क्या भाजपा और जदयू के बीच फिर से एक मंच पर आने की सियासी गुंजाइश बाकी है? भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में इस सवाल पर चर्चाओं का बाजार गरम है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी समारोह मनाने के लिए बनाई कमेटियों में जदयू के दो दिग्गज नेताओं नीतीश कुमार और शरद यादव को शामिल किए जाने पर सबको चौंका दिया है। कमेटियों में इन दो नेताओं को शामिल किए जाने संबंधी सवाल पर पार्टी कन्नी काटती दिखी। हालांकि कई नेताओं ने कहा कि चूंकि मामला दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी समारोह मनाने में सभी दलों और वर्गों की भागीदारी और सहयोग सुनिश्चित किया गया है। ऐसे में इसमें ज्यादा कुछ नहीं ढूंढा जाना चाहिए।
दरअसल जदयू-भाजपा के बीच नजदीकी बढ़ने की संभावना नई सियासी परिस्थितियों ने पैदा की है। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई मुद्दों पर अपने सहयोगी राजद के रुख से असहज हैं। खासतौर से बाहुबलि नेता शहाबुद्दीन के जमानत के बाद राजद नेताओं की ओर से बढ़े हमले से वह खुश नहीं हैं। दूसरी ओर भाजपा देशभर में कांग्रेस मुक्त अभियान को और धार देना चाहती है। पार्टी देशभर में पार्टी के खिलाफ बढ़ रही विपक्षी दलों की एकजुटता से भी चिंतित है। कमेटी में नीतीश और शरद को शामिल किए जाने को इसलिए भी और अधिक चर्चा मिली कि नीतीश ने बिहार में सत्ता हासिल होने के बाद प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब में भाजपा के कांग्रेस मुक्त नारे के जवाब में आरएसएस मुक्त भारत का नारा दिया है। इसके बावजूद नीतीश को कमेटी में शामिल किए जाने की घोषणा ने नई चर्चा को जन्म दिया है। हालांकि समिति में पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, शरद पवार के अलावा पूण्य प्रसून वाजपेयी, बाबा रामदेव, सुभाष कश्यप जैसी हस्तियों को भी जगह दी गई है, मगर चर्चाओं का बाजार नीतीश को कमेटी में शामिल किए जाने पर गरम है।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिद्घार्थनाथ सिंह इस बारे में कहते हैं कि इसमें बहुत अधिक राजनीतिक निहितार्थ नहीं ढूंढा जाना चाहिए। सरकार ने एक महान व्यक्तित्व उपाध्याय की जन्म सदी समारोह मनाने का फैसला किया है। जाहिर है कि सरकार की मंशा इसमें सभी दलों की भागीदारी सुनिश्चित करने की है।