प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य के दृष्टिकोण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत ने अपने 4जी और 5जी दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया है तो उसने अपने वन क्षेत्र को भी समान स्तर पर बढ़ाया है। पीएम ने कहा, गरीब और विकासशील देश कुछ विकसित देशों की ‘गलत नीतियों’ की कीमत चुका रहे हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोमवार को एक कार्यक्रम में अपने वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक जलवायु की सुरक्षा के लिए यह महत्वपूर्ण है कि सभी देश स्वार्थी हितों से ऊपर उठकर सोचें। उन्होंने कहा, लंबे समय से बड़े और उन्नत देशों में विकास का मॉडल विरोधाभासी था। इससे उन्होंने विकास के लक्ष्य तो हासिल कर लिए, लेकिन दुनिया के पर्यावरण को उनके विकास की कीमत चुकानी पड़ी। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में दुनिया आज बात कर रही है। लेकिन भारत पिछले चार-पांच वर्षों से लगातार इस दिशा में काम कर रहा है।
भविष्य को ध्यान में रख उठाए कदम
भूजल संरक्षण का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रामसर योजना भविष्य में ईको टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनी रहेगी। पीएम मोदी ने कहा, एक तरफ हमने गरीबों को मदद मुहैया कराई है और दूसरी तरफ भविष्य की ईंधन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी बड़े कदम उठाए हैं। पीएम ने कहा, इस साल विश्व पर्यावरण दिवस का विषय सिंगल-यूज प्लास्टिक से छुटकारा पाना है।
आपत्ति जताने वाला कोई नहीं था...पीएम मोदी ने कहा कि दशकों तक विकसित देशों के इस रवैये पर आपत्ति करने वाला कोई नहीं था। उन्होंने कहा, मुझे खुशी है कि भारत ने इन सभी देशों के समक्ष जलवायु न्याय का सवाल उठाया है।
देश के प्रयासों की विदेश में भी हो रही चर्चा : भूपेंद्र
केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत के पर्यावरण संरक्षण के प्रयास देश में प्रभावी हैं और विदेशों में भी उनकी चर्चा हो रही है। भारत ने भविष्य की जरूरतों को वर्तमान की आवश्यकताओं के अनुरूप आकलित करके पर्यावरण संरक्षण योजनाओं को क्रियान्वित किया है। इसके चलते देश में वन्य जीवों का विस्तार हो रहा है। वन क्षेत्रफल में भी इजाफा हुआ है। सात दशकों के बाद चीतों की वापसी हुई है।