भारत-ऑस्ट्रिया रिश्ते
- फोटो : AMAR UJALA
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना दो दिवसीय रूस दौरा खत्म कर अब ऑस्ट्रिया में हैं। अपनी इस यात्रा में पीएम मोदी ने 9 और 10 जुलाई को ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह ऑस्ट्रिया की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली यात्रा है। वहीं चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की भी पहली ऑस्ट्रिया यात्रा है। इस दौरे से पहले पीएम मोदी ने कहा कि ऑस्ट्रिया हमारा दृढ़ और विश्वसनीय साझेदार है और दोनों देश लोकतंत्र और बहुलवाद के आदर्शों को साझा करते हैं।
आइये जानते हैं कि पीएम मोदी की ऑस्ट्रिया यात्रा का कार्यक्रम क्या है? इस दौरे के एजेंडे में क्या-क्या है? इस दौरे में भारत और ऑस्ट्रिया के बीच किन मुद्दों पर बात होगी?
भारत-ऑस्ट्रिया रिश्ते
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पीएम मोदी की ऑस्ट्रिया यात्रा का कार्यक्रम क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रिया के आधिकारिक दौरे पर हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा उस वक्त हुई है जब भारत और आस्ट्रिया अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। 1949 में ऑस्ट्रिया गणराज्य और भारत ने राजनयिक संबंध स्थापित किए थे।
पीएम मोदी मंगलवार को मॉस्को की दो दिवसीय यात्रा के बाद वियना पहुंचे। ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री अलेक्जेंडर शेलेनबर्ग ने वियना हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी और चांसलर कार्ल नेहमर के बीच अनौपचारिक रात्रिभोज हुआ, जिसमें दोनों विदेश मंत्री शेलेनबर्ग और एस. जयशंकर भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ ऑस्ट्रिया की यात्रा पर हैं, जिसमें विदेश मंत्री जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कई व्यापारिक प्रतिनिधि शामिल हैं। अपनी पहली ऑस्ट्रियाई यात्रा के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वान डेर बेलन से मुलाकात की और ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर के साथ वार्ता की।
दूसरे दिन दोनों शासनाध्यक्षों के बीच एक कार्य बैठक हुई, जिसके बाद एक साझा प्रेस वक्तव्य जारी किया गया। संयुक्त बयान के दौरान पीएम ने कहा, 'मैंने पहले भी कहा है, यह युद्ध का समय नहीं है, हम युद्ध के मैदान में समस्याओं का समाधान नहीं खोज पाएंगे। चाहे वह कहीं भी हो, निर्दोष लोगों की हत्या अस्वीकार्य है। भारत और ऑस्ट्रिया संवाद और कूटनीति पर जोर देते हैं, और इसके लिए हम साथ मिलकर कोई भी मदद देने के लिए तैयार हैं।'
बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर नेहमर का भारत और ऑस्ट्रिया के व्यापारिक नेताओं को संबोधन का कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री ने मॉस्को के बाद वियना में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत करेंगे।
भारत-ऑस्ट्रिया रिश्ते
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चर्चा के लिए कौन-कौन से मुद्दे हैं?
भारतीय प्रधानमंत्री रूसी की राजधानी में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता करके वियना आए हैं। भारत और रूस की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। दोनों देश ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, आदि) के साथ-साथ शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अहम सदस्य हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम और रूस और चीन के बीच आर्थिक संघर्षों में, भारत आमतौर पर बराबर दूरी की स्थिति में रहता है।
दौरे से पहले ऑस्ट्रियाई मीडिया ने लिखा था कि पुतिन के साथ नरेंद्र मोदी के अच्छे संबंधों को देखते हुए चांसलर रूस-यूक्रेन युद्ध के संबंध में मंगलवार शाम को आयोजित रात्रिभोज में दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए साझा जिम्मेदारी के बारे में बात करना चाहते हैं। ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि रात्रिभोज में रूस-यूक्रेन युद्ध, हिंद-प्रशांत में घटनाक्रम, मध्य पूर्व की स्थिति और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के विस्तार पर चर्चा होने की संभावना है।
चांसलर नेहमर का मानना है कि ब्रिक्स देशों से समान स्तर पर बात करना महत्वपूर्ण है। वे रूस-यूक्रेन युद्ध में विशेष भूमिका निभाते हैं। चांसलर ने कहा, 'पुतिन उनकी बात सुनते हैं। अमेरिका एक सैन्य और आर्थिक महाशक्ति है और युद्ध या शांति की बात करें तो ये हमेशा एक अहम कड़ी है। लेकिन ब्रिक्स देश भी महत्वपूर्ण भागीदार हैं। और मैं भारत पर बहुत अधिक निर्भर करता हूं।'
नेहमर भारत के साथ आर्थिक संबंधों को भी मजबूत करना चाहते हैं। ऑस्ट्रियाई दृष्टिकोण से यह यात्रा का दूसरा फोकस है।
नरेंद्र मोदी और कार्ल नेहमर
- फोटो : एएनआई
पीएम मोदी का दौरा कितना अहम?
दोनों देश विशेष रूप से व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने को प्राथमिकता के रूप में देखते हैं। दौरे के बारे में विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि इस यात्रा से हमें अपनी साझेदारी का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों को सुलझाने में भी मदद मिलेगी।
विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि ऑस्ट्रिया मध्य यूरोप का एक प्रमुख देश है। यह बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, उच्च प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और मीडिया और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करता है।
यह यात्रा फरवरी में भारत-ऑस्ट्रिया स्टार्टअप ब्रिज के शुभारंभ के कुछ महीनों बाद हो रही है। इस ब्रिज का उद्देश्य दोनों देशों के स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ाना है। क्वात्रा ने कहा, 'हमारे निवेश संबंध भी लगातार बढ़ रहे हैं, भले ही मात्रा के लिहाज से वे छोटे हों। कई ऑस्ट्रियाई कंपनियों की भारत में मौजूदगी है। फरवरी 2024 में भारत-ऑस्ट्रिया के बीच एक स्टार्टर ब्रिज भी लॉन्च किया गया, जिसकी शुरुआत पहले ही बहुत अच्छी रही है। भारत और ऑस्ट्रिया ने एक व्यापक प्रवासन और गतिशीलता समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं।'
ऑस्ट्रिया में पीएम मोदी
- फोटो : ANI
ऑस्ट्रिया के साथ व्यापारिक रिश्ते कैसे हैं?
2023 में दोनों देशों के बीच लगभग 243 अरब रुपये का द्विपक्षीय व्यापार हुआ है। ऑस्ट्रिया के लिए भारत यूरोपीय संघ के बाहर इसके सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों में से एक है। भारत को ऑस्ट्रियाई निर्यात लगातार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रियन नेशनल बैंक (OeNB) के अनुसार 2023 के अंत तक ऑस्ट्रिया में भारत का प्रत्यक्ष निवेश 144 अरब था जबकि भारत में ऑस्ट्रियाई प्रत्यक्ष निवेश करीब 66 अरब तक पहुंच गया। भारत में लगभग 150 ऑस्ट्रियाई कंपनियों की शाखाएं हैं।
पीएम मोदी के साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी वियना गया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, ऑस्ट्रियाई संघीय आर्थिक चैंबर ने पीएम मोदी और ऑस्ट्रियाई उद्यमियों और भारत के प्रतिनिधिमंडल के बीच नेहमर और वैन डेर बेलन के साथ बैठकों के बीच एक बैठक आयोजित की है। यह आर्थिक बैठक हॉफबर्ग में हुई, जिसके अंत में पीएम मोदी और नेहमर का भाषण हुआ।