अनुप्रिया पटेल
अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के कुर्मी समाज की बड़ी नेता है। पूर्वांचल के मिर्जापुर से लगातार दूसरी बार सांसद है। मोदी 1.0 सरकार में वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री रही हैं। अनुप्रिया विधायक भी रही हैं। उन्होंने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से एमबीए की डिग्री प्राप्त की है और एक निजी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कैरियर की शुरुआत की। अनुप्रिया के पति आशीष पटेल भी विधान परिषद सदस्य हैं। अनुप्रिया सहित उनकी पार्टी के दो सांसद हैं।
पंकज चौधरी
महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी ने गोरखपुर नगर निगम के पार्षद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे गोरखपुर के उप महापौर भी रहे और 1991 में पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए। 1996, 1998, 2004, 2014 और 2019 में पांचवीं बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए हैं। वे गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए शिक्षित हैं।
कौशल किशोर
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर मोहनलागंज से लगातार दूसरी बार सांसद हैं। कौशल किशोर 2002 में मलिहाबाद से विधायक भी रहे और 2002-03 तक मुलायम सिंह सरकार में मंत्री भी रहे। कौशल किशोर भाजपा के प्रमुख दलित चेहरों में से एक हैं, हालांकि शुरुआती दौर में वे वामपंथी विचारधारा से भी जुड़े रहे। उनकी पहचान मजदूर, श्रमिक और वंचित वर्ग की आवाज उठाने वाले नेताओं की रही है। उनकी पत्नी जय देवी भी विधायक है।
एसपी सिंह बघेल
आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल पांच बार सांसद रहे हैं। इससे पहले 2017 विधानसभा चुनाव में टुंडला से विधायक निर्वाचित होकर योगी सरकार में पशुधन विकास मंत्री रहे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से मिलिट्री साइंस में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। वह एलएलबी भी है। 1998, 1999 और 2004 में जलेसर लोकसभा क्षेत्र से बघेल समाजवादी पार्टी से सांसद रहे। 2014 में बसपा से राज्यसभा सदस्य रहे। 2015 में भाजपा में शामिल होकर ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए।
बीएल वर्मा
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बीएल वर्मा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से एमए की डिग्री प्राप्त की है। वर्मा 2018 में यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष भी रहे हैं। लोधी समाज में वर्मा का मजबूत आधार है, वे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबी हैं।
अजय मिश्रा टेनी
लखीमपुर खीरी से लगातार दूसरी बार सांसद अजय मिश्रा टेनी निगासन से विधायक भी रहे हैं। वे संसद में ग्रामीण विकास की स्थायी समिति की सदस्य भी रहे हैं।
भानु प्रताप वर्मा
जालौन से पांचवीं बार सांसद भानुप्रताप वर्मा 1991-93 में विधायक भी रहे हैं। 1996 में पहली बार जालौन से सांसद निर्वाचित हुए। 1998 में दूसरी बार, 2004 में तीसरी बार, 2014 में चौथी और 2019 में पांचवीं बार सांसद निर्वाचित हुए। वे 2011-13 तक भाजपा एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। बुंदेलखंड में भाजपा के अनुसूचित वर्ग के बड़े नेता हैं।
अजय कुमार
खीरी से भाजपा सांसद रहे अजय कुमार भी केंद्र में यूपी से नए चेहरे हैं। उन्हें भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिला है, अपने लोकसभा क्षेत्र में टेनी के नाम से मशहूर अजय उत्तर प्रदेश से दो बार से सांसद हैं। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान देकर राज्य के नाराज ब्राह्मणों को साधने के रूप में देखा जा रहा है। अजय की लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, बहराइच समेत आसपास के इलाकों में ब्राह्मण समाज पर खासी पकड़ मानी जाती है। उन्हें श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं का पालन करने के लिए 17 वीं लोकसभा के संसद रत्न अवार्ड से भी नवाजा गया था। वह लोकलेखा समिति के सदस्य और यूपी के पहले सांसद है जिन्होंने इस पुरस्कार से नवाजा गया था।
देवू सिंह चौहान
गुजरात की खेड़ा सीट से सांसद हैं वह इस सीट से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। विधानसभा में भी उन्होंने अपने इलाके का प्रतिनिधित्व किया है। पेशे से रेडियो इंजीनियर चौहान की पहचान प्रखर राजनेता के तौर पर होती है।
भगवंत खुबा
कर्नाटक की बीदर सीट से भाजपा सांसद हैं। पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर खुबा को तकनीकी क्षेत्र में दक्षता हासिल है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में इन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। मुख्यमंत्री को हराने के बाद उनका नाम चर्चा में आया था।
कापिल मोरेश्वर पाटील
महाराष्ट्र के भिवंडी से भाजपा सांसद हैं, वह लगातार दूसरी बार इस लोकसभा सीट से चुनकर संसद पहुंचे हैं। पाटील को सहकारी संस्थाओं के मामले दक्षता हासिल है। वह ठाणे के जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने 2014 में एनसीपी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। वह पिछली लोकसभा में शहरी विकास की स्थायी समिति और रेल मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य चुने गए हैं।
डॉ. सुभाष सरकार
पश्चिम बंगाल बांकुरा से भाजपा सांसद हैं। पेशे से चिकित्सक सरकार को सदन के पटल पर मुखरता के साथ पश्चिम बंगाल के मामलों में पार्टी का पक्ष रखते आए हैं। हाल ही में सरकार का नाम तब चर्चा में आया जब ईद के मौके पर अपने संसदीय क्षेत्र पतालाखुरी इलाके में किसानों से मिलने जाते हुए उनके काफिले पर हमला हुआ था, जिसमें उन्होंने टीएमसी के गुंडों पर इस हमले का आरोप लगाया था और इस हमले में उनके वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए थे। यह अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान कल्याण बोर्ड के सदस्य हैं और पांच दशकों से रामकृष्ण मिशन से जुड़े हुए हैं।
भागवत किशन राव कराड
भाजपा के टिकट से राज्यसभा से पहली बार सांसद बने हैं। पेशे से जाने-माने डॉक्टर हैं, औरंगाबाद के मेयर भी रहे हैं। जर्नल सर्जन हैं साथ ही चिकित्सीय क्षेत्र में उन्हें खासी महारत हासिल है।