प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिचालन क्षमता बढ़ाने और बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता में सुधार करते हुए उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मोदी ने बुधवार शाम को ऊर्जा और नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के काम की समीक्षा करते हुए बताया कि बिजली क्षेत्र विशेष रूप से बिजली वितरण खंड में समस्याएं क्षेत्रों और राज्यों में भिन्न हैं।
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 'मंत्रालय को सभी समाधानों की तलाश करने की बजाय, प्रत्येक राज्य को अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए राज्य-विशेष समाधानों को लागू करने पर ध्यान देना चाहिए।'
समीक्षा के दौरान बिजली क्षेत्र में समस्याओं के निवारण के लिए संशोधित टैरिफ नीति और बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 सहित नीतिगत पहलों पर भी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने परिचालन क्षमता बढ़ाने और बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता में सुधार करते हुए, उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मोदी ने बिजली मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि डिस्कॉम (वितरण कंपनियां) अपने प्रदर्शन मापदंडों को समय-समय पर प्रकाशित करें ताकि लोगों को पता चले कि उनके प्रदाता कैसे अन्य की तुलना में भिन्न हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बिजली क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भारत में बनाए जाएं।
मोदी ने यह भी महसूस किया कि लद्दाख की कार्बन न्यूट्रल योजना में तेजी लाई जानी चाहिए। बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग करके तटीय क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पर भी चर्चा की। उन्होंने रूफटॉप सौर ऊर्जा के अभिनव मॉडल पर काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर राज्य में कम से कम एक शहर (राजधानी का शहर या कोई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल) होना चाहिए जो रूफटॉप पर सौर ऊर्जा उत्पादन करके पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित हो।