गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट प्लांट के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां काम कर रहे कर्मचारियों और इंजीनियरों से मुलाकात की। उन्होंने उनका उत्साह बढ़ाया। इस मुलाकात का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
गुजरात के साणंद में भारत के तकनीकी भविष्य ने एक ऐतिहासिक उड़ान भरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां सीजी सेमी के अत्याधुनिक प्लांट का उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम का अंदाज बिल्कुल अलग दिखा। उन्होंने प्लांट के अंदर जाकर वहां काम करने वाले इंजीनियरों और तकनीशियनों से सीधे संवाद किया। उनकी पीठ थपथपाई और उनका हौसला बढ़ाया।
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पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने वहां मौजूद युवाओं से कहा कि आपका आत्मविश्वास ही भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनाएगा। वहां मौजूद हर कर्मचारी की आंखों में एक अलग चमक थी। वे समझ रहे थे कि वे सिर्फ चिप नहीं बना रहे, बल्कि भारत को एक नई तकनीकी महाशक्ति बनाने की नींव रख रहे हैं। कर्मचारियों ने भी पीएम के साथ अपना अनुभव साझा किया।
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झारखंड की रहने वाली पूनम ने कहा कि आईटीआई की पढ़ाई के दौरान लोगों ने मजाक बनाया लेकिन अब सभी कह रहे हैं कि कुछ अच्छा कर रही हूं। वहीं, प्रियंका अग्रवाल ने कहा कि मुझे ट्रेनिंग के लिए थाईलैंड भेजा गया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आपलोगों ने गुजरात में क्या देखा। एक-एक कर पीएम मोदी ने सभी कर्मचारियों से संवाद किया।
किन देशों ने दिया भारत का साथ?
यह प्लांट कोई सामान्य फैक्ट्री नहीं है। इसके निर्माण में करीब 7,600 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। यह भारत का तीसरा ऐसा सेमीकंडक्टर प्लांट है, जहां कमर्शियल स्तर पर चिप पैकेजिंग का काम शुरू हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें भारत के साथ-साथ जापान और थाईलैंड की तकनीकी साझेदारी भी शामिल है। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक नायाब उदाहरण है। पीएम मोदी ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक उद्योग नहीं है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता का एक नया अध्याय है जो हमें दुनिया के साथ बराबरी पर खड़ा करेगा।
चिप की दुनिया में भारत का मिशन क्या?
उत्पादन की बात करें तो आंकड़े चौंकाने वाले और महत्वाकांक्षी हैं। अभी शुरुआती चरण में यहां हर साल 20 करोड़ सेमीकंडक्टर चिप्स बनाई जाएंगी। लेकिन सरकार का लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है। आने वाले समय में इसे बढ़ाकर हर साल 500 करोड़ चिप्स तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से यहां काम हो रहा है, यह टारगेट समय से पहले ही हासिल कर लिया जाएगा। यह पूरी दुनिया की चिप आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति को इतना मजबूत कर देगा कि वैश्विक कंपनियां भी भारत की ओर रुख करेंगी। अब चिप की दुनिया में भारत 'कंज्यूमर' नहीं, बल्कि 'क्रिएटर' बनने की राह पर है।