प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब पूरी दुनिया एक 'नई व्यवस्था' की तलाश कर रही है, तब कुछ लोग भारत में 'अव्यवस्था' का सपना देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत की छवि खराब करने पर तुले हुए हैं। वे विदेश जाते हैं, भारत को बदनाम करते हैं और दूसरे देशों के लोगों से भारत के मामलों में दखल देने की अपील करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर हमला करते हुए क्या कहा?
एक समाचार चैनल के समिट में पीएम मोदी ने कहा कि अपने 'फेल प्रोडक्ट' को लॉन्च करने की कोशिश में कांग्रेस देश को कितने समय तक दांव पर लगाए रखेगी, यह कोई नहीं जानता। उन्होंने कहा कि श्रीहरिकोटा से एक साल में उतने रॉकेट लॉन्च नहीं होते, जितनी बार कांग्रेस एक साल में अपने नेता को लॉन्च करने की नाकाम कोशिश करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का यह परिवार अब अपनी ही पार्टी पर बोझ बन गया है।
देश की अर्थव्यवस्था पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया के हालात मुश्किल हैं। ऐसे में भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।
कोरोना काल को लेकर क्या बोले पीएम मोदी?
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया ने भारत की भूमिका देखी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत की भूमिका के बारे में विस्तार से बताने से पहले, मैं आपको सात से आठ साल पहले के दौर में ले जाना चाहता हूं। हम सभी ने देखा कि कोविड-19 महामारी के दौरान क्या हुआ था।
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उन्होंने कहा, जब दुनिया को सबसे ज्यादा सहयोग की जरूरत थी, तब वह गहराई से बंटी हुई दिखाई दी। वैश्वीकरण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले देशों ने संकट के समय अपने हितों को प्राथमिकता दी। उस दौर में दुनिया बंटी हुई थी। हर कोई एक-दूसरे को शक की नजर से देख रहा था। वैश्विक स्तर पर भरोसा सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था।
नई विश्व व्यवस्था को लेकर क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा, इसी समय वर्ष 2020 में मैंने जी-20 के मंच पर एक विचार रखा था। मैंने 'मानवता के सामूहिक कल्याण के लिए एक नई विश्व व्यवस्था' बनाने का आह्वान किया था। मैंने ऐसी व्यवस्था की बात कही थी, जिसमें मानवता को केंद्र में रखा जाए। उसी साल संयुक्त राष्ट्र महासभा में मैंने कहा था कि अगर सदी बदल जाती है, लेकिन हम नहीं बदलते, तो बदलाव लाने की हमारी क्षमता भी कमजोर हो जाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा, आज सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दुनिया की व्यवस्था बदल रही है या नहीं। सवाल यह भी है कि पुरानी व्यवस्था की जगह नई व्यवस्था लेते समय हम मिलकर कैसी नई विश्व व्यवस्था बनाना चाहते हैं। बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार जरूरी हैं। वैश्विक दक्षिण को उसका उचित स्थान और आवाज मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग सिर्फ अच्छे समय तक सीमित नहीं रहना चाहिए। संकट के समय भी यह प्रभावी बना रहना चाहिए।