रखते हैं। जनता इसमें समझदार या गैर समझदार विपक्ष ढूंढ लेती है।

इस बारे में कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि प्रधानमंत्री वह भाषा और उसकी लाइने जानते हैं, जो देश की जनता सुनना चाहती है। सूत्र का कहना है कि विपक्ष जब तक इसे नहीं समझ पाएगा, तबतक अपना वजूद नहीं बना सकेगा। कांग्रेस पार्टी के एक प्रवक्ता ने भी नाम न छापने की शर्त पर प्रधानमंत्री के विपक्ष के सवाल का जवाब न देने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री लक्षणा, व्यंजना का प्रयोग करके विपक्ष को उलझा देने की रणनीति लेकर चलते हैं। इसके पीछे राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय हित का संदेश देने का सहारा लेकर सत्ता पक्ष की मंशा राहुल गांधी की छवि को पप्पू की छवि में बांधे रखने की होती है।

निजी हमले का जिम्मा भाजपा के और नेताओं पर रहता है

राजनीति शात्र के प्रो. एके सिंह कहते हैं कि प्रधानमंत्री संसद भवन में विपक्ष के नेताओं का नाम लेकर टीका टिप्पणी नहीं करते हैं। इसके लिए भाजपा के दूसरे नेता और अनुराग ठाकुर, स्मृति ईरानी जैसे केंद्रीय मंत्री हैं। इसके समानांतर विपक्ष के नेता और खासकर राहुल गांधी 2015 के बाद से प्रधानमंत्री पर नाम लेकर खुलकर हमले बोल रहे हैं। राहुल गांधी का यह हमला आक्रामक और एंग्री यंगमैन की तरह होता है। जबकि प्रधानमंत्री चुटीले अंदाज में मर्यादा का ख्याल रखकर विपक्ष को घेरते हैं। उनके पास राजनीति का अच्छा अनुभव है। एके सिंह का कहना है कि जहां तक उन्हें याद है, प्रधानमंत्री ने संसद भवन से या फिर सरकार के फोरम से टीका-टिप्पणी को अलग अंदाज में रखा है। इसके साथ-साथ उन्होंने संवाद में हमेशा विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं का ख्याल रखा। सिंह के मुताबिक कांग्रेस के वरिष्ठ और सम्मानित नेता इसके समानांतर प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार पर हमला बोलते समय संयत रहते हैं।

प्रधानमंत्री का फोकस सरकार की छवि पर रहता है

संतोष कुमार राजनीति के स्कॉलर हैं। वह राजनीतिक सर्वे में भी रुचि रखते हैं। संतोष कुमार के मुताबिक वह 2014 से लगातार प्रधानमंत्री मोदी और उनकी राजनीतिक शैली पर काम कर रहे हैं। संतोष कुमार के मुताबिक प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री का केंद्रीय मंत्रिमंडल और भाजपा तथा भाजपा के नेताओं के बीच में राजनीतिक बयानबाजी, टिप्पणी और लोगों से संवाद का स्तर काफी हद तक नियंत्रित है। संतोष कुमार कहते हैं कि पिछले काफी समय से भाजपा ने अपने बड़बोले या विचित्र बयानबाजी करने वाले नेताओं पर काफी लगाम लगाई है। सरकार और भाजपा दोनों इस मामले में पार्टी और नेता की छवि को बनाने पर विशेष ध्यान देती है। इसके लिए अवधारणा को बनाने और बिगाड़ने के लिए पार्टी के पास बड़ी संख्या में लोग हैं। वह स्वतंत्र तरीके से अपना काम करते रहते हैं। जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अपने ही नेताओं के बयान, बगावत और आपसी कलह से तंग हैं।

कुमार के मुताबिक यह कोई छोटी बात नहीं है। वह कहते हैं कि आप मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान को ही ले लीजिए। मध्यप्रदेश में सिधिंया बगावत कर गए। उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की टीम के सदस्य कहे जाने वाले आरपीएन और जतिन प्रसाद साथ छोड़ गए। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह दल-बल के साथ बाहर आ गए, तो उत्तराखंड में चुनाव के एन वक्त पर जो सियासी ड्रामा हुआ, उसे क्या कहेंगे। कर्नाटक में बागियों के कारण गठबंधन की सरकार गिर गई। संतोष कुमार का कहना है कि इस तरह की स्थितियां न तो राहुल गांधी को बड़ा और गंभीर नेता बनने दे रही हैं और न ही विपक्ष एक ताकत बन पा रही है।

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