उच्च सदन में नासिर हुसैन ने प्रश्न पूछते हुए कहा कि संभवत: पीएम मोदी ने पहली बार विदेश में किसी राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए प्रचार किया। इससे बाद जब वो उम्मीदवार और दोस्त राष्ट्रपति बन गए हैं तो उन्होंने पहला वार भारतीयों पर ही कर दिया है।
अमेरिका से वापस भेजे गए भारतीय अप्रवासियों के मुद्दे पर विपक्ष सरकार के खिलाफ हमलावर है। संसद में इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों के सांसदों ने जमकर हंगामा काटा। इस बीच, उच्च सदन में कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन के पीएम मोदी से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए खरी-खोटी सुना दी। उनके सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पीएम मोदी ने विदेश में जाकर किसी के लिए भी प्रचार नहीं किया है। जयशंकर ने कहा कि वे साफ तौर पर एक दलीय रुख रखते हैं।
विज्ञापन
नासिर हुसैन ने पूछा था सवाल
उच्च सदन में नासिर हुसैन ने प्रश्न पूछते हुए कहा कि संभवत: पीएम मोदी ने पहली बार विदेश में किसी राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए प्रचार किया। इससे बाद जब वो उम्मीदवार और दोस्त राष्ट्रपति बन गए हैं तो उन्होंने पहला वार भारतीयों पर ही कर दिया है। इस दौरान उपसभापति हरिवंश ने उनका विरोध करते हुए कहा कि उनका सवाल खुद ही पढ़ा।
जयशंकर ने दिया करारा जवाब
नासिर हुसैन के सवाल का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि 'सांसद स्पष्ट रूप से एक दलीय रवैया रखते हैं, वे सदन में झूठ बोलते रहते हैं। प्रधानमंत्री ने किसी के लिए प्रचार नहीं किया। एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में जयशंकर ने कहा कि सरकार सभी देशों में छात्रों की संख्या की निगरानी करती है। हम उनके कल्याण की भी सावधानीपूर्वक निगरानी करते हैं। जहां भी कोई तनाव की स्थिति या हिंसा की संभावना होती है, हम छात्रों को सचेत करते हैं, जैसा कि हमने यूक्रेन में किया था। विदेश मंत्री ने आगे कहा जिस भी किसी देश में हमें छात्रों के बचाव के लिए उड़ान चलाने या ऐसी किसी अन्य स्थिति में कोई और कदम उठाने की जरूरत होगी, हम उसके लिए तैयार हैं। हमारे पास किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए योजना रहती है।
विज्ञापन
नासिर हुसैन और कई अन्य सांसदों ने जताया जयशंकर की टिप्पणी का विरोध
इस दौरान जयशंकर द्वारा झूठा करार देने पर नासिर हुसैन और कुछ अन्य कांग्रेस सदस्यों ने जयशंकर की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री असंसदीय भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते। वहीं, उपसभापति हरिवंश ने नासिर हुसैन की टिप्पणी को रिकॉर्ड पर रखने से इनकार कर दिया। उपसभापति जो उस समय सभापति का प्रभार संभाल रहे थे, उन्होंने कहा कि उनका सवाल युद्ध वाली स्थितियों के बाद विदेश में भारतीय छात्रों की निगरानी को लेकर पर उनके प्रश्न से संबंधित नहीं है। इसके अलावा, आपको संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी चाहिए थी, जोकि आपने नहीं ली। ऐसे में कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा।