हिमाचल विधानसभा चुनाव में महिलाओं को उम्मीदवार बनाने में सियासी दलों ने बेशक दरियादिली नहीं दिखाई, लेकिन महिलाओं के वोटों को हासिल करने को लेकर कवायद तेज है।
सूबे के कुल वोटों में महिला मतों की संख्या 48 प्रतिशत से ज्यादा है। कांग्रेस पार्टी के लिए गुड़िया बलात्कार का मामला सिरदर्द बना हुआ है तो कम संख्या में महिलाओं को उम्मीदवार बनाए जाने के मामले को लेकर भाजपा ने सीधे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधा है।
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भाजपा एवं पीएम नरेंद्र मोदी को महिलाओं का सच्चा हितैषी करार देते हुए सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि पीएम मोदी ही महिलाओं के असल हितैषी हैं।
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के जरिए महिला आरक्षण पर पीएम को लिखा गया पत्र महज राजनीतिक कदम है। सोनिया गांधी जिस दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, उनकी कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल में महज दो महिलाओं को ही उम्मीदवार बनाया है।
सात महिलाओं को भाजपा ने बनाया उम्मीदवार
ठाकुर ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले पीएम मोदी असल में महिला सशक्तिकरण के पैरोकार हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की इच्छाशक्ति की वजह से भाजपा ने न सिर्फ 7 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है, बल्कि ऐसी सीटों पर महिलाओं को उम्मीदवार बनाया गया है जो कि परंपरागत रूप से भाजपा का मजबूत किला मानी जाती हैं। ये कदम देश की आधी आबादी पर पीएम मोदी के भरोसे को जताता है।
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अनुराग के अनुसार महिलाओं की विधानसभा में भागीदारी बढ़ाने के मकसद से ही पार्टी नेतृत्व ने शांता कुमार के अतिप्रभाव वाले पालमपुर सीट से इंदू गोस्वामी को उम्मीदवार बनाया है।
प्रेम कुमार धूमल की परंपरागत सीट कही जाने वाली भोरंज सीट से वर्तमान विधायक अनिल धीमान की जगह कमलेश कुमारी को उम्मीदवार बनाया गया है। पालमपुर और भोरंज दोनों ही सीट के उमीदवारों की जीत तय है। ऐसा करके पीएम मोदी ने सुनिश्चित किया है कि विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़े।
महिलाओं के लिए किए ढेरों काम
अनुराग ने कहा कि पीएम मोदी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरह महज दिखावा नहीं करते, बल्कि महिलाओं के जीवनस्तर को सुधारने के लिए उन्होंने बड़े कदम उठाए हैं।
उज्जवला योजना हो या जनधन योजना, केंद्र की इन योजनाओं ने महिलाओं के जीवनस्तर को सुधारा है। हिमाचल प्रदेश में मुद्रा योजना के तहत जिन लोगों को ऋण दिया गया है, उनमें महिलाओं की भागीदारी 60 प्रतिशत से ज्यादा है।
इसके अलावा प्रेम कुमार धूमल ने मुख्यमंत्री रहते हुए निकाय और निचले स्तर के चुनावों में 50 प्रतिशत का आरक्षण प्रदान कर उन्हें विकास में भागीदार बनाया है। जबकि कांग्रेस के पिछले 5 वर्ष के शासन में सूबे की कानून व्यवस्था इस कदर बिगड़ी है कि प्रदेश का नाम बदनाम हुआ है।