'जेएनपीटी मुंबई से डबल कंटेनर मालगाड़ी को चलाया गया। इसके चलने से एक बार में 250 ट्रकों के ज्यादा सामान मुंबई से वडोदरा पहुंच गया। अब ये नाराज फूफाजी चिल्लाएंगे कि इन ट्रक वालों का क्या होगा। लेकिन अब सामान देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा। अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है, जहां पहले नहीं पहुंची।' यह बातें पीएम मोदी ने गुजरात के वडोदरा में कही है।
पीएम मोदी ने नाराज फूफा किसे कहा?
इससे पहले भी उन्होंने नाराज फूफा कहकर विपक्ष को घेरा था। दरअसल, पांच सितंबर को दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने उन लोगों पर निशाना साधा था, जो हर नए काम पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को ‘नाराज फूफा’ बताया था। एक बार फिर से पीएम मोदी ने इसी अंदाज में विपक्ष पर तंज कसा।
पहले उन्होंने कहा था कि कुछ लोग कोई भी काम शुरू होते ही ‘नाराज फूफा’ बन जाते हैं। उनका पसंदीदा काम हर चीज का विरोध करना है और उनका एक ही सवाल होता है-‘इसकी क्या जरूरत है?’ पीएम मोदी ने स्टैच्यू, हाई-स्पीड ट्रेन, यूपीआई, संसद की नई इमारत और सैनिक स्मारक जैसे कामों का उदाहरण भी दिया था। उन्होंने कहा था कि देश के लिए जो जरूरी है, उसे करने से भारत को कोई नहीं रोक सकता।
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‘झूठ की गूंज’ से राहुल गांधी पर निशाना?
पीएम मोदी 'नाराज फूफा' तक ही नहीं रुके। उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी के कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' पर भी निशाना साधा है। पीएम मोदी ने कहा कि 'झूठ की गूंज' से भरमाने वाले हर चौराहे पर मिल जाएंगे लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है। सच की हुंकार के साथ चलता है। सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी ये देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर पर सरकार कितना फोकस से काम कर रही है।
पीएम मोदी ने फ्रेट कॉरिडोर को भारत की जीवनरेखा क्यों बताया?
पीएम मोदी ने आगे कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित होते भारत की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि इससे देश के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प हुआ है। पहले यात्री ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। इससे यात्री और माल, दोनों की आवाजाही धीमी रहती थी। मोदी ने कहा कि फ्रेट कॉरिडोर ने इस व्यवस्था को बदल दिया है।