प्रधानमंत्री नरेंद् मोदी ने आज गुरुवार को कर्तव्य पथ का उद्घाटन किया। इससे पहले पीएम मोदी ने इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण किया। पीएम मोदी ने जिस कर्तव्य पथ का उद्घाटन किया है, उसे आज से पहले तक राजपथ के रूप में जाना जाता था, वहीं अंग्रेजों के जमाने में इसे किंग्सवे के नाम से जाना जाता था। इस मौके पर पीएम मोदी ने संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि आज अगर राजपथ का अस्तित्व समाप्त होकर कर्तव्यपथ बना है, आज अगर जॉर्ज पंचम की मूर्ति के निशान को हटाकर नेताजी की मूर्ति लगी है, तो ये गुलामी की मानसिकता के परित्याग का पहला उदाहरण नहीं है। ये न शुरुआत है ना ही अंत है, ये मन और मानस की आजादी का लक्ष्य हासिल करने तक निरंतर चलने वाली संकल्प यात्रा है। पढ़ें पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें....
देशवासियों को दी बधाई
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं सभी देशवासियों को आजादी के इस अमृतकाल में गुलामी की एक और पहचान से मुक्ति के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में देश को आज एक नई प्रेरणा मिली है, नई ऊर्जा मिली है। आज हम गुजरे हुए कल को छोड़कर, आने वाले कल की तस्वीर में नए रंग भर रहे हैं। आज जो हर तरफ ये नई आभा दिख रही है, वो नए भारत के आत्मविश्वास की आभा है।
नेताजी की मूर्ति सशक्त भारत की प्राण प्रतिष्ठा का प्रतीक
पीएम मोदी ने गुलामी के हर प्रतीक को मिटा देने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि गुलामी का प्रतीक किंग्सवे यानि राजपथ आज से इतिहास की बात हो गया है। आज कर्तव्य पथ के रूप में नए इतिहास का सृजन हुआ है। इंडिया गेट के समीप हमारे राष्ट्रनायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की विशाल मूर्ति भी स्थापित की गई है। गुलामी के समय यहां ब्रिटिश राजसत्ता के प्रतिनिधि की प्रतिमा लगी हुई थी। आज देश ने उसी स्थान पर नेताजी की मूर्ति की स्थापना करके आधुनिक और सशक्त भारत की प्राण प्रतिष्ठा भी कर दी है।
सुभाष चंद्र बोस को बताया महामानव
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सुभाषचंद्र बोस ऐसे महामानव थे जो पद और संसाधनों की चुनौती से परे थे। उनकी स्वीकार्यता ऐसी थी कि, पूरा विश्व उन्हें नेता मानता था। अगर आजादी के बाद हमारा भारत सुभाष बाबू की राह पर चला होता तो आज देश कितनी ऊंचाइयों पर होता! लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद हमारे इस महानायक को भुला दिया गया। उस वक्त उन्होंने लाल किले पर तिरंगा फहराने की अनुभूति की कल्पना की थी। इस अनुभूति का मैंने स्वयं अनुभव किया है, जब मुझे आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष होने पर लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला था।
पीएम मोदी ने अपने आठ सालों के कार्यकाल में लिए गए निर्णयों के बारे में बोलते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में हमने एक के बाद एक ऐसे कितने ही निर्णय लिए हैं, जिन पर नेताजी के आदर्शों और सपनों की छाप है। नेताजी सुभाष, अखंड भारत के पहले प्रधान थे जिन्होंने 1947 से भी पहले अंडमान को आजाद कराकर तिरंगा फहराया था।
बीते आठ सालों में किए गए कामों को गिनाया
पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के बारे में बोलते हुए कहा कि आज भारत के आदर्श अपने हैं, आयाम अपने हैं, आज भारत के संकल्प अपने हैं, लक्ष्य अपने हैं। आज हमारे पथ और प्रतीक अपने हैं। ये न शुरुआत है, न अंत है, ये मन और मानस की आजादी का लक्ष्य हासिल करने तक, निरंतर चलने वाली संकल्प यात्रा है।
देश ने अपने लिए 'पंच प्राणों' का विजन रखा
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर देश ने अपने लिए 'पंच प्राणों' का विजन रखा है। इन पंच प्राणों में विकास के बड़े लक्ष्यों का संकल्प है, कर्तव्यों की प्रेरणा है। इसमें गुलामी की मानसिकता के त्याग का आहृवान है। अपनी विरासत पर गर्व का बोध है।
भारत में हो रहे बदलाव को बताया
पीएम मोदी ने नए भारत में हो रहे बदलावों के बारे बोलते हुए कहा कि आज देश अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों क़ानूनों को बदल चुका है। भारत के बजट की तारीख और समय को बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय बजट, जो इतने दशकों से ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा था, उसका समय और तारीख भी बदली गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए अब विदेशी भाषा की मजबूरी से भी देश के युवाओं को आजाद किया जा रहा है।
कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं है, ये भारत के लोकतान्त्रिक अतीत और सर्वकालिक आदर्शों का जीवंत मार्ग है। उन्होंने कहा कि जब देश के लोग यहां आएंगे, तो नेताजी की प्रतिमा, नेशनल वार मेमोरियल देखेंगे। इन सबसे लोगों को कितनी बड़ी प्रेरणा और कर्तव्यबोध मिलेगा ये सोंचकर ही हर्ष होता है। उन्होंने कहा कि इस कर्तव्य पथ से जब सरकारी कर्मचारी गुजरेंगे तो उन्हें देश के लिए अपने कर्तव्य का बोध भी होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि राजपथ ब्रिटिश राज के लिए था, जिनके लिए भारत के लोग गुलाम थे। राजपथ की भावना भी गुलामी का प्रतीक थी, उसकी संरचना भी गुलामी का प्रतीक थी। आज ना सिर्फ इसका आर्किटैक्चर बदला है बल्कि इसकी आत्मा भी बदली है।
कर्तव्य पथ के निर्माण में शामिल लोग होंगें गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कर्तव्य पथ के निर्माण में शामिल लोगों का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होने का न्योता देने का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि आज के इस अवसर पर मैं अपने उन श्रमिक साथियों का विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने कर्तव्यपथ को केवल बनाया ही नहीं है, बल्कि अपने श्रम की पराकाष्ठा से देश को कर्तव्य पथ दिखाया भी है। उन्होंने आगे कहा कि जब मैं श्रमिकों से मिला तो मैंने उनसे कहा कि इस बार 26 जनवरी को जिन्होंने यहां पर काम किया है वो परिवार के साथ 26 जनवरी के कार्यक्रम में मेरे विशेष अतिथि रहेंगे।
देश को दिया कर्तव्य पथ देखने का न्योता
अपने संबोधन में उन्होंने देश के सभी नागरिकों को कर्तव्य पथ देखने का न्यौता देते हुए कहा कि मैं आप सभी को आमंत्रण देता हूं आइये, इस नवनिर्मित कर्तव्य पथ को आकर देखिए। इस निर्माण में आपको भविष्य का भारत नजर आएगा। यहां की ऊर्जा आपको हमारे विराट राष्ट्र के लिए एक नया विजन और एक नया विश्वास देगी। इस दौरान पीएम मोदी ने सबसे यहां आकर अपने परिवार के साथ कर्तव्य पथ पर सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर #कर्तव्यपथ के साथ पोस्ट करने की भी अपील की।