प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि देश में कुछ ताकतें राष्ट्रीय आत्मसम्मान से ऊपर तुष्टीकरण की राजनीति को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के विरोध के दौरान भी इसी तरह की मानसिकता देखी जाने का जिक्र किया।
गुजरात में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल और भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए अथक प्रयास किए थे, लेकिन उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विरोध का सामना करना पड़ा था।
विरासत को पुनर्स्थापित किया
उन्होंने कहा कि 11 मई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने इसी तारीख (1998 में) परमाणु परीक्षण किए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'विश्व भर में ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां विदेशी आक्रमणकारियों ने राष्ट्र की पहचान से जुड़े स्थलों को नष्ट कर दिया। जब भी लोगों को अवसर मिला उन्होंने अपनी विरासत को पुनर्स्थापित किया और अपनी गरिमा को बनाए रखा।'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'हमें विकास और विरासत दोनों को साथ-साथ अपनाकर आगे बढ़ना होगा। वास्तव में, हमारे सांस्कृतिक केंद्रों की उपेक्षा हमारी प्रगति में बाधा बनी हुई है।' इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ अमृत महोत्सव के तहत सोमनाथ मंदिर में महा पूजा और अन्य अनुष्ठान किए।