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जजों की नियुक्ति और लंबित मामलों पर राहुल ने मोदी सरकार को सुनाई खरी-खरी, भाजपा ने दिया करारा जवाब

Sun, 25 Mar 2018 04:44 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राहुल गांधी (फाइल फोटो)
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यायालयों में बढ़ते लंबित मामलों और जजों के खाली पदों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पर सवाल उठाए हैं। राहुल ने शनिवार को इससे संबंधित दो ट्वीट कर अपनी बात रखी है। उन्होंने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का खारिज करने वाले जज केएम. जोसफ की सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।

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राहुल का कहना है कि सुप्रीमकोर्ट, हाईकोर्ट और स्थानीय अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित मामले हैं और न्यायालयों में लंबे समय से बड़ी संख्या में जजों के पद खाली पड़े हैं जिससे न्यायिक प्रणाली ध्वस्त हो गई है। उन्होंने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट में 55 हजार से अधिक, हाईकोर्ट में 37 लाख से अधिक और स्थानीय अदालतों में 2.6 करोड़ से अधिक विवाद लंबित हैं जबकि जबकि कानून मंत्री फेक खबरें फैला रहे हैं। जबकि हाईकोर्ट में चार सौ और स्थानीय अदालतों में छह हजार जजों की नियुक्ति नहीं की गई है।

राहुल ने एक अन्य ट्वीट करके जस्टिस केएम. जोसफ के मामले में सीधे तौर पर प्रधानमंत्री पर टिप्पणी की है। राहुल ने लिखा है कि उत्तराखंड में 2016 में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले को तत्कालीन जज जोसफ ने गलत ठहरा पलट दिया था। उनका नाम सर्वोच्च न्यायालय के लिए प्रस्तावित था लेकिन मोदी जी के अंहकार को चोट लगी। सुप्रीम कोर्ट और देश विभिन्न हाईकोर्ट के लिए सौ से अधिक जजों की नियुक्ति अनुमति न मिलने से रुकी हुई है।

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गुस्से और हताशा में हैं राहुल: रविशंकर प्रसाद

रवि शंकर प्रसाद
राहुल के आरोपों का केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार देर शाम पलटवार किया। उन्होंने कहा कि फेसबुक डाटा चुराने के मामले में कैंब्रिज एनालिटिका को नोटिस मिलने से राहुल चिंतित हैं। इसी गुस्से और हताशा में अब वह न्यायपालिका को राजनीति में घसीट रहे हैं जोकि बहुत ही निंदनीय है।

प्रसाद ने लगातार कई ट्वीट कर राहुल पर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राहुल की टीम इस मामले में भी सही से अपना होमवर्क नहीं कर पाई। 

यूपीए वन में हाईकोर्ट में औसत नियुक्ति का आंकड़ा 86 प्रति साल जबकि यूपीए-2 में यह 79 था। एनडीए सरकार में यह आंकड़ा सालाना 109 है। उन्होंने कहा कि एनडीए को अदालतों में जज नियुक्ति की लंबितता यूपीए से विरासत में मिली थी। हम इंफास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और तकनीक का इस्तेमाल कर न्यायिक प्रक्रिया में तेजी ला रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में 126 हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति की गई। यह आजादी के बाद सबसे अधिक नियुक्ति का रिकॉर्ड है। मई 2014 से अब तक एनडीए सरकार ने 17 सुप्रीम कोर्ट के जज, 326 हाईकोर्ट जज और 304 एडिशनल जजों की नियुक्ति की है। इसके अलावा हाईकोर्ट में 173 जजों के नए पद बनाए गए जबकि यूपीए-2 में केवल 20 जजों के पद सृजित किए गए थे।
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