केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने कहा कि देश में खास तौर पर चिह्नित स्थान और क्षेत्रों में कोरोना वायरस की एकाग्रता और कुशलता से जांच होनी चाहिए।
बेनेट विश्वविद्यालय की ओर से ‘कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई-बायोटेक से बचाव तक’ विषय पर आयोजित ऑनलाइन सम्मेलन में विजय राघवन ने कोरोना वायरस मामले का पता लगाने में डिजिटल तकनीक का सहारा लेने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि बंद के बाद कोरोना वायरस के मामले का पता लगाने में यह एक प्रभावी तरीका हो सकता है।
विजय राघवन ने पर्याप्त जांच के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि कई लोग पूरे भारत की जनसंख्या के मुकाबले जांच के स्तर की बात कर रहे हैं। वह भाजक बड़ा है। हालांकि आपको करना यह पड़ेगा कि आप देश में क्षेत्र, स्थान की पहचान करें और वहां जांच करें तथा उसे भाजक के रूप में (यानी कुल जनसंख्या से भाग देकर) देखें। जैसे कि बड़े शहर, प्रभावित क्षेत्र, जिला आदी।
उन्होंने कहा कि जांच न केवल पर्याप्त संख्या में होनी चाहिए बल्कि यह एकाग्रता और कुशलता के साथ होनी चाहिए। उस कदम के बाद भी लोग यह तर्क देंगे कि हमें और अधिक जांच करनी चाहिए। वास्तव में, जांच काफी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि देश में अब 150 से ज्यादा जांच स्थल हैं।
विशेषज्ञ लगातार जांच को बढ़ाने की बात कर रहे हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से हासिल किए गए आंकड़ों के अनुसार 14 अप्रैल तक कुल 2,44,893 जांच हुए हैं जो कि पिछले दिन (2,17,554) के मुकाबले 27,339 अधिक है।
वर्ल्डमीटर्स वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में अब तक 31,00,387 जांच हुई है जो कि प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 9,367 है। वहीं भारत में 2,44,893 जांच हुए हैं जो कि प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 177 व्यक्ति है। यह वेबसाइट कोरोना वायरस मामले और जांच के आंकड़े वैश्विक तौर पर जुटाती है। स्पेन और इटली में क्रमश: 6,00,000 और 10,73,689 जांच हुए हैं। यहां हजारों लोगों की मौत हुई है।