प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात की। यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में हाल के सुधार के बीच हुई है। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आए हैं। गलवान घाटी में 2020 के सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव पैदा हो गया था। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और चीन के बीच संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। गलवान के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने और रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशें लगातार जारी रही हैं। ऐसे में मोदी और शी की मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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ब्रिक्स ने अपनाया नई दिल्ली घोषणापत्र
इससे पहले ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को स्वीकार किया। इसमें पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव पर गहरी चिंता जताई गई। ब्रिक्स देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे स्थिति और खराब हो सकती है। घोषणापत्र में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया गया। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही गई। ब्रिक्स देशों ने पश्चिम एशिया में लंबे समय तक शांति और स्थिरता के लिए बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने की अपील की। साथ ही वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने की जरूरत बताई गई।
परमाणु ठिकानों पर हमलों को लेकर चिंता
ब्रिक्स देशों ने नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी वाले शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों पर जानबूझकर किए जाने वाले हमलों पर भी गंभीर चिंता जताई। घोषणापत्र में कहा गया कि युद्ध की स्थिति में भी परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और निगरानी के नियमों का पालन होना चाहिए, ताकि लोगों और पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।
गाजा में युद्धविराम और मानवीय मदद की अपील
ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करने की अपील की। साथ ही गाजा में युद्धविराम बनाए रखने और वहां मानवीय सहायता की पूरी और बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करने की बात कही। घोषणापत्र में दुनिया में बढ़ते ध्रुवीकरण और देशों के बीच अविश्वास पर भी चिंता जताई गई। ब्रिक्स ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
ग्लोबल साउथ को ‘नियम बनाने वाला’ बनाने की मोदी की अपील
ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने 10 प्रस्ताव रखने की बात कही, जिन्हें ब्रिक्स देश अगले शिखर सम्मेलन तक मिलकर विकसित कर ‘ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप’ का रूप दे सकते हैं। मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल दूसरे देशों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि ‘नियम बनाने वाला’ बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ के देश दुनिया के सामने मौजूद कई संकटों के सबसे आगे हैं, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अभी भी सीमित है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई।
पश्चिम एशिया पर शी जिनपिंग ने क्या कहा?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ब्रिक्स देशों से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच शांति स्थापित करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि चीन ब्रिक्स के अन्य देशों के साथ मिलकर इस दिशा में काम करेगा। शी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बातचीत और सहयोग के जरिए क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने पर जोर दिया।
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परमाणु खतरे पर भी ब्रिक्स की चिंता
ब्रिक्स घोषणापत्र में दुनिया में बढ़ते परमाणु खतरे और संघर्ष की आशंका पर भी चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत दोहराई। कुल मिलाकर, मोदी-शी मुलाकात और ब्रिक्स का नई दिल्ली घोषणापत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत-चीन संबंधों में लंबे तनाव के बाद सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं और पश्चिम एशिया का संघर्ष वैश्विक चिंता का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।