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पीएम मोदी ने फिर चौंकाया, अचानक पहुंचे लेह, पहले रक्षामंत्री करने वाले थे दौरा

Fri, 03 Jul 2020 12:35 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लेह
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लेह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह अचानक ही लेह पहुंच गए। 11 हजार फीट की ऊंचाई पर वह भारतीय जवानों का मनोबल बढ़ा रहे हैं। चीन के साथ तनातनी के बीच पीएम के इस सीक्रेट दौरे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख नरवणे भी साथ हैं। लेह के निमू फॉरवर्ड फ्रंट पर मोदी की मौजूदगी यह संकेत देती है कि इन विकट हालातों में भी भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं है।

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चालबाल चीन को कड़ा संदेश
निमू, लेह-लद्दाख के कठिन इलाकों में से एक है, जो जांस्कर रेंज से घिरा हुआ है और सिंधु के तट पर है। ऐसी जगह पर अचानक पहुंच जाना और सैनिकों के पीछे खड़े हो जाना, न सिर्फ भारतीय जवानों के मनोबल को बढ़ाएगा बल्कि चालबाल चीन को भी सोचने पर मजबूर करेगा। गलवां झड़प के 18 दिन बाद हुए इस दौरे के दौरान पीएम ने आर्मी, एयरफोर्स और आईटीबीपी के जवानों से मुलाकात की। इस दौरान वे मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती सैनिकों से भी मिले।

पीएम मोदी ने फिर चौंकाया
इससे पहले गुरुवार तक यही सूचना थी कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लद्दाख का दौरा करेंगे। वह आज सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के साथ लद्दाख जाने वाले थे, उन्हें चीनी सेना के साथ सीमा पर गतिरोध के मद्देनजर भारत की सैन्य तैयारियों का जायजा लेना था, लेकिन उनका दौरा अचानक गुरुवार रात स्थगित हो गया और सुबह खबर आई कि पीएम मोदी सैनिकों का मनोबल बढ़ाने लद्दाख पहुंच गए।
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रक्षा मंत्री का होता पहला दौरा
अगर रक्षा मंत्री आज लद्दाख जाते तो भारत-चीन की सेनाओं के बीच गतिरोध के दौरान उनका पहला लद्दाख दौरा होता। बता दें कि सेना प्रमुख नरवणे कुछ दिन पहले ही लद्दाख दौरे से लौटे हैं। 
इससे पहले सेना प्रमुख ने 23 और 24 जून को लद्दाख का दौरा किया था। जनरल नरवणे ने जवानों को सम्मानित करते हुए उनका हौसला बढ़ाया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली आकर रक्षा मंत्री को हालात की जानकारी दी थी।

15 जून को गलवां में हुआ था खूनी संघर्ष
भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख के गलवां घाटी में 15 जून की रात खूनी झड़प हुई थी। पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 के पास हुए इस संघर्ष में कमांडिंग अफसर संतोष बाबू समेत भारतीय सेना के कई जवान शहीद हुए थे। चीनी सेना की ओर से कंटीली तार लगे डंडे, लोहे के खतरनाक औजारों से भारतीय जवानों पर बर्बरता की गई थी। जवाब में हमारे जांबाजों ने भी बड़ी मात्रा में चीनी सेना को नुकसान पहुंचाया था।

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