फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी-बंगाल-ओडिशा केंद्रित रही मोदी की रैलियां, 140 में से 60 तीन राज्यों में 

Fri, 17 May 2019 03:32 AM IST
Avdhesh Kumar नई दिल्ली, ब्यूरो
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बीते लोकसभा चुनाव से पहले पीएम पद का उम्मीदवार बनने के बाद ताबड़तोड़ रैलियों से भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने वले पीएम नरेंद्र मोदी ने इस बार मुख्य रूप से तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, प. बंगाल और ओडिशा में अपना ध्यान केंद्रित किया। बुधवार तक पीएम की 140 जनसभाओं में से 60 जनसभाएं इन्हीं तीन राज्यों में हुई। बीते चुनाव से पहले पीएम पद का उम्मीदवार बनने वाले मोदी ने तब 15 सितंबर 2013 से 10 मई 2014 तक 437 रैलियों को संबोधित किया था। इस बार पीएम ने जनवरी महीने से बुधवार तक 240 रैलियां, दो रोड शो और एक ट्रेडर्स सम्मेलन को संबोधित किया।
विज्ञापन


बीते लोकसभा चुनाव में चुनाव प्रचार खत्म होने तक पीएम ने 437 रैलियों के जरिये पार्टी की प्रभाव वाली सभी सीटों पर रैलियां की थीं। उनकी रैली की शुरुआत सितंबर 2013 को हरियाणा के रेवाड़ी से शुरू होकर 10 मई 2014 को बलिया में खत्म हुई थी। तब पीएम ने सिर्फ यूपी में 79 रैलियां की थीं। इसके अलावा चाय पर चर्चा, थ्री डी रैलियां जैसे मोदी केंद्रित 5827 कार्यक्रम हुए थे और इस दौरान पीएम ने तीन लाख किलोमीटर की यात्रा की थी।

तीन राज्य केंद्रित क्यों

उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा की 143 सीटें पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यूपी में जहां बेहतर प्रदर्शन के बिना दिल्ली का द्वार नहीं खुलेगा। वहीं पश्चिम बंगाल और ओडिशा की कुल 63 में से पार्टी के पास महज 3 सीटें हैं। यही कारण है कि पीएम ने यूपी में 35, प. बंगाल में 17 और ओडिशा में 8 रैलियों को संबोधित किया।
विज्ञापन

 
जनवरी में ही संभाल लिया प्रचार का मोर्चा दिसंबर में पांच राज्यों के नतीजे आने और इसमें तीन स्वशासित राज्य गंवाने के बाद से ही पीएम ने प्रचार की कमान संभाली थी। जनवरी महीने से 10 मार्च को अधिसूचना जारी होने तक पीएम ने 100 रैलियां की थीं। पार्टी ने प्रचार खत्म होने तक 250 रैलियां कराने की रूपरेखा तभी तैयार कर ली थी।

वाराणसी में डेरा डालने की उम्मीद कमः बीते चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी ने वाराणसी में चुनाव प्रचार के अंत में डेरा डाला था। इस बार ऐसा होने की उम्मीद कम है। पार्टी यहां जीत के प्रति पूर्ण आत्मविश्वास की धारणा बनाना चाहती है। 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें