प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 अप्रैल से कर्नाटक के चुनावी रण में कूदने जा रहे हैं। वे 27 अप्रैल को वर्चुअल तरीके से कर्नाटक के बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। इसके बाद 28 अप्रैल से उनकी जनसभाओं और रोड शो का दौर शुरू होगा, जो सात मई तक चलेगा। इस दौरान वे लगभग 16 जनसभाएं-रोडशो को आयोजित कर भाजपा के पक्ष में चुनावी हवा को बदलने की कोशिश करेंगे।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक राज्य इकाई की ओर से प्रधानमंत्री मोदी की 32 रैलियों की मांग की गई थी। लेकिन प्रधानमंत्री की अन्य व्यवस्तताओं को देखते हुए अभी तक 16 जनसभाओं-रोड शो की अनुमति दी गई है। ये सभाएं 28-29 अप्रैल, तीन मई, चार मई, छह मई और सात मई को आयोजित की जाएंगी। ये सभाएं पार्टी के द्वारा उतारे गए नए उम्मीदवारों और लिंगायतों की बहुमत आबादी वाले इलाकों के साथ-साथ पूरे कर्नाटक में होंगी।
कर्नाटक में भाजपा को लिंगायत नेताओं की नाराजगी के कारण नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। सत्ता में रहने के कारण एंटी इन्कमबेंसी फैक्टर को भी भाजपा के विरुद्ध बताया जा रहा है। लेकिन भाजपा नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जमीन पर उतरने के बाद पूरी चुनावी हवा भाजपा के पक्ष में हो जाएगी। पार्टी को उम्मीद है कि वह कर्नाटक में दोबारा सत्ता में आने में कामयाब रहेगी।