प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के बाद सोमवार देर रात भारत लौट आए हैं। इस दौरान फ्रांस का बियारेत्ज शहर ऐतिहासिक पलों का गवाह बना। यहां जी-7 सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता और बयान ने कूटनीति की नई ऊंचाई को छू लिया।
इस कूटनीतिक कामयाबी का सबसे अहम पक्ष यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य से बिना किसी किंतु-परंतु के सहमति जताई है। उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता को खारिज कर दिया और कश्मीर को दोनों देश (पाकिस्तान और भारत) का द्विपक्षीय मुद्दा बताया।
जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, शिक्षा, सुरक्षा, द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार सहित कई प्रमुख मुद्दों पर बात हुई। इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने एशेज सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड की जीत पर जॉनसन को बधाई भी दी।
जॉनसन से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, "ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ एक लंबी बैठक हुई। इस बैठक में व्यापार, रक्षा और इनोवेशन तथा अन्य मसलों पर चर्चा हुई। भारत और ब्रिटेन के संबंध हमारे नागरिकों को बहुत लाभ पहुंचाते हैं।"
वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी ट्वीट किया, "भारत के साथ ब्रिटेन के संबंधों को और मजबूत करने के लिए जी-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।"
सवाल भले ही हल्का लग रहा हो, लेकिन यह सभी को मुस्कराने पर मजबूर कर रहा है। चीन से लौटने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर से जब कश्मीर पर राष्ट्रपति ट्रंप की मध्यस्थता को लेकर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने हल्के अंदाज में मुस्कराते हुए कहा था कि आप लोग राष्ट्रपति ट्रंप को इतनी गंभीरता से लेते हैं? बियारेत्ज की यात्रा के बाद जहां अमेरिकी राष्ट्रपति का कद कश्मीर में मध्यस्थता को लेकर बहुत हल्का नजर आ रहा है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी सफल शिखर नेता की पहचान के तौर पर ट्रेंड कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी प्रधानमंत्री मोदी की काफी सराहना की जा रही थी।