हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागीरी के बीच न्यूजीलैंड ने भारत से इस क्षेत्र में अपनी निर्णायक भूमिका निभाने का आह्वान किया है। सोमवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 10वें रायसीना डायलॉग का उद्घाटन करते हुए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ताकतवर ही सही है, यह दृष्टिकोण स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया और कहा कि भारत जैसे देश वैश्विक स्तर पर केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
मुख्य अतिथि के तौर पर रायसीना डायलॉग में अपने संबोधन में लक्सन ने कहा कि सुरक्षा के बिना समृद्धि नहीं आ सकती। हिंद-प्रशांत क्षेत्र दुनिया का सबसे आर्थिक रूप से गतिशील क्षेत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि यह आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास का दो-तिहाई हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र के हर देश के लिए बड़े अवसर प्रदान करता है। भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी निर्णायक भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि न्यूजीलैंड इस क्षेत्र में अपने रणनीतिक हितों के लिए भारत जैसे भागीदारों की ओर देख रहा है।
भारतीय लोकतंत्र-चुनावी प्रक्रिया को सराहा
हमारा विश्वास विस्तारवाद में नहीं : मोदी
इससे पहले, अपने उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत विकासवाद की नीति में यकीन करता है, विस्तारवाद में नहीं। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री लक्सन का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि हम हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओई) से जुड़ने के लिए न्यूजीलैंड का स्वागत करते हैं। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के बाद कॉलिशन फॉर डिसास्टर रीसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) से जुड़ने के लिए भी न्यूजीलैंड का स्वागत है। इस मौके पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है और वैश्विक व्यवस्था की प्रकृति पर बहस हो रही है। हम पुरानी मान्यताओं पर भरोसा नहीं कर सकते। हमें नए विचारों की जरूरत है और रायसीना डायलॉग ने हमें वह मंच प्रदान किया है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को भारत के बारे में काफी जानकारी: जयशंकर
रायसीना डायलॉग में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि मैं मुख्य अतिथि न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का आभार व्यक्त करता हूं। उन्हें न केवल भारत के बारे में काफी जानकारी है, बल्कि हमारे संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी प्रतिबद्धता भी है। ऐसे समय में जब दुनिया वैश्विक व्यवस्था की प्रकृति पर बहस कर रही है तो इंडो-पैसिफिक पर उनका दृष्टिकोण मूल्यवान है। मैं प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण और प्रेरणा के लिए अपनी गहरी प्रशंसा दोहराता हूं, जिसने रायसीना डायलॉग को आगे बढ़ाया है। वैश्विक व्यवस्था एक बड़े बदलाव से गुजर रही है। इसके लिए नेतृत्व की आवश्यकता है, जैसा कि आज हमारे पास है। इसके लिए अलग तरीके से सोचने वाली प्रणालियों, ईमानदार बातचीत, नए विचारों और रचनात्मक समाधानों की आवश्यकता है। इसलिए आइए संवाद शुरू करें।
यह भी पढ़ें- 'एआई ताकतवर, पर इंसानी कल्पनाशीलता की जगह नहीं ले सकता', भारत की भूमिका पर भी बोले पीएम मोदी
पोलैंड के विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टोस्जेव्स्की ने कहा कि वह रायसीना डायलॉग में तीसरी बार शामिल हो रहे हैं। यह एक शानदार सम्मेलन है। यह एक एशियाई सम्मेलन नहीं है बल्कि यह वैश्विक सम्मेलन है। आप यहां ऑस्ट्रेलिया से लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और एशिया तक के लोगों से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि इस बार अमेरिका में नए राष्ट्रपति, यूक्रेन में लगातार रूसी आक्रामकता, एक नए व्यापार-युद्ध आदि विषयों पर चर्चा होगी। भारत-पोलैंड संबंधों पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही की पोलैंड को ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। हम सुरक्षा सहयोग के बारे में बात कर रहे हैं, हम सैन्य सहयोग के बारे में बात कर रहे हैं, हम व्यापार, आईटी में निवेश, खाद्य उत्पादन के बारे में बात कर रहे हैं। भारत एक अच्छा साझेदार है और हम 1947 की शुरुआत से ही साथ हैं। यह यात्रा ऐतिहासिक थी और 45 वर्षों में पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री आए थे। यह एक सफलता थी और हम इसे आगे बढ़ाने जा रहे हैं।
19 मार्च तक चलेगा सम्मेलन
17-19 मार्च तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 125 से अधिक देशों के 3,500 से ज्यादा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसमं विदेश मंत्री, रक्षा विशेषज्ञ और प्रमुख नीति निर्माता शामिल हैं। इस बार के सम्मेलन की थीम कालचक्र-पीपुल, पीस एंड प्लैनेट रखी गई है, जो समाज, स्थान और पृथ्वी के बीच संबंधों को दर्शाती है। सम्मेलन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी विकास, भारत की वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक प्राथमिकताएं इत्यादि विषय पर चर्चा होगी।
रायसीना डायलॉग भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत का प्रमुख सम्मेलन है जिसमें 125 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन, अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड और यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा इस सम्मेलन के 10वें संस्करण में भाग लेने वालों में शामिल हैं।