प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने सोमवार को इंडोनेशिया के बाली में आयोजित 5वें विश्व पुनर्निर्माण सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में वर्चुअली बोलते हुए लगभग दो दशक पहले हिंद महासागर में आई सुनामी और कई अन्य बड़ी आपदाओं के कहर को याद किया। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद ठीक होने की प्रथा ने एक लंबा सफर तय किया है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने पांच मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया, जो आपदा के बाद के पुनर्निर्माण के अभ्यास को रेखांकित करती है। पीके मिश्रा ने कहा कि बेहतर इनपुट से पहले बेहतर निर्माण और बेहतर परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
आपदा के बाद सामुदायिक स्तर पर रिकवरी की कोशिश करने की जरूरत
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने कहा कि हमें आपदा के बाद सामुदायिक स्तर पर रिकवरी की कोशिश करने की जरूरत है। इसके लिए हमें घरेलू स्तर पर रिकवरी से परे जाने की जरूरत है। कोविड-19 महामारी से रिकवरी के लिए हमारे दृष्टिकोण में एक नया आयाम जुड़ा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर हमें आजीविका, गरीबी और असमानता पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। यूएनडीपी, विश्व बैंक, आपदा जोखिम कम करने के लिए वैश्विक मंच और इंडोनेशिया सरकार द्वारा संयुक्त रूप से बाली में 5वें विश्व पुनर्निर्माण सम्मेलन का आयोजन किया गया है।
भारत ने बनाई विशिष्ट विंडो
उन्होंने यह भी बताया कि भारत में पहली बार देश के आपदा जोखिम प्रबंधन वित्तपोषण आर्किटेक्चर में पुनर्निर्माण और आपदा से उबरने हेतु कार्यों के वित्तपोषण के लिए एक विशिष्ट विंडो बनाई है, जिसमें पांच वर्षों में 7.5 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। मिश्रा ने कहा कि आपदा के बाद के पुनर्निर्माण और रिकवरी के लिए न केवल अल्पावधि पर बल्कि लंबी अवधि के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।