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टीम मोदी का नया चेहरा: युवा-जोश-अनुभव, कौशल का संगम

Thu, 08 Jul 2021 08:14 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई टीम में समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के साथ ही अपने क्षेत्र के बड़े चेहरों पर दांव लगाया है।
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शपथ लेते पीएम मोदी के मंत्री... - फोटो : ani
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई टीम में युवा जोश के साथ अनुभव और कौशल को तरजीह दी है। काम को मंत्रिपरिषद में बने रहने का पैमाना बनाते हुए उन्होंने कई पेशेवरों को मंत्री बनाया है। समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के साथ ही अपने क्षेत्र के बड़े चेहरों पर प्रधानमंत्री ने दांव लगाया है।

 

सात बार से लगातार सांसद इमरजेंसी में जेल गए 

 

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार (थावर चंद गहलोत को राज्यपाल बनाने के बाद एमपी में दलितों को दिया संदेश)

मध्यप्रदेश के दलित नेता। टीकमगढ़ सीट से लगातार सातवीं बार सांसद, मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री थे। दूसरे कार्यकाल में फिर से सुध ली गई। इसी राज्य के दलित चेहरा थावर चंद गहलोत को राज्यपाल बनाने के बाद मध्यप्रदेश में दलित बिरादरी को संदेश देने की जरूरत थी। इसके अलावा वह छात्र जीवन से ही संघ परिवार से जुड़े रहे हैं। वे इमरजेंसी में जेल भी गए। 

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आपदा प्रबंधन के माहिर 

  • अश्विनी वैष्णव 

ओडिशा से जुड़े वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे अश्विनी एमबीए और एमटेक हैं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भाजपा में शामिल हुए। ओडिशा में चक्रवात के दौरान बतौर जिलाधिकारी बेहतरीन कार्य के कारण चर्चा में आए। 2019 में राज्यसभा पहुंचे। 

कई योजनाएं कीं साकार 

  • राजकुमार सिंह 

प्रशासनिक अनुभवों के साथ ऊर्जा मंत्रालय में राज्यमंत्री की बेहतरीन जिम्मेदारी निभाने वाले राजकुमार सिंह ने कई अभिनव योजनाओं को मूर्त रूप दिया। हालांकि कैबिनेट का दर्जा पाने के लिए इन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा है। अपने कार्यकाल में नवीकरणीय और परंपरागत ऊर्जा क्षमता विस्तार के लिए इनाम मिला।

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मुख्यमंत्री रहते असम में फिर जीती भाजपा 

  • सर्बानंद सोनोवाल 

पहली बार तब चर्चा में आए जब भाजपा ने इन्हें असम का अध्यक्ष घोषित किया। असम गण परिषद से भाजपा में आए। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में राज्यमंत्री बनाया गया। बाद में साल 2016 के विधानसभा चुनाव बाद इन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया। इसी साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी को असम में फिर से जीत हासिल हुई। इस बार पार्टी ने इनकी जगह हिमंत बिस्वा सरमा को सीएम बनाया। तभी इन्हें केंद्र में मंत्री बनाए जाने की चर्चा थी। 

 नीतीश कुमार के करीबी 

  • रामचंद्र प्रसाद सिंह 

यूपी काडर के आईएएस अधिकारी रहे रामचंद्र प्रसाद सिंह जदयू के जरिए राजनीति में आए। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के करीबी। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष। पहले भी मंत्री बनाए जाने की चर्चा थी। हालांकि मंत्रियों की संख्या पर पेच फंसने के कारण मौका नहीं मिला। 

बतौर खेल मंत्री छोड़ी छाप 

  • किरेन रिजिजू 

खेल मंत्रालय में बतौर युवा मंत्री अपनी छाप छोड़ी। खेल संघों और एसोसिएशनों को अधिक ताकत देकर पीएम के खेलो इंडिया मिशन को आगे बढ़ाने का काम किया। कोरोना काल में भी ओलंपिक की तैयारी भी प्रमोशन का कारण बना है। खिलाड़ियों के कल्याण के लिए सक्रियता से काम करने के लिए जाने जाते हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और मराठा आरक्षण के पैरोकार 

  • नारायण तातु राणे (महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र के कद्दावर नेता और शिवसेना के संस्थापकों में से एक)

सत्तर वर्षीय राणे शिवसेना में रहते राज्य के मुख्यमंत्री बने। तत्कालीन पार्टी सुप्रीमो बाल ठाकरे से मतभेद के बाद शिवेसना छोड़ 2005 में कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस से मोहभंग के बाद महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष के रूप में नई पार्टी बनाई। फिर भाजपा में शामिल हो कर राज्यसभा पहुंचे। मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, उद्योग, राजस्व सहित कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 

सरकार बनवाने का इनाम 

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया 

50 वर्षीय ज्योतिरादित्य ने पिछले साल मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बनवाने की पटकथा लिखी। पुरस्कार के रूप में उन्हें कैबिनेट मंत्री का ओहदा मिला है। साल 2001 में पिता माधव राव सिंधिया की मौत के बाद उनकी राजनीतिक विरासत संभाली। 

लोजपा तोड़ी, पद पाया 

  • पशुपति कुमार पारस 

दलितों के बड़े नेताओं में शुमार रामविलास पासवान के छोटे भाई। हाल ही में लोजपा में बगावत कर अपने भतीजे व दिवंगत पासवान के सांसद पुत्र चिराग पासवान को पार्टी में किनारे लगाया। पार्टी के छह में से पांच सांसदों को साधा। हमेशा बिहार की राजनीति की। केंद्र में पहली बार मंत्री बनने का मिला मौका।

चुनावी रणनीतिकारों में शामिल : भूपेंद्र यादव 
हरियाणा के गुरुग्राम निवासी भूपेंद्र यादव नामी अधिवक्ता हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति बनाने वाले चहरों में शुमार। यूपी और बिहार में चुनावी प्रबंधन का कौशल दिखाया। शाह के बाद भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में थे शामिल। साल 2012 से राज्यसभा सदस्य। सरकार में मंत्री के रूप में पहला अनुभव।

पंजाब पर नजर : हरदीप सिंह पुरी 
कोरोना काल में वंदेभारत योजना के तहत विशेष हवाई सेवा शुरू कर विदेश में फंसे भारतीयों को लाने का काम किया। शहरी विकास मंत्री के तौर पर दिल्ली की अनियमित कालोनियों को कानूनी जामा पहनाने का काम किया। क्योंकि पंजाब में अगले साल चुनाव हैं लिहाजा उनके प्रमोशन के राजनीतिक मायने भी हैं।

सस्ती दवाएं कराई उपलब्ध : मनसुख मंडारिया
उर्वरक और रसायन मंत्रालय में राज्य मंत्री गुजरात के मंडाविया ने 2 साल के कार्यकाल में 5100 जनऔषधि केंद्र खोले और 850 सस्ती दवाएं व हार्ट स्टेंट और नी रिप्लेसमेंट उपकरणों को सस्ते दामों में उपलब्ध कराएं। इन्होंने 10 करोड़ सैनिटरी पैड को जनऔषधि केंद्र से बंटवाकर यूनिसेफ से तारीफ पीई।

किसानों तक सीधी पहुंच: पुरुषोत्तम रुपाला 
राज्यसभा सदस्य रुपाला कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। किसानों तक सीधे पहुंचने, भूमिका बेहतर ढंग से निभाने के चलते इन्हें प्रमोशन मिला है। अपने चुटीले और ठेठ अंदाज में बात करने में निपुण रुपाला ग्रामीणों के लोकप्रिय हैं।

अमित शाह के सहयोगी : जी किशन रेड्डी
जी किशन रेड्डी गृह मंत्रालय में अमित शाह के छत्रछाया में रेड्डी ने अपने को निखारा है यही कारण है इतने महत्वपूर्ण मंत्रालय में उन्हें शाह की गैरहाजिरी में जो भी जिम्मेदारी दी गई भली प्रकार निभाई। संसद में अक्सर अमित शाह मंत्रालय के सवालों के जवाब उन्हीं से दिलाते रहे हैं।
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अनुप्रिया पटेल
अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के कुर्मी समाज की बड़ी नेता है। पूर्वांचल के मिर्जापुर से लगातार दूसरी बार सांसद है। मोदी 1.0 सरकार में वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री रही हैं। अनुप्रिया विधायक भी रही हैं। उन्होंने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से एमबीए की डिग्री प्राप्त की है और एक निजी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कैरियर की शुरुआत की। अनुप्रिया के पति आशीष पटेल भी विधान परिषद सदस्य हैं। अनुप्रिया सहित उनकी पार्टी के दो सांसद हैं।

पंकज चौधरी
महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी ने गोरखपुर नगर निगम के पार्षद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे गोरखपुर के उप महापौर भी रहे और 1991 में पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए। 1996, 1998, 2004, 2014 और 2019 में पांचवीं बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए हैं। वे गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए शिक्षित हैं।

कौशल किशोर
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर मोहनलागंज से लगातार दूसरी बार सांसद हैं। कौशल किशोर 2002 में मलिहाबाद से विधायक भी रहे और 2002-03 तक मुलायम सिंह सरकार में मंत्री भी रहे। कौशल किशोर भाजपा के प्रमुख दलित चेहरों में से एक हैं, हालांकि शुरुआती दौर में वे वामपंथी विचारधारा से भी जुड़े रहे। उनकी पहचान मजदूर, श्रमिक और वंचित वर्ग की आवाज उठाने वाले नेताओं की रही है। उनकी पत्नी जय देवी भी विधायक है। 

एसपी सिंह बघेल
आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल पांच बार सांसद रहे हैं। इससे पहले 2017 विधानसभा चुनाव में टुंडला से विधायक निर्वाचित होकर योगी सरकार में पशुधन विकास मंत्री रहे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से मिलिट्री साइंस में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। वह एलएलबी भी है। 1998, 1999 और 2004 में जलेसर लोकसभा क्षेत्र से बघेल समाजवादी पार्टी से सांसद रहे। 2014 में बसपा से राज्यसभा सदस्य रहे। 2015 में भाजपा में शामिल होकर ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए।

बीएल वर्मा
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बीएल वर्मा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से एमए की डिग्री प्राप्त की है। वर्मा 2018 में यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष भी रहे हैं। लोधी समाज में वर्मा का मजबूत आधार है, वे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबी हैं।

अजय मिश्रा टेनी
लखीमपुर खीरी से लगातार दूसरी बार सांसद अजय मिश्रा टेनी निगासन से विधायक भी रहे हैं। वे संसद में ग्रामीण विकास की स्थायी समिति की सदस्य भी रहे हैं।

भानु प्रताप वर्मा
जालौन से पांचवीं बार सांसद भानुप्रताप वर्मा 1991-93 में विधायक भी रहे हैं। 1996 में पहली बार जालौन से सांसद निर्वाचित हुए। 1998 में दूसरी बार, 2004 में तीसरी बार, 2014 में चौथी और 2019 में पांचवीं बार सांसद निर्वाचित हुए। वे 2011-13 तक भाजपा एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। बुंदेलखंड में भाजपा के अनुसूचित वर्ग के बड़े नेता हैं।

अजय कुमार 
खीरी से भाजपा सांसद रहे अजय कुमार भी केंद्र में यूपी से नए चेहरे हैं। उन्हें भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिला है, अपने लोकसभा क्षेत्र में टेनी के नाम से मशहूर अजय उत्तर प्रदेश से दो बार से सांसद हैं। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान देकर राज्य के नाराज ब्राह्मणों को साधने के रूप में देखा जा रहा है। अजय की लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, बहराइच समेत आसपास के इलाकों में ब्राह्मण समाज पर खासी पकड़ मानी जाती है। उन्हें श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं का पालन करने के लिए 17 वीं लोकसभा के संसद रत्न अवार्ड से भी नवाजा गया था।  वह लोकलेखा समिति के सदस्य और यूपी के पहले सांसद है जिन्होंने इस पुरस्कार से नवाजा गया था।

देवू सिंह चौहान
गुजरात की खेड़ा सीट से सांसद हैं वह इस सीट से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। विधानसभा में भी उन्होंने अपने इलाके का प्रतिनिधित्व किया है। पेशे से रेडियो इंजीनियर चौहान की पहचान प्रखर राजनेता के तौर पर होती है।  

भगवंत खुबा 
कर्नाटक की बीदर सीट से भाजपा सांसद हैं। पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर खुबा को तकनीकी क्षेत्र में दक्षता हासिल है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में इन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। मुख्यमंत्री को हराने के बाद उनका नाम चर्चा में आया था।

कापिल मोरेश्वर पाटील
महाराष्ट्र के भिवंडी से भाजपा सांसद हैं,  वह लगातार दूसरी बार इस लोकसभा सीट से चुनकर संसद पहुंचे हैं। पाटील को सहकारी संस्थाओं के मामले दक्षता हासिल है। वह ठाणे के जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने 2014 में एनसीपी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। वह पिछली लोकसभा में शहरी विकास की स्थायी समिति और रेल मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य चुने गए हैं।
 
डॉ. सुभाष सरकार
पश्चिम बंगाल बांकुरा से भाजपा सांसद हैं।  पेशे से चिकित्सक सरकार को सदन के पटल पर मुखरता के साथ पश्चिम बंगाल के मामलों में  पार्टी  का पक्ष रखते आए हैं। हाल ही में सरकार का नाम तब चर्चा में आया जब ईद के मौके पर अपने संसदीय क्षेत्र पतालाखुरी इलाके में किसानों से मिलने जाते हुए उनके काफिले पर हमला हुआ था, जिसमें उन्होंने टीएमसी के गुंडों पर इस हमले का आरोप लगाया था और इस हमले में उनके वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए थे। यह अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान कल्याण बोर्ड के सदस्य हैं और पांच दशकों से रामकृष्ण मिशन से जुड़े हुए हैं।                                                                                                                             
भागवत किशन राव कराड
भाजपा के टिकट से  राज्यसभा से पहली बार सांसद बने हैं।  पेशे से जाने-माने डॉक्टर हैं, औरंगाबाद के मेयर भी रहे हैं। जर्नल सर्जन हैं साथ ही चिकित्सीय क्षेत्र में उन्हें खासी महारत हासिल है।      
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