देश में आर्थिक उदारीकरण के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) राज्यसभा के बाद लोकसभा से भी मंजूर हो गया। सोमवार को राज्यसभा के बाद लोकसभा में भी जीएसटी संशोधनों को हरी झंडी मिल गई।
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इस तरह पूरे देश में एक अप्रत्यक्ष कर लागू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे टैक्स टेररिज्म से छुटकारा दिलाने वाला करार दिया और कहा कि इस व्यवस्था का सबसे बड़ा मंत्र है कंज्यूमर इज किंग।
सोमवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए लाए गए संविधान के 122वें संशोधन बिल ने संसद की दहलीज पार कर ली है। लोकसभा में मौजूद सभी 443 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया।
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अन्नाद्रमुक ने राज्यसभा की तरह ही लोकसभा में भी वोटिंग के दौरान वाकआउट किया। राज्यसभा में संविधान संशोधन बिल को बीते हफ्ते मिली मंजूरी के बाद लोकसभा ने उच्च सदन से इस बिल के संबंध में लाए गए संशोधनों पर अपनी दो तिहाई बहुमत से सहमति दे दी।
इसके साथ ही एक देश एक कर की परिकल्पना को मजबूत आधार मिल गया है। अब जीएसटी को लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल पर 16 राज्यों के विधानसभाओं की मंजूरी हासिल करनी होगी। इसके बाद इससे संबंधित तीन बिल सेंट्रल जीएसटी, स्टेट जीएसटी और एकीकृत जीएसटी बिल को कानून का रूप देना होगा।
चुनौती, अगले साल एक अप्रैल से जीएसटी बिज लागू कर पाएगी सरकार?
Narendra Modi
कुल मिला कर अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपने वादे के मुताबिक एक देश एक कर का कानून अगले साल एक अप्रैल से लागू कर पाएगी या नहीं।
राज्यसभा की तरह ही लोकसभा में भी उच्च सदन से आए संशोधनों पर करीब 6 घंटे की मैराथन बहस हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जीएसटी से कच्चे बिल की जगह पक्का बिल बनेगा, जिससे काले धन पर अंकुश लगेगा।
पीएम मोदी ने जीएसटी को बदलाव की दिशा में महान कदम-ग्रेट स्टेप्स टुवर्ड्स ट्रांसफॉरमेशन और टीम इंडिया की जीत करार दिया। इस दौरान पीएम ने उत्पादक राज्यों के लिए मुआवजे का प्रावधान होने की भी बात कही।
इससे पहले बिल पेश करते हुए वित्त मंत्री ने इसे देशहित में बताया और कहा कि इससे एकीकृत बाजार का रास्ता साफ होने से व्यापार करना आसान होगा।
कांग्रेस की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए वीरप्पा मोइली ने याद दिलाया कि जीएसटी की नींव पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने रखी थी। मोइली ने जीएसटी दर को कम रखने, जीएसटी दर को संवैधानिक बनाने के साथ ही सरकार को भविष्य में आने वाले सीजीएसटी, एसजीएसटी, आईजीएसटी को वित्त बिल की तरह पेश करने की मांग की।
हालांकि वित्त मंत्री ने राज्यसभा की तरह लोकसभा में भी आश्वासन दिया कि इस पर संवैधानिक परंपराओं के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा दर जीएसटी काउंसिल तय करेगी।
चर्चा का जवाब देते हुए जेटली ने बताया कि इससे संबंधित 2011 के कानून में कई अस्पष्टता थी, जिसे राज्यसभा में संशोधनों के जरिए दूर किया गया। उन्होंने कहा कि पुराने कानून में सर्वसम्मति की अवधारणा स्पष्ट नहीं थी।
चर्चा में शिरकत करते हुए कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे माकपा के मोहम्मद सलीम, बीजेडी के भर्तृहरि महताब ने बिल में राज्यों के हितों को ध्यान में रखने पर जोर दिया। जबकि अन्नाद्रमुक ने बिल के कानून बनने के बाद तमिलनाडु जैसे उत्पादक राज्यों को राजस्व घाटा होने की बात कही।
पीएम मोदी ने जीएसटी संशोधन बिल पर बहस के दौरान टैक्स टेररिज्म से मुक्ति की दिशा में अहम कदम करार दिया। उन्होंने कि इसमें कंज्यूमर किंग होगा। गरीब के इस्तेमाल की सभी चीजें इससे बाहर रहेंगी।
मोदी ने जीएसटी बिल पर कहा- जन्म कोई और देता है, पालता कोई और है। उनका इशारा यूपीए सरकार की ओर से लाए गए जीएसटी बिल की ओर था। हमारी संसद के दोनों सदनों के सांसद मिलकर एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं।
मैं सभी राजनीतिक दलों का धन्यवाद करने के लिए खड़ा हूं। यह किसी किसी दल या किसी सरकार की विजय नहीं है। ये भारत की परंपराओं की विजय है। ये सभी पॉलिटिकल पार्टियों की विजय है। मेरा मानना है कि जीएसटी का मतलब ग्रेट स्टेप टुवर्ड्स ट्रांसफॉरमेशन।
जीएसटी से सबको फायदा: जेटली
लोकसभा में जीएसटी बिल पेश करते हुए जेटली ने कहा कि इससे सबको फायदा होगा। केंद्र ने जीएसटी पर राज्यों की ज्यादातर चिंताओं को दूर कर दिया है। कांग्रेस की ओर से टैक्स सीमा निर्धारित करने की मांग पर आश्वासन देते हुए जेटली ने कहा कि टैक्स रेट जीएसटी काउंसिल तय करेगी।
पीएम की तरह जेटली ने भी सभी दलों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि मजबूत लोकतंत्र के कारण ही इस बिल पर केंद्र और राज्यों की सहमति संभव हुई है। इससे सभी को फायदा होगा, कई तरह के टैक्स से छुटकारा मिलेगा।
हम मदद को हमेशा तैयार थे : खड़गे
नई दिल्ली। जीएसटी के संसद की दहलीज पार करने के साथ ही कांग्रेस पार्टी ने भी बिल की राह में रोड़ा अड़ाने के लग रहे सियासी आरोपों को धोने का प्रयास किया। लोकसभा में चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जीएसटी बिल की जन्मदाता कांग्रेस पार्टी है।
बिल में देरी के लिए मोदी सरकार के रवैये को जिम्मेदार ठहराते हुए खड़गे ने कहा कि यदि दो साल पहले ही हमारी बातों को सरकार मान लेती तो जीएसटी पहले पारित हो जाता। हम तो इसे समर्थन देने के लिए हमेशा तैयार थे।
लोकसभा में जीएसटी संशोधनों को मंजूरी के बाद इन्हें कम से कम 16 राज्यों के विधानसभाओं की ओर से पारित कराना होगा। इसके बाद इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बिल लागू होने के 60 दिनों के भीतर एक जीएसटी काउंसिल का गठन करना होगा, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों के प्रतिनिधि होंगे।
काउंसिल ही वस्तुओं और सेवाओं के लिए कर दरों के दायरा समेत टैक्स दरें तय करेगी। जीएसटी बिल लागू होते ही केंद्रीय जीएसटी और इंटिग्रेटेड जीएसटी से जुड़े कानून भी संसद को पास करने होंगे। साथ ही 29 राज्यों की ओर से अलग-अलग जीएसटी कानूनों को मंजूरी देनी होगी।